logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

हरदा के रहटगांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में अपर्याप्त उपचार और लापरवाही को लेकर ग्रामीणों तथा जनप्रतिनिधियों ने शनिवार सुबह से धरना प्रदर्शन किया। उनका मुख्य विरोध वर्तमान डॉक्टर अंशुल नरनावरे के खिलाफ था, जिन पर उचित उपचार न करने, मरीजों से इलाज के लिए पैसे मांगने और अस्पताल की छवि धूमिल करने का आरोप था, जिससे मरीज और ग्रामीण परेशान थे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि डॉ. नरनावरे, एक ट्रेनी डॉक्टर होने के कारण, अनुभव की कमी के चलते हर महीने लगभग 1800 ओपीडी वाले अस्पताल में मरीजों की संख्या घटाकर 250-300 कर दी थी। उन पर मरीजों और स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार करने का भी आरोप था, और उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि उन्हें डॉक्टरी का पूरा ज्ञान नहीं है, जिससे किसी बड़ी दुर्घटना का खतरा मंडरा रहा था। दोपहर में, जिला चिकित्सालय एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एच.पी. सिंह और टिमरनी सीबीएमओ डॉ. एम.के. चौरे ने लिखित आश्वासन दिया कि डॉ. अंशुल नरनावरे को तत्काल प्रभाव से रहटगांव पीएचसी से हटा दिया गया है और उनके खिलाफ जांच प्रक्रिया में है। अधिकारियों ने एक सप्ताह के भीतर स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति का भी आश्वासन दिया। तब तक, टिमरनी बीएमओ डॉ. एम.के. चौरे स्वयं यहां की व्यवस्थाएं संभालेंगे और वैकल्पिक रूप से टिमरनी से एक ट्रेनिंग डॉक्टर को नियुक्त किया गया है। डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि डॉ. अरुण अहिरवार की पदस्थापना शासन के आदेशानुसार हुई है, जिनकी ज्वाइनिंग की अनुमति संचालनालय भोपाल से एक सप्ताह में मिलने की उम्मीद है, साथ ही मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा चयनित चिकित्सा अधिकारियों की पदस्थापना प्रक्रिया में है, जिसके तहत रहटगांव पीएचसी में भी नियुक्ति की संभावना है। धरने के दौरान ग्रामीणों ने अस्पताल की अन्य समस्याएं भी बताईं, जैसे 75 आदिवासी बहुल गांवों को सेवा देने वाले इस केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा देने का पूर्व में दिया गया आश्वासन अधूरा है। उन्होंने एक स्थायी डॉक्टर, एक स्थायी महिला डॉक्टर, दो नर्सिंग ऑफिसर, एक गार्ड, एक स्टोरकीपर और एन.आर.सी. में एक ए.एन.एम. सहित अन्य रिक्त पदों को भरने की मांग की। साथ ही, पी.एम. कक्ष की सख्त आवश्यकता, अस्पताल की छत की मरम्मत, शव वाहन और एम्बुलेंस की व्यवस्था, तथा अस्पताल की विद्युत लाइन को रहटगांव से जोड़ने की मांग भी की गई। टिमरनी जनपद उपाध्यक्ष एवं रोगी कल्याण समिति अध्यक्ष अनिल कुमार वर्मा (लिबर्टी) ने चेतावनी दी कि यदि समय-सीमा में स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं होती है, तो उन्हें फिर से उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा। इन आश्वासनों के बाद, ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।

3 hrs ago
user_संदीप अग्रवाल Agrawal
संदीप अग्रवाल Agrawal
Journalist हरदा, हरदा, मध्य प्रदेश•
3 hrs ago

हरदा के रहटगांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में अपर्याप्त उपचार और लापरवाही को लेकर ग्रामीणों तथा जनप्रतिनिधियों ने शनिवार सुबह से धरना प्रदर्शन किया। उनका मुख्य विरोध वर्तमान डॉक्टर अंशुल नरनावरे के खिलाफ था, जिन पर उचित उपचार न करने, मरीजों से इलाज के लिए पैसे मांगने और अस्पताल की छवि धूमिल करने का आरोप था, जिससे मरीज और ग्रामीण परेशान थे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि डॉ. नरनावरे, एक ट्रेनी डॉक्टर होने के कारण, अनुभव की कमी के चलते हर महीने लगभग 1800 ओपीडी वाले अस्पताल में मरीजों की संख्या घटाकर 250-300 कर दी थी। उन पर मरीजों और स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार

करने का भी आरोप था, और उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि उन्हें डॉक्टरी का पूरा ज्ञान नहीं है, जिससे किसी बड़ी दुर्घटना का खतरा मंडरा रहा था। दोपहर में, जिला चिकित्सालय एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एच.पी. सिंह और टिमरनी सीबीएमओ डॉ. एम.के. चौरे ने लिखित आश्वासन दिया कि डॉ. अंशुल नरनावरे को तत्काल प्रभाव से रहटगांव पीएचसी से हटा दिया गया है और उनके खिलाफ जांच प्रक्रिया में है। अधिकारियों ने एक सप्ताह के भीतर स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति का भी आश्वासन दिया। तब तक, टिमरनी बीएमओ डॉ. एम.के. चौरे स्वयं यहां की व्यवस्थाएं संभालेंगे और वैकल्पिक रूप से टिमरनी से एक ट्रेनिंग

डॉक्टर को नियुक्त किया गया है। डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि डॉ. अरुण अहिरवार की पदस्थापना शासन के आदेशानुसार हुई है, जिनकी ज्वाइनिंग की अनुमति संचालनालय भोपाल से एक सप्ताह में मिलने की उम्मीद है, साथ ही मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा चयनित चिकित्सा अधिकारियों की पदस्थापना प्रक्रिया में है, जिसके तहत रहटगांव पीएचसी में भी नियुक्ति की संभावना है। धरने के दौरान ग्रामीणों ने अस्पताल की अन्य समस्याएं भी बताईं, जैसे 75 आदिवासी बहुल गांवों को सेवा देने वाले इस केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा देने का पूर्व में दिया गया आश्वासन अधूरा है। उन्होंने एक स्थायी डॉक्टर, एक स्थायी महिला

डॉक्टर, दो नर्सिंग ऑफिसर, एक गार्ड, एक स्टोरकीपर और एन.आर.सी. में एक ए.एन.एम. सहित अन्य रिक्त पदों को भरने की मांग की। साथ ही, पी.एम. कक्ष की सख्त आवश्यकता, अस्पताल की छत की मरम्मत, शव वाहन और एम्बुलेंस की व्यवस्था, तथा अस्पताल की विद्युत लाइन को रहटगांव से जोड़ने की मांग भी की गई। टिमरनी जनपद उपाध्यक्ष एवं रोगी कल्याण समिति अध्यक्ष अनिल कुमार वर्मा (लिबर्टी) ने चेतावनी दी कि यदि समय-सीमा में स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं होती है, तो उन्हें फिर से उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा। इन आश्वासनों के बाद, ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • हरदा के रहटगांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में अपर्याप्त उपचार और लापरवाही को लेकर ग्रामीणों तथा जनप्रतिनिधियों ने शनिवार सुबह से धरना प्रदर्शन किया। उनका मुख्य विरोध वर्तमान डॉक्टर अंशुल नरनावरे के खिलाफ था, जिन पर उचित उपचार न करने, मरीजों से इलाज के लिए पैसे मांगने और अस्पताल की छवि धूमिल करने का आरोप था, जिससे मरीज और ग्रामीण परेशान थे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि डॉ. नरनावरे, एक ट्रेनी डॉक्टर होने के कारण, अनुभव की कमी के चलते हर महीने लगभग 1800 ओपीडी वाले अस्पताल में मरीजों की संख्या घटाकर 250-300 कर दी थी। उन पर मरीजों और स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार करने का भी आरोप था, और उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि उन्हें डॉक्टरी का पूरा ज्ञान नहीं है, जिससे किसी बड़ी दुर्घटना का खतरा मंडरा रहा था। दोपहर में, जिला चिकित्सालय एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एच.पी. सिंह और टिमरनी सीबीएमओ डॉ. एम.के. चौरे ने लिखित आश्वासन दिया कि डॉ. अंशुल नरनावरे को तत्काल प्रभाव से रहटगांव पीएचसी से हटा दिया गया है और उनके खिलाफ जांच प्रक्रिया में है। अधिकारियों ने एक सप्ताह के भीतर स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति का भी आश्वासन दिया। तब तक, टिमरनी बीएमओ डॉ. एम.के. चौरे स्वयं यहां की व्यवस्थाएं संभालेंगे और वैकल्पिक रूप से टिमरनी से एक ट्रेनिंग डॉक्टर को नियुक्त किया गया है। डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि डॉ. अरुण अहिरवार की पदस्थापना शासन के आदेशानुसार हुई है, जिनकी ज्वाइनिंग की अनुमति संचालनालय भोपाल से एक सप्ताह में मिलने की उम्मीद है, साथ ही मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा चयनित चिकित्सा अधिकारियों की पदस्थापना प्रक्रिया में है, जिसके तहत रहटगांव पीएचसी में भी नियुक्ति की संभावना है। धरने के दौरान ग्रामीणों ने अस्पताल की अन्य समस्याएं भी बताईं, जैसे 75 आदिवासी बहुल गांवों को सेवा देने वाले इस केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा देने का पूर्व में दिया गया आश्वासन अधूरा है। उन्होंने एक स्थायी डॉक्टर, एक स्थायी महिला डॉक्टर, दो नर्सिंग ऑफिसर, एक गार्ड, एक स्टोरकीपर और एन.आर.सी. में एक ए.एन.एम. सहित अन्य रिक्त पदों को भरने की मांग की। साथ ही, पी.एम. कक्ष की सख्त आवश्यकता, अस्पताल की छत की मरम्मत, शव वाहन और एम्बुलेंस की व्यवस्था, तथा अस्पताल की विद्युत लाइन को रहटगांव से जोड़ने की मांग भी की गई। टिमरनी जनपद उपाध्यक्ष एवं रोगी कल्याण समिति अध्यक्ष अनिल कुमार वर्मा (लिबर्टी) ने चेतावनी दी कि यदि समय-सीमा में स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं होती है, तो उन्हें फिर से उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा। इन आश्वासनों के बाद, ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।
    4
    हरदा के रहटगांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में अपर्याप्त उपचार और लापरवाही को लेकर ग्रामीणों तथा जनप्रतिनिधियों ने शनिवार सुबह से धरना प्रदर्शन किया। उनका मुख्य विरोध वर्तमान डॉक्टर अंशुल नरनावरे के खिलाफ था, जिन पर उचित उपचार न करने, मरीजों से इलाज के लिए पैसे मांगने और अस्पताल की छवि धूमिल करने का आरोप था, जिससे मरीज और ग्रामीण परेशान थे।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि डॉ. नरनावरे, एक ट्रेनी डॉक्टर होने के कारण, अनुभव की कमी के चलते हर महीने लगभग 1800 ओपीडी वाले अस्पताल में मरीजों की संख्या घटाकर 250-300 कर दी थी। उन पर मरीजों और स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार करने का भी आरोप था, और उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि उन्हें डॉक्टरी का पूरा ज्ञान नहीं है, जिससे किसी बड़ी दुर्घटना का खतरा मंडरा रहा था। दोपहर में, जिला चिकित्सालय एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एच.पी. सिंह और टिमरनी सीबीएमओ डॉ. एम.के. चौरे ने लिखित आश्वासन दिया कि डॉ. अंशुल नरनावरे को तत्काल प्रभाव से रहटगांव पीएचसी से हटा दिया गया है और उनके खिलाफ जांच प्रक्रिया में है। अधिकारियों ने एक सप्ताह के भीतर स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति का भी आश्वासन दिया। तब तक, टिमरनी बीएमओ डॉ. एम.के. चौरे स्वयं यहां की व्यवस्थाएं संभालेंगे और वैकल्पिक रूप से टिमरनी से एक ट्रेनिंग डॉक्टर को नियुक्त किया गया है। डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि डॉ. अरुण अहिरवार की पदस्थापना शासन के आदेशानुसार हुई है, जिनकी ज्वाइनिंग की अनुमति संचालनालय भोपाल से एक सप्ताह में मिलने की उम्मीद है, साथ ही मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा चयनित चिकित्सा अधिकारियों की पदस्थापना प्रक्रिया में है, जिसके तहत रहटगांव पीएचसी में भी नियुक्ति की संभावना है।

धरने के दौरान ग्रामीणों ने अस्पताल की अन्य समस्याएं भी बताईं, जैसे 75 आदिवासी बहुल गांवों को सेवा देने वाले इस केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा देने का पूर्व में दिया गया आश्वासन अधूरा है। उन्होंने एक स्थायी डॉक्टर, एक स्थायी महिला डॉक्टर, दो नर्सिंग ऑफिसर, एक गार्ड, एक स्टोरकीपर और एन.आर.सी. में एक ए.एन.एम. सहित अन्य रिक्त पदों को भरने की मांग की। साथ ही, पी.एम. कक्ष की सख्त आवश्यकता, अस्पताल की छत की मरम्मत, शव वाहन और एम्बुलेंस की व्यवस्था, तथा अस्पताल की विद्युत लाइन को रहटगांव से जोड़ने की मांग भी की गई। टिमरनी जनपद उपाध्यक्ष एवं रोगी कल्याण समिति अध्यक्ष अनिल कुमार वर्मा (लिबर्टी) ने चेतावनी दी कि यदि समय-सीमा में स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं होती है, तो उन्हें फिर से उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा। इन आश्वासनों के बाद, ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।
    user_संदीप अग्रवाल Agrawal
    संदीप अग्रवाल Agrawal
    Journalist हरदा, हरदा, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • ode All Videos Images Short videos Shopping News Web Maps Books Flights Finance 16 sites रामायण के अनुसार माता सीता को अपने जीवन में दो बार वनवास का सामना करना पड़ा था। पहला वनवास उन्होंने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के साथ सहर्ष स्वीकार किया था, जबकि दूसरा वनवास उन्हें अयोध्या की प्रजा के संकोच और राजधर्म के कारण एकाकी बिताना पड़ा।  Wikipedia +2 माता सीता के दोनों वनवास की मुख्य बातें नीचे विस्तार से दी गई हैं: 1. पहला वनवास (प्रभु श्रीराम के साथ 14 वर्ष) जब राजा दशरथ ने कैकेयी के वचनों के कारण श्री राम को 14 वर्ष का वनवास दिया, तब सीता जी ने महलों के सुख त्याग कर पति के साथ वन जाने का निर्णय लिया।  YouTube·Tilak +4 दिव्य वस्त्र: वनवास यात्रा के दौरान अत्रि ऋषि की पत्नी माता अनुसूया ने सीता जी को एक दिव्य साड़ी और आभूषण भेंट किए थे, जो कभी मैले नहीं होते थे।  Quora +1 प्रमुख निवास स्थान: इस वनवास के दौरान उन्होंने चित्रकूट, दंडकारण्य और पंचवटी जैसे वनों में कुटिया बनाकर लंबा समय बिता ode All Videos Images Short videos Shopping News Web Maps Books Flights Finance 16 sites रामायण के अनुसार माता सीता को अपने जीवन में दो बार वनवास का सामना करना पड़ा था। पहला वनवास उन्होंने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के साथ सहर्ष स्वीकार किया था, जबकि दूसरा वनवास उन्हें अयोध्या की प्रजा के संकोच और राजधर्म के कारण एकाकी बिताना पड़ा।  Wikipedia +2 माता सीता के दोनों वनवास की मुख्य बातें नीचे विस्तार से दी गई हैं: 1. पहला वनवास (प्रभु श्रीराम के साथ 14 वर्ष) जब राजा दशरथ ने कैकेयी के वचनों के कारण श्री राम को 14 वर्ष का वनवास दिया, तब सीता जी ने महलों के सुख त्याग कर पति के साथ वन जाने का निर्णय लिया।  YouTube·Tilak +4 दिव्य वस्त्र: वनवास यात्रा के दौरान अत्रि ऋषि की पत्नी माता अनुसूया ने सीता जी को एक दिव्य साड़ी और आभूषण भेंट किए थे, जो कभी मैले नहीं होते थे।  प्रमुख निवास स्थान: इस वनवास के दौरान उन्होंने चित्रकूट, दंडकारण्य और पंचवटी जैसे वनों में कुटिया बनाकर लंबा समय बिता
    1
    ode

All

Videos

Images

Short videos

Shopping

News

Web

Maps

Books

Flights

Finance

16 sites

रामायण के अनुसार माता सीता को अपने जीवन में दो बार वनवास का सामना करना पड़ा था। पहला वनवास उन्होंने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के साथ सहर्ष स्वीकार किया था, जबकि दूसरा वनवास उन्हें अयोध्या की प्रजा के संकोच और राजधर्म के कारण एकाकी बिताना पड़ा। 

Wikipedia +2

माता सीता के दोनों वनवास की मुख्य बातें नीचे विस्तार से दी गई हैं:

1. पहला वनवास (प्रभु श्रीराम के साथ 14 वर्ष)

जब राजा दशरथ ने कैकेयी के वचनों के कारण श्री राम को 14 वर्ष का वनवास दिया, तब सीता जी ने महलों के सुख त्याग कर पति के साथ वन जाने का निर्णय लिया। 

YouTube·Tilak +4

दिव्य वस्त्र: वनवास यात्रा के दौरान अत्रि ऋषि की पत्नी माता अनुसूया ने सीता जी को एक दिव्य साड़ी और आभूषण भेंट किए थे, जो कभी मैले नहीं होते थे। 

Quora +1

प्रमुख निवास स्थान: इस वनवास के दौरान उन्होंने चित्रकूट, दंडकारण्य और पंचवटी जैसे वनों में कुटिया बनाकर लंबा समय बिता


ode
All
Videos
Images
Short videos
Shopping
News
Web
Maps
Books
Flights
Finance
16 sites
रामायण के अनुसार माता सीता को अपने जीवन में दो बार वनवास का सामना करना पड़ा था। पहला वनवास उन्होंने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के साथ सहर्ष स्वीकार किया था, जबकि दूसरा वनवास उन्हें अयोध्या की प्रजा के संकोच और राजधर्म के कारण एकाकी बिताना पड़ा। 
Wikipedia +2
माता सीता के दोनों वनवास की मुख्य बातें नीचे विस्तार से दी गई हैं:
1. पहला वनवास (प्रभु श्रीराम के साथ 14 वर्ष)
जब राजा दशरथ ने कैकेयी के वचनों के कारण श्री राम को 14 वर्ष का वनवास दिया, तब सीता जी ने महलों के सुख त्याग कर पति के साथ वन जाने का निर्णय लिया। 
YouTube·Tilak +4
दिव्य वस्त्र: वनवास यात्रा के दौरान अत्रि ऋषि की पत्नी माता अनुसूया ने सीता जी को एक दिव्य साड़ी और आभूषण भेंट किए थे, जो कभी मैले नहीं होते थे। 
प्रमुख निवास स्थान: इस वनवास के दौरान उन्होंने चित्रकूट, दंडकारण्य और पंचवटी जैसे वनों में कुटिया बनाकर लंबा समय बिता
    user_Sachinphotograpy Harsud
    Sachinphotograpy Harsud
    Photographer हरसूद, पूर्वी निमाड़, मध्य प्रदेश•
    22 hrs ago
  • आज इटारसी शहर को बिजली और पानी के दोहरे संकट का सामना करना पड़ा। सुबह 33केवी फीडर पर मिडस्पान पोल लगाने के लिए 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक बिजली आपूर्ति बंद रखी गई थी। जैसे ही दोपहर में लाइट आई, एक तेज आंधी-तूफान ने पथरोटा से सीपी नहर क्षेत्र तक भारी तबाही मचा दी। इस दौरान पेड़ गिरने से बिजली के खंभे और लाइनें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, जिसके परिणामस्वरूप पूरे दिन शहर में ब्लैकआउट जैसी स्थिति बनी रही। इस गंभीर बिजली संकट के कारण अब शहर के कई इलाकों में पीने के पानी की भारी किल्लत हो गई है। बिजली विभाग इस नुकसान का आकलन करने और सुधार कार्य में तेजी से जुटा हुआ है। नागरिक अपनी शिकायतें टोल-फ्री नंबर 1912, व्हाट्सएप नंबर 07552551222 और उपाय ऐप (Upay App) के माध्यम से दर्ज करा सकते हैं। लोगों से अपील की गई है कि इस जरूरी जानकारी को अधिक से अधिक साझा करें।
    1
    आज इटारसी शहर को बिजली और पानी के दोहरे संकट का सामना करना पड़ा। सुबह 33केवी फीडर पर मिडस्पान पोल लगाने के लिए 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक बिजली आपूर्ति बंद रखी गई थी। जैसे ही दोपहर में लाइट आई, एक तेज आंधी-तूफान ने पथरोटा से सीपी नहर क्षेत्र तक भारी तबाही मचा दी। इस दौरान पेड़ गिरने से बिजली के खंभे और लाइनें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, जिसके परिणामस्वरूप पूरे दिन शहर में ब्लैकआउट जैसी स्थिति बनी रही।

इस गंभीर बिजली संकट के कारण अब शहर के कई इलाकों में पीने के पानी की भारी किल्लत हो गई है। बिजली विभाग इस नुकसान का आकलन करने और सुधार कार्य में तेजी से जुटा हुआ है। नागरिक अपनी शिकायतें टोल-फ्री नंबर 1912, व्हाट्सएप नंबर 07552551222 और उपाय ऐप (Upay App) के माध्यम से दर्ज करा सकते हैं। लोगों से अपील की गई है कि इस जरूरी जानकारी को अधिक से अधिक साझा करें।
    user_Itarsi_update_786
    Itarsi_update_786
    Newspaper publisher इटारसी, नर्मदापुरम, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • हरसूद विधानसभा क्षेत्र के खार कला मंडल, खालवा मंडल और कलाम खुर्द में कार्यकर्ताओं और मंडल के सभी अध्यक्षों के साथ-साथ बूथ अध्यक्षों ने मिलकर श्रीमान द्वियदित शाह का जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर सभी ने माननीय जी का स्वागत भी किया।
    1
    हरसूद विधानसभा क्षेत्र के खार कला मंडल, खालवा मंडल और कलाम खुर्द में कार्यकर्ताओं और मंडल के सभी अध्यक्षों के साथ-साथ बूथ अध्यक्षों ने मिलकर श्रीमान द्वियदित शाह का जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर सभी ने माननीय जी का स्वागत भी किया।
    user_Atmaram Yadav
    Atmaram Yadav
    Farmer खलवा, पूर्वी निमाड़, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • सतपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र के अंतर्गत पचमढ़ी के पगरा और अंबा माई मार्ग के बीच शनिवार दोपहर करीब 2 बजे एक बाघ दिखाई देने से पर्यटकों में काफी उत्साह का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार, एक पर्यटक ने सड़क किनारे घूमते हुए इस बाघ का वीडियो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल हुए इस वीडियो में बाघ सड़क के पास शांत मुद्रा में विचरण करता दिखाई दे रहा है। हालांकि पचमढ़ी और उसके आसपास के जंगलों में वन्यजीवों की मौजूदगी सामान्य बात है, लेकिन सड़क के इतने निकट बाघ का दिखना पर्यटकों के लिए एक रोमांचक अनुभव रहा। वन विभाग की ओर से पर्यटकों को लगातार जंगल क्षेत्रों में सतर्क रहने और वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती रही है। हालांकि वन विभाग ने इस वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दृश्य पगरा और अंबा माई के बीच का ही है।
    1
    सतपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र के अंतर्गत पचमढ़ी के पगरा और अंबा माई मार्ग के बीच शनिवार दोपहर करीब 2 बजे एक बाघ दिखाई देने से पर्यटकों में काफी उत्साह का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार, एक पर्यटक ने सड़क किनारे घूमते हुए इस बाघ का वीडियो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

वायरल हुए इस वीडियो में बाघ सड़क के पास शांत मुद्रा में विचरण करता दिखाई दे रहा है। हालांकि पचमढ़ी और उसके आसपास के जंगलों में वन्यजीवों की मौजूदगी सामान्य बात है, लेकिन सड़क के इतने निकट बाघ का दिखना पर्यटकों के लिए एक रोमांचक अनुभव रहा।

वन विभाग की ओर से पर्यटकों को लगातार जंगल क्षेत्रों में सतर्क रहने और वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती रही है। हालांकि वन विभाग ने इस वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दृश्य पगरा और अंबा माई के बीच का ही है।
    user_Raj malviya
    Raj malviya
    Journalism होशंगाबाद, नर्मदापुरम, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • माखननगर क्षेत्र में प्री-मानसून की पहली तेज बारिश और आंधी ने शनिवार को महज 15 मिनट के भीतर भारी असर दिखाया। तेज हवाओं और तूफानी मौसम के कारण साकेत वेयरहाउस के सामने एक विशाल शीशम का पेड़ सड़क पर गिर गया, जिससे माखननगर-पिपरिया मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज आंधी के साथ अचानक बारिश शुरू हुई और देखते ही देखते कई स्थानों पर पेड़ धराशायी हो गए। साकेत वेयरहाउस के सामने गिरे इस पेड़ ने सड़क को अवरुद्ध कर दिया, जिसके कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थानीय लोगों ने बताया कि क्षेत्र के अन्य हिस्सों से भी पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, किसी जनहानि की कोई सूचना नहीं मिली है, लेकिन अचानक बदले मौसम ने लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। मौसम विभाग ने पहले ही प्रदेश में तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई थी, लेकिन पहली ही बारिश ने प्रशासन की तैयारियों और पेड़ों के रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़कों के किनारे मौजूद जर्जर और जोखिमपूर्ण पेड़ों की पहचान कर समय रहते उनकी छंटाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल, प्रशासन और स्थानीय अमला मार्ग से पेड़ हटाने के प्रयास में जुटा हुआ है, ताकि यातायात को जल्द से जल्द बहाल किया जा सके।
    3
    माखननगर क्षेत्र में प्री-मानसून की पहली तेज बारिश और आंधी ने शनिवार को महज 15 मिनट के भीतर भारी असर दिखाया। तेज हवाओं और तूफानी मौसम के कारण साकेत वेयरहाउस के सामने एक विशाल शीशम का पेड़ सड़क पर गिर गया, जिससे माखननगर-पिपरिया मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज आंधी के साथ अचानक बारिश शुरू हुई और देखते ही देखते कई स्थानों पर पेड़ धराशायी हो गए। साकेत वेयरहाउस के सामने गिरे इस पेड़ ने सड़क को अवरुद्ध कर दिया, जिसके कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थानीय लोगों ने बताया कि क्षेत्र के अन्य हिस्सों से भी पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, किसी जनहानि की कोई सूचना नहीं मिली है, लेकिन अचानक बदले मौसम ने लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है।

मौसम विभाग ने पहले ही प्रदेश में तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई थी, लेकिन पहली ही बारिश ने प्रशासन की तैयारियों और पेड़ों के रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़कों के किनारे मौजूद जर्जर और जोखिमपूर्ण पेड़ों की पहचान कर समय रहते उनकी छंटाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल, प्रशासन और स्थानीय अमला मार्ग से पेड़ हटाने के प्रयास में जुटा हुआ है, ताकि यातायात को जल्द से जल्द बहाल किया जा सके।
    user_Deepak sharma
    Deepak sharma
    Journalist होशंगाबाद, नर्मदापुरम, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • हरदा जिले के टिमरनी में युवाओं के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा की लगातार हो रही अवहेलना और उसकी क्षतिग्रस्त हालत को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने नगर परिषद के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। इसी क्रम में, एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने नगर परिषद टिमरनी का पुतला दहन किया, ताकि प्रशासन का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित किया जा सके। एबीवीपी के नगर अध्यक्ष अमित पालवे ने जानकारी देते हुए बताया कि नवीन बस स्टैंड पर स्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा की स्थिति काफी खराब है और वह क्षतिग्रस्त है। एबीवीपी पिछले कई महीनों से नगर परिषद से लगातार यह निवेदन कर रही है कि प्रतिमा का जीर्णोद्धार कर उसे उचित स्थान पर स्थापित किया जाए, लेकिन नगर परिषद ने हमेशा से ही इस मांग को नजरअंदाज किया है। परिषद के रोहित गौर ने इस दौरान चेतावनी दी कि यदि यह मांग अगले पांच दिनों के भीतर पूरी नहीं की जाती है, तो एबीवीपी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर देगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी नगर परिषद की होगी। इस विरोध प्रदर्शन में शुभम धनवारे, आशुतोष मालाकार, दीपेश कौशल, अंकित यादव, हिमेश कटारे, शुभम साकक्ले, वीरेंद्र धनवारे सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
    4
    हरदा जिले के टिमरनी में युवाओं के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा की लगातार हो रही अवहेलना और उसकी क्षतिग्रस्त हालत को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने नगर परिषद के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। इसी क्रम में, एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने नगर परिषद टिमरनी का पुतला दहन किया, ताकि प्रशासन का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित किया जा सके।

एबीवीपी के नगर अध्यक्ष अमित पालवे ने जानकारी देते हुए बताया कि नवीन बस स्टैंड पर स्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा की स्थिति काफी खराब है और वह क्षतिग्रस्त है। एबीवीपी पिछले कई महीनों से नगर परिषद से लगातार यह निवेदन कर रही है कि प्रतिमा का जीर्णोद्धार कर उसे उचित स्थान पर स्थापित किया जाए, लेकिन नगर परिषद ने हमेशा से ही इस मांग को नजरअंदाज किया है।

परिषद के रोहित गौर ने इस दौरान चेतावनी दी कि यदि यह मांग अगले पांच दिनों के भीतर पूरी नहीं की जाती है, तो एबीवीपी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर देगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी नगर परिषद की होगी। इस विरोध प्रदर्शन में शुभम धनवारे, आशुतोष मालाकार, दीपेश कौशल, अंकित यादव, हिमेश कटारे, शुभम साकक्ले, वीरेंद्र धनवारे सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
    user_संदीप अग्रवाल Agrawal
    संदीप अग्रवाल Agrawal
    Journalist हरदा, हरदा, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • देवास जिले की जनपद पंचायत कन्नौद के सतवास क्षेत्र में हुई पहली बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर आ गए। इसी दौरान मसुरिया और खेरखेड़ा के बीच रेतिया खाल की पुलिया पार करते समय एक स्विफ्ट कार तेज बहाव में फंसकर बहने लगी, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया। कार में ग्राम बुरट के चार लोग सवार थे। पुलिया पर तेज बहाव होने के कारण हालात बिगड़ते नजर आए, लेकिन पुलिया के दोनों तरफ लगी तार फेंसिंग ने कार को पूरी तरह बहने से रोक लिया। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और त्वरित रेस्क्यू अभियान चलाकर कार में फंसे चारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना से एक बड़ा हादसा टल गया और चारों लोगों की जान बच गई। ग्रामीणों के अनुसार, यह पुलिया सड़क से काफी नीचे बनी हुई है और बरसों पुरानी है, जिसके कारण थोड़ी सी भी बारिश होने पर यहां खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों ने नई पुलिया के निर्माण की मांग की है। प्रशासन द्वारा हमेशा चेतावनी दी जाती है कि नदी, नाले या पुल-पुलिया पर पानी होने पर उन्हें पार नहीं करना चाहिए, और इस घटनाक्रम से सबक लेने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही महंगी न पड़े।
    1
    देवास जिले की जनपद पंचायत कन्नौद के सतवास क्षेत्र में हुई पहली बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर आ गए। इसी दौरान मसुरिया और खेरखेड़ा के बीच रेतिया खाल की पुलिया पार करते समय एक स्विफ्ट कार तेज बहाव में फंसकर बहने लगी, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया। कार में ग्राम बुरट के चार लोग सवार थे।

पुलिया पर तेज बहाव होने के कारण हालात बिगड़ते नजर आए, लेकिन पुलिया के दोनों तरफ लगी तार फेंसिंग ने कार को पूरी तरह बहने से रोक लिया। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और त्वरित रेस्क्यू अभियान चलाकर कार में फंसे चारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना से एक बड़ा हादसा टल गया और चारों लोगों की जान बच गई।

ग्रामीणों के अनुसार, यह पुलिया सड़क से काफी नीचे बनी हुई है और बरसों पुरानी है, जिसके कारण थोड़ी सी भी बारिश होने पर यहां खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों ने नई पुलिया के निर्माण की मांग की है। प्रशासन द्वारा हमेशा चेतावनी दी जाती है कि नदी, नाले या पुल-पुलिया पर पानी होने पर उन्हें पार नहीं करना चाहिए, और इस घटनाक्रम से सबक लेने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही महंगी न पड़े।
    user_Rajendra shreevas
    Rajendra shreevas
    Local News Reporter कन्नौद, देवास, मध्य प्रदेश•
    23 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.