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रायगढ़ जिला जेल में अवैध शराब बिक्री के एक मामले में बंद 28 वर्षीय संजय बघेल नामक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। बताया गया है कि तबीयत बिगड़ने पर संजय को मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद मृतक कैदी के परिजनों ने जेल में मारपीट का गंभीर आरोप लगाया है और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, जेल प्रशासन और पुलिस ने परिजनों द्वारा लगाए गए इन आरोपों से इनकार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, संजय बघेल की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने और आगे की जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।

2 hrs ago
user_Ibnul khan
Ibnul khan
Media house कांसबेल, जशपुर, छत्तीसगढ़•
2 hrs ago

रायगढ़ जिला जेल में अवैध शराब बिक्री के एक मामले में बंद 28 वर्षीय संजय बघेल नामक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। बताया गया है कि तबीयत बिगड़ने पर संजय को मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद मृतक कैदी के परिजनों ने जेल में मारपीट का गंभीर आरोप लगाया है और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, जेल प्रशासन और पुलिस ने परिजनों द्वारा लगाए गए इन आरोपों से इनकार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, संजय बघेल की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने और आगे की जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।

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  • रायगढ़ जिला जेल में अवैध शराब बिक्री के एक मामले में बंद 28 वर्षीय संजय बघेल नामक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। बताया गया है कि तबीयत बिगड़ने पर संजय को मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद मृतक कैदी के परिजनों ने जेल में मारपीट का गंभीर आरोप लगाया है और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, जेल प्रशासन और पुलिस ने परिजनों द्वारा लगाए गए इन आरोपों से इनकार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, संजय बघेल की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने और आगे की जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
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    रायगढ़ जिला जेल में अवैध शराब बिक्री के एक मामले में बंद 28 वर्षीय संजय बघेल नामक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। बताया गया है कि तबीयत बिगड़ने पर संजय को मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

इस घटना के बाद मृतक कैदी के परिजनों ने जेल में मारपीट का गंभीर आरोप लगाया है और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

वहीं, जेल प्रशासन और पुलिस ने परिजनों द्वारा लगाए गए इन आरोपों से इनकार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, संजय बघेल की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने और आगे की जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
    user_Ibnul khan
    Ibnul khan
    Media house कांसबेल, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • जशपुर के चुंडाभ पाठ जलाशय में सड़क पर पानी भर जाने के कारण आवाजाही पूरी तरह से बंद हो गई थी। जानकारी के अनुसार, 'चुंडा पाठ जलाशय मिशन योजना' के तहत नदी में पानी भर जाने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई थी। अब इस मार्ग पर आवाजाही के लिए 'रास्ता नंबर 2.0' उपलब्ध करा दिया गया है, जिससे लोग बिना किसी चिंता के नए मार्ग का उपयोग कर सकते हैं।
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    जशपुर के चुंडाभ पाठ जलाशय में सड़क पर पानी भर जाने के कारण आवाजाही पूरी तरह से बंद हो गई थी। जानकारी के अनुसार, 'चुंडा पाठ जलाशय मिशन योजना' के तहत नदी में पानी भर जाने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई थी। अब इस मार्ग पर आवाजाही के लिए 'रास्ता नंबर 2.0' उपलब्ध करा दिया गया है, जिससे लोग बिना किसी चिंता के नए मार्ग का उपयोग कर सकते हैं।
    user_JASHPUR ZONE
    JASHPUR ZONE
    जशपुर, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • अंबिकापुर शहर के बंगाली चौक, रामानुजगंज रोड पर स्थित ट्रैफिक सिग्नल पिछले लगभग दो सप्ताह से खराब पड़ा हुआ है। इस कारण राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक स्थानीय ट्रैफिक हवलदार ने जानकारी दी है कि सिग्नल लंबे समय से बंद है, लेकिन अब तक इसकी मरम्मत नहीं की गई है। हवलदार के अनुसार, रात के समय चौक पर पर्याप्त रोशनी और सुचारु ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था न होने के कारण कई लोग गिरकर घायल भी हो चुके हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह एक व्यस्त मार्ग होने के बावजूद, संबंधित विभाग द्वारा इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। बंगाली चौक को अंबिकापुर का एक प्रमुख यातायात केंद्र माना जाता है, जहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। एमडी न्यूज़ के माध्यम से लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बंगाली चौक स्थित ट्रैफिक सिग्नल की शीघ्र मरम्मत कराई जाए, ताकि दुर्घटनाओं पर रोक लग सके और यातायात व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।
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    अंबिकापुर शहर के बंगाली चौक, रामानुजगंज रोड पर स्थित ट्रैफिक सिग्नल पिछले लगभग दो सप्ताह से खराब पड़ा हुआ है। इस कारण राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक स्थानीय ट्रैफिक हवलदार ने जानकारी दी है कि सिग्नल लंबे समय से बंद है, लेकिन अब तक इसकी मरम्मत नहीं की गई है।

हवलदार के अनुसार, रात के समय चौक पर पर्याप्त रोशनी और सुचारु ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था न होने के कारण कई लोग गिरकर घायल भी हो चुके हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह एक व्यस्त मार्ग होने के बावजूद, संबंधित विभाग द्वारा इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। बंगाली चौक को अंबिकापुर का एक प्रमुख यातायात केंद्र माना जाता है, जहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं।

एमडी न्यूज़ के माध्यम से लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बंगाली चौक स्थित ट्रैफिक सिग्नल की शीघ्र मरम्मत कराई जाए, ताकि दुर्घटनाओं पर रोक लग सके और यातायात व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।
    user_Himanshu raj
    Himanshu raj
    Social Media Manager अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • अंबिकापुर के तकिया क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण कर बनाए गए 17 अवैध मकानों को प्रशासन और वन विभाग की टीम ने रविवार सुबह बुलडोजर चलाकर ढहा दिया। यह कार्रवाई अंबिकापुर और आसपास के क्षेत्रों में वन भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ जारी अभियान का हिस्सा है। शहर से लगे तकिया पावर हाउस के पास हुई इस कार्रवाई के दौरान वन विभाग की टीम के साथ प्रशासनिक व पुलिस अमला भी मौजूद था। इस कार्रवाई से पहले वन विभाग व प्रशासन ने 20 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने को कहा था। अतिक्रमणकारियों का आरोप था कि वे लंबे समय से (कुछ के अनुसार 20-30 या 30-40 सालों से) यहां रह रहे हैं, लेकिन उन्हें वन भूमि का पट्टा नहीं दिया गया। इस मामले में हाईकोर्ट ने प्रशासन व वन विभाग को जांच कर 60 दिनों में जवाब देने का आदेश दिया था। जांच के बाद यह बात सामने आई कि अतिक्रमण बहुत पुराना नहीं है और वे वन भूमि पट्टा के पात्र नहीं हैं, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। कुछ लोगों ने अपने सामान हटा लिए थे, जबकि कईयों ने नोटिस का पालन नहीं किया था। इस संबंध में भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने खुद पर लगने वाले उस आरोप पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा जाता है कि वे एक धर्म विशेष के लोगों को निशाना बनाकर अवैध अतिक्रमण हटवाते हैं। उन्होंने तकिया में तोड़े जा रहे मकानों में किस धर्म के लोग रहते हैं, यह देखने की बात कही। उन्होंने यह भी बताया कि हाईकोर्ट के 2 अप्रैल के निर्देश के बाद हुई जांच में पाया गया कि अतिक्रमण नया था और निवासी पट्टे के पात्र नहीं थे। वहीं, कांग्रेस के पूर्व पार्षद दीपक मिश्रा ने कहा कि लोग 30-40 साल से रह रहे थे और उन्हें सामान निकालने का भी समय नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि रहवासियों ने सांसद-विधायक से मुलाकात की थी, जिन्होंने आश्वासन दिया था कि उनके घर नहीं टूटेंगे, जिस कारण वे कोर्ट नहीं गए। अब बारिश का मौसम सिर पर है और उनके मकान तोड़े जा रहे हैं, जिससे परिवारों के लिए संकट खड़ा हो गया है।
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    अंबिकापुर के तकिया क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण कर बनाए गए 17 अवैध मकानों को प्रशासन और वन विभाग की टीम ने रविवार सुबह बुलडोजर चलाकर ढहा दिया। यह कार्रवाई अंबिकापुर और आसपास के क्षेत्रों में वन भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ जारी अभियान का हिस्सा है। शहर से लगे तकिया पावर हाउस के पास हुई इस कार्रवाई के दौरान वन विभाग की टीम के साथ प्रशासनिक व पुलिस अमला भी मौजूद था।

इस कार्रवाई से पहले वन विभाग व प्रशासन ने 20 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने को कहा था। अतिक्रमणकारियों का आरोप था कि वे लंबे समय से (कुछ के अनुसार 20-30 या 30-40 सालों से) यहां रह रहे हैं, लेकिन उन्हें वन भूमि का पट्टा नहीं दिया गया। इस मामले में हाईकोर्ट ने प्रशासन व वन विभाग को जांच कर 60 दिनों में जवाब देने का आदेश दिया था। जांच के बाद यह बात सामने आई कि अतिक्रमण बहुत पुराना नहीं है और वे वन भूमि पट्टा के पात्र नहीं हैं, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। कुछ लोगों ने अपने सामान हटा लिए थे, जबकि कईयों ने नोटिस का पालन नहीं किया था।

इस संबंध में भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने खुद पर लगने वाले उस आरोप पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा जाता है कि वे एक धर्म विशेष के लोगों को निशाना बनाकर अवैध अतिक्रमण हटवाते हैं। उन्होंने तकिया में तोड़े जा रहे मकानों में किस धर्म के लोग रहते हैं, यह देखने की बात कही। उन्होंने यह भी बताया कि हाईकोर्ट के 2 अप्रैल के निर्देश के बाद हुई जांच में पाया गया कि अतिक्रमण नया था और निवासी पट्टे के पात्र नहीं थे। वहीं, कांग्रेस के पूर्व पार्षद दीपक मिश्रा ने कहा कि लोग 30-40 साल से रह रहे थे और उन्हें सामान निकालने का भी समय नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि रहवासियों ने सांसद-विधायक से मुलाकात की थी, जिन्होंने आश्वासन दिया था कि उनके घर नहीं टूटेंगे, जिस कारण वे कोर्ट नहीं गए। अब बारिश का मौसम सिर पर है और उनके मकान तोड़े जा रहे हैं, जिससे परिवारों के लिए संकट खड़ा हो गया है।
    user_Jarif Khan
    Jarif Khan
    अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    5 hrs ago
  • चैनपुर/गुमला के बरवे क्षेत्र के 83 गांवों में संचालित 'सिरसी-ता नाले ककड़ो लाता' जन-जागरण यात्रा का भव्य समापन सिरसी-ता नाले धर्मस्थल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर बरवे क्षेत्र के सभी 83 गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, समाज के गणमान्य लोग और श्रद्धालु उपस्थित रहे। जानकारी के अनुसार, यह जन-जागरण यात्रा 31 मई, 2026 को ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर सिरसी-ता नाले ककड़ो लाता धर्मस्थल से शुरू हुई थी और 14 जून, 2026 को उसी पवित्र स्थल पर समाप्त हुई। समापन कार्यक्रम में हजारों की संख्या में जुटे ग्रामीणों ने धर्मस्थल के विकास, संरक्षण और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की। सभा में सर्वसम्मति से यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया कि सिरसी-ता नाले ककड़ो लाता धर्मस्थल का विकास और निर्माण कार्य आदिवासी समाज के लोगों के एक-एक रुपये के सहयोग और आपसी चंदे से ही किया जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता शिव प्रकाश भगत ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह धर्मस्थल आदिवासी समाज की आस्था, संस्कृति और पहचान का प्रतीक है, जिसके संरक्षण और विकास की जिम्मेदारी समाज स्वयं उठाएगा। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि धर्मस्थल के विकास के लिए किसी विधायक, सांसद अथवा किसी अन्य सरकारी फंड से सहायता स्वीकार नहीं की जाएगी। इसके बजाय, धर्मस्थल का निर्माण, संरक्षण, विकास एवं देखरेख स्थानीय लोगों की निगरानी और सहभागिता में ही होगी। इस निर्णय का बरवे क्षेत्र के सभी 83 गांवों से आए ग्रामीणों ने समर्थन करते हुए संकल्प लिया कि वे अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर की जिम्मेदारी स्वयं निभाएंगे। वक्ताओं ने इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सिरसी-ता नाले ककड़ो लाता धर्मस्थल का विकास एवं निर्माण कार्य पूरी तरह जनसहयोग से पूरा करना बताया, ताकि आदिवासी समाज की आत्मनिर्भरता, सांस्कृतिक पहचान और परंपराएं अक्षुण्ण बनी रहें। कार्यक्रम का सफल संचालन अमित भगत ने किया, जबकि मनीषा उरांव, अनिता उरांव, जलेश्वर उरांव, सतीश चन्द्र भगत, शिवबालक भगत, लीला उरांव, भगत पति उरांव, ललिता उरांव, सुबरशनी मुंडा एवं सत्येन्द्र भगत सहित कई लोगों ने जन-जागरण यात्रा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंत में, आयोजन समिति ने इस जन-जागरण यात्रा को ऐतिहासिक बनाने के लिए बरवे क्षेत्र के सभी 83 गांवों के ग्रामीणों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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    चैनपुर/गुमला के बरवे क्षेत्र के 83 गांवों में संचालित 'सिरसी-ता नाले ककड़ो लाता' जन-जागरण यात्रा का भव्य समापन सिरसी-ता नाले धर्मस्थल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर बरवे क्षेत्र के सभी 83 गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, समाज के गणमान्य लोग और श्रद्धालु उपस्थित रहे। जानकारी के अनुसार, यह जन-जागरण यात्रा 31 मई, 2026 को ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर सिरसी-ता नाले ककड़ो लाता धर्मस्थल से शुरू हुई थी और 14 जून, 2026 को उसी पवित्र स्थल पर समाप्त हुई। समापन कार्यक्रम में हजारों की संख्या में जुटे ग्रामीणों ने धर्मस्थल के विकास, संरक्षण और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की।

सभा में सर्वसम्मति से यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया कि सिरसी-ता नाले ककड़ो लाता धर्मस्थल का विकास और निर्माण कार्य आदिवासी समाज के लोगों के एक-एक रुपये के सहयोग और आपसी चंदे से ही किया जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता शिव प्रकाश भगत ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह धर्मस्थल आदिवासी समाज की आस्था, संस्कृति और पहचान का प्रतीक है, जिसके संरक्षण और विकास की जिम्मेदारी समाज स्वयं उठाएगा। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि धर्मस्थल के विकास के लिए किसी विधायक, सांसद अथवा किसी अन्य सरकारी फंड से सहायता स्वीकार नहीं की जाएगी। इसके बजाय, धर्मस्थल का निर्माण, संरक्षण, विकास एवं देखरेख स्थानीय लोगों की निगरानी और सहभागिता में ही होगी। इस निर्णय का बरवे क्षेत्र के सभी 83 गांवों से आए ग्रामीणों ने समर्थन करते हुए संकल्प लिया कि वे अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर की जिम्मेदारी स्वयं निभाएंगे।

वक्ताओं ने इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सिरसी-ता नाले ककड़ो लाता धर्मस्थल का विकास एवं निर्माण कार्य पूरी तरह जनसहयोग से पूरा करना बताया, ताकि आदिवासी समाज की आत्मनिर्भरता, सांस्कृतिक पहचान और परंपराएं अक्षुण्ण बनी रहें। कार्यक्रम का सफल संचालन अमित भगत ने किया, जबकि मनीषा उरांव, अनिता उरांव, जलेश्वर उरांव, सतीश चन्द्र भगत, शिवबालक भगत, लीला उरांव, भगत पति उरांव, ललिता उरांव, सुबरशनी मुंडा एवं सत्येन्द्र भगत सहित कई लोगों ने जन-जागरण यात्रा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंत में, आयोजन समिति ने इस जन-जागरण यात्रा को ऐतिहासिक बनाने के लिए बरवे क्षेत्र के सभी 83 गांवों के ग्रामीणों के प्रति आभार व्यक्त किया।
    user_चैनपुर अपडेट
    चैनपुर अपडेट
    Classified ads newspaper publisher चैनपुर, गुमला, झारखंड•
    5 hrs ago
  • चैनपुर में, लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत ने चैनपुर और जारी प्रखंडों के लिए अपने सांसद प्रतिनिधियों की नियुक्ति की है। सांसद भगत ने अल्बर्ट तिग्गा को चैनपुर प्रखंड के लिए सांसद प्रतिनिधि के रूप में नामित किया है, जबकि मोहम्मद जाकिर खान को जारी प्रखंड के लिए सांसद प्रतिनिधि की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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    चैनपुर में, लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत ने चैनपुर और जारी प्रखंडों के लिए अपने सांसद प्रतिनिधियों की नियुक्ति की है। सांसद भगत ने अल्बर्ट तिग्गा को चैनपुर प्रखंड के लिए सांसद प्रतिनिधि के रूप में नामित किया है, जबकि मोहम्मद जाकिर खान को जारी प्रखंड के लिए सांसद प्रतिनिधि की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
    user_Sachin public news
    Sachin public news
    Local News Reporter चैनपुर, गुमला, झारखंड•
    20 hrs ago
  • कोलेबिरा प्रखंड कांग्रेस कमेटी की मासिक बैठक रविवार को बरवाडीह रोड स्थित सामुदायिक भवन में प्रखंड अध्यक्ष राकेश कोनगाड़ी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य SIR मैपिंग और अनमैपिंग कार्यों की समीक्षा करना था। पंचायत अध्यक्षों और बीएलए को निर्धारित समय सीमा के भीतर शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। बैठक में सभी पंचायत अध्यक्षों से कहा गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अगले दो दिनों के भीतर एक विशेष अभियान चलाकर मैपिंग कार्य को पूरा करें। वहीं, बीएलए को 15 जून तक अनमैपिंग को मैपिंग में बदलने का लक्ष्य सौंपा गया है। इस दौरान कार्यकर्ताओं को पेसा कानून की जानकारी भी दी गई और कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी द्वारा क्षेत्र में कराए जा रहे विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रखंड अध्यक्ष राकेश कोनगाड़ी ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए सभी कार्यकर्ताओं से पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया। जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष सुरेश द्विवेदी ने भी पंचायत स्तर पर संगठन को सक्रिय रखने और जनहित के मुद्दों को जनता तक पहुँचाने पर विशेष जोर दिया। बैठक में प्रदेश अल्पसंख्यक सचिव फुल्केरिया डांग, सांसद प्रतिनिधि सुनील खड़िया, जोसेफ सोरेंग, तजमुल अहमद, लूथर सुरीन, जोगेंद्र मांझी, एरेन केरकेट्टा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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    कोलेबिरा प्रखंड कांग्रेस कमेटी की मासिक बैठक रविवार को बरवाडीह रोड स्थित सामुदायिक भवन में प्रखंड अध्यक्ष राकेश कोनगाड़ी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य SIR मैपिंग और अनमैपिंग कार्यों की समीक्षा करना था। पंचायत अध्यक्षों और बीएलए को निर्धारित समय सीमा के भीतर शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में सभी पंचायत अध्यक्षों से कहा गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अगले दो दिनों के भीतर एक विशेष अभियान चलाकर मैपिंग कार्य को पूरा करें। वहीं, बीएलए को 15 जून तक अनमैपिंग को मैपिंग में बदलने का लक्ष्य सौंपा गया है। इस दौरान कार्यकर्ताओं को पेसा कानून की जानकारी भी दी गई और कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी द्वारा क्षेत्र में कराए जा रहे विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई।

प्रखंड अध्यक्ष राकेश कोनगाड़ी ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए सभी कार्यकर्ताओं से पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया। जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष सुरेश द्विवेदी ने भी पंचायत स्तर पर संगठन को सक्रिय रखने और जनहित के मुद्दों को जनता तक पहुँचाने पर विशेष जोर दिया। बैठक में प्रदेश अल्पसंख्यक सचिव फुल्केरिया डांग, सांसद प्रतिनिधि सुनील खड़िया, जोसेफ सोरेंग, तजमुल अहमद, लूथर सुरीन, जोगेंद्र मांझी, एरेन केरकेट्टा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
    user_Satyam kumar keshri
    Satyam kumar keshri
    सिमडेगा, सिमडेगा, झारखंड•
    23 hrs ago
  • पत्थलगांव-बाकारुमा से लैलूंगा स्टेट हाईवे पर मालवाहक पिकअप में यात्रियों को ठूंस-ठूंस कर भरा गया, जहाँ कई लोगों के पैर तक गाड़ी से बाहर लटकते हुए दिखाई दिए। यह गंभीर स्थिति सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता पैदा करती है, और सवाल उठता है कि चंद रुपयों के लिए लोगों की जान से खिलवाड़ कब तक जारी रहेगा।
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    पत्थलगांव-बाकारुमा से लैलूंगा स्टेट हाईवे पर मालवाहक पिकअप में यात्रियों को ठूंस-ठूंस कर भरा गया, जहाँ कई लोगों के पैर तक गाड़ी से बाहर लटकते हुए दिखाई दिए। यह गंभीर स्थिति सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता पैदा करती है, और सवाल उठता है कि चंद रुपयों के लिए लोगों की जान से खिलवाड़ कब तक जारी रहेगा।
    user_Ibnul khan
    Ibnul khan
    Media house कांसबेल, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    20 hrs ago
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