आसपुर विधायक उमेश डामोर ने राजस्थान विधानसभा में उठाए जनजातीय क्षेत्र के मुद्दे संवाददाता - संतोष व्यास डूंगरपुर। राजस्थान विधानसभा में वर्ष 2026-27 के बजट पर चर्चा के दौरान आसपुर विधायक उमेश डामोर ने जनजातीय (टीएसपी) क्षेत्र की उपेक्षा का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा, किसान और आमजन इस बजट से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे थे, लेकिन यह बजट विशेषकर जनजातीय क्षेत्रों की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सका। विधायक डामोर ने कहा कि वर्ष 2025-26 के बजट में टीएसपी जनजाति उप-योजना क्षेत्र के अंतर्गत आधारभूत सुविधाओं के विकास हेतु 1750 करोड़ रुपये की घोषणा की गई थी। इसका उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करना और जीवन स्तर को ऊंचा उठाना था, किंतु सरकार ने मात्र लगभग 55 प्रतिशत राशि ही खर्च की। शेष राशि व्यय न होना आदिवासी जनता के अधिकारों के साथ अन्याय है। उन्होंने बताया कि पिछले बजट में राजस्व ग्रामों का ड्रोन सर्वे पूरा कर आगामी वर्ष में 2 लाख परिवारों को नए पट्टे देने की घोषणा की गई थी। टीएसपी क्षेत्र में शिविर आयोजित होने के बावजूद पात्र परिवारों को पट्टे नहीं मिल पाए। उन्होंने सरकार से मांग की कि आदिवासी क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर पट्टा वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को वास्तविक लाभ मिल सके। विधायक डामोर ने कहा कि युवा स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा राष्ट्र की दिशा और दशा तय करता है, लेकिन वर्तमान बजट युवाओं के सपनों को साकार करने में प्रभावी नहीं दिखता। विधायक ने ट्राइबल टूरिज्म सर्किट योजना का मुद्दा भी उठाया। पिछले बजट में 100 करोड़ रुपये की घोषणा की गई थी, जिसमें त्रिपुरा सुंदरी मंदिर, मानगढ़ धाम, बेणेश्वर धाम, सीतामाता अभयारण्य तथा मातृ कुंडिया मंदिर जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि घोषित 100 करोड़ रुपये में से एक भी रुपया व्यय नहीं किया गया। हालांकि, उन्होंने बेणेश्वर धाम के लिए 130 करोड़ रुपये की नई घोषणा का स्वागत किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि घोषणाओं का धरातल पर क्रियान्वयन सुनिश्चित होना चाहिए। विधायक डामोर ने अपने विधानसभा क्षेत्र की प्रमुख मांग रखते हुए कहा कि रामगढ़ से आसपुर तक बनी डामरीकरण सड़क की स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है। बड़े-बड़े गड्ढों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। यह मार्ग क्षेत्र की जीवनरेखा है, इसलिए इसका शीघ्र नवीनीकरण कराया जाना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में मांग रखते हुए कहा कि विधानसभा क्षेत्र आसपुर के ब्लॉक आसपुर में आज भी राजकीय महाविद्यालय का अभाव है। विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए डूंगरपुर या सलूम्बर जाना पड़ता है, जिससे समय और धन की व्यय होता है। उन्होंने आसपुर में नवीन राजकीय महाविद्यालय खोलने की मांग की। विधायक ने आसपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बढ़ते मरीजों के दबाव का उल्लेख करते हुए इसे उप जिला अस्पताल में क्रमोन्नत करने की मांग की, ताकि स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। अंत में विधायक उमेश डामोर ने कहा कि आदिवासी क्षेत्र केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि वास्तविक विकास चाहता है। सरकार यदि संवेदनशीलता के साथ कार्य करे तो प्रदेश को विकास की नई दिशा दी जा सकती है।
आसपुर विधायक उमेश डामोर ने राजस्थान विधानसभा में उठाए जनजातीय क्षेत्र के मुद्दे संवाददाता - संतोष व्यास डूंगरपुर। राजस्थान विधानसभा में वर्ष 2026-27 के बजट पर चर्चा के दौरान आसपुर विधायक उमेश डामोर ने जनजातीय (टीएसपी) क्षेत्र की उपेक्षा का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा, किसान और आमजन इस बजट से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे थे, लेकिन यह बजट विशेषकर जनजातीय क्षेत्रों की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सका। विधायक डामोर ने कहा कि वर्ष 2025-26 के बजट में टीएसपी जनजाति उप-योजना क्षेत्र के अंतर्गत आधारभूत सुविधाओं के विकास हेतु 1750 करोड़ रुपये की घोषणा की गई थी। इसका उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करना और जीवन स्तर को ऊंचा उठाना था, किंतु सरकार ने मात्र लगभग 55 प्रतिशत राशि ही खर्च की। शेष राशि व्यय न होना आदिवासी जनता के अधिकारों के साथ अन्याय है। उन्होंने बताया कि पिछले बजट में राजस्व ग्रामों का ड्रोन सर्वे पूरा कर आगामी वर्ष में 2 लाख परिवारों को नए पट्टे देने की घोषणा की गई थी। टीएसपी क्षेत्र में शिविर आयोजित होने के बावजूद पात्र परिवारों को पट्टे नहीं मिल पाए। उन्होंने सरकार से मांग की कि आदिवासी क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर पट्टा वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को वास्तविक लाभ मिल सके। विधायक डामोर ने कहा कि युवा स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा राष्ट्र की दिशा और दशा तय करता है, लेकिन वर्तमान बजट युवाओं के सपनों को साकार करने में प्रभावी नहीं दिखता। विधायक ने ट्राइबल टूरिज्म सर्किट योजना का मुद्दा भी उठाया। पिछले बजट में 100 करोड़ रुपये की घोषणा की गई थी, जिसमें त्रिपुरा सुंदरी मंदिर, मानगढ़ धाम, बेणेश्वर धाम, सीतामाता अभयारण्य तथा मातृ कुंडिया मंदिर जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि घोषित 100 करोड़ रुपये में से एक भी रुपया व्यय नहीं किया गया। हालांकि, उन्होंने बेणेश्वर धाम के लिए 130 करोड़ रुपये की नई घोषणा का स्वागत किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि घोषणाओं का धरातल पर क्रियान्वयन सुनिश्चित होना चाहिए। विधायक डामोर ने अपने विधानसभा क्षेत्र की प्रमुख मांग रखते हुए कहा कि रामगढ़ से आसपुर तक बनी डामरीकरण सड़क की स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है। बड़े-बड़े गड्ढों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। यह मार्ग क्षेत्र की जीवनरेखा है, इसलिए इसका शीघ्र नवीनीकरण कराया जाना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में मांग रखते हुए कहा कि विधानसभा क्षेत्र आसपुर के ब्लॉक आसपुर में आज भी राजकीय महाविद्यालय का अभाव है। विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए डूंगरपुर या सलूम्बर जाना पड़ता है, जिससे समय और धन की व्यय होता है। उन्होंने आसपुर में नवीन राजकीय महाविद्यालय खोलने की मांग की। विधायक ने आसपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बढ़ते मरीजों के दबाव का उल्लेख करते हुए इसे उप जिला अस्पताल में क्रमोन्नत करने की मांग की, ताकि स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। अंत में विधायक उमेश डामोर ने कहा कि आदिवासी क्षेत्र केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि वास्तविक विकास चाहता है। सरकार यदि संवेदनशीलता के साथ कार्य करे तो प्रदेश को विकास की नई दिशा दी जा सकती है।
- संवाददाता - संतोष व्यास डूंगरपुर। राजस्थान विधानसभा में वर्ष 2026-27 के बजट पर चर्चा के दौरान आसपुर विधायक उमेश डामोर ने जनजातीय (टीएसपी) क्षेत्र की उपेक्षा का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा, किसान और आमजन इस बजट से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे थे, लेकिन यह बजट विशेषकर जनजातीय क्षेत्रों की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सका। विधायक डामोर ने कहा कि वर्ष 2025-26 के बजट में टीएसपी जनजाति उप-योजना क्षेत्र के अंतर्गत आधारभूत सुविधाओं के विकास हेतु 1750 करोड़ रुपये की घोषणा की गई थी। इसका उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करना और जीवन स्तर को ऊंचा उठाना था, किंतु सरकार ने मात्र लगभग 55 प्रतिशत राशि ही खर्च की। शेष राशि व्यय न होना आदिवासी जनता के अधिकारों के साथ अन्याय है। उन्होंने बताया कि पिछले बजट में राजस्व ग्रामों का ड्रोन सर्वे पूरा कर आगामी वर्ष में 2 लाख परिवारों को नए पट्टे देने की घोषणा की गई थी। टीएसपी क्षेत्र में शिविर आयोजित होने के बावजूद पात्र परिवारों को पट्टे नहीं मिल पाए। उन्होंने सरकार से मांग की कि आदिवासी क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर पट्टा वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को वास्तविक लाभ मिल सके। विधायक डामोर ने कहा कि युवा स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा राष्ट्र की दिशा और दशा तय करता है, लेकिन वर्तमान बजट युवाओं के सपनों को साकार करने में प्रभावी नहीं दिखता। विधायक ने ट्राइबल टूरिज्म सर्किट योजना का मुद्दा भी उठाया। पिछले बजट में 100 करोड़ रुपये की घोषणा की गई थी, जिसमें त्रिपुरा सुंदरी मंदिर, मानगढ़ धाम, बेणेश्वर धाम, सीतामाता अभयारण्य तथा मातृ कुंडिया मंदिर जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि घोषित 100 करोड़ रुपये में से एक भी रुपया व्यय नहीं किया गया। हालांकि, उन्होंने बेणेश्वर धाम के लिए 130 करोड़ रुपये की नई घोषणा का स्वागत किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि घोषणाओं का धरातल पर क्रियान्वयन सुनिश्चित होना चाहिए। विधायक डामोर ने अपने विधानसभा क्षेत्र की प्रमुख मांग रखते हुए कहा कि रामगढ़ से आसपुर तक बनी डामरीकरण सड़क की स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है। बड़े-बड़े गड्ढों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। यह मार्ग क्षेत्र की जीवनरेखा है, इसलिए इसका शीघ्र नवीनीकरण कराया जाना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में मांग रखते हुए कहा कि विधानसभा क्षेत्र आसपुर के ब्लॉक आसपुर में आज भी राजकीय महाविद्यालय का अभाव है। विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए डूंगरपुर या सलूम्बर जाना पड़ता है, जिससे समय और धन की व्यय होता है। उन्होंने आसपुर में नवीन राजकीय महाविद्यालय खोलने की मांग की। विधायक ने आसपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बढ़ते मरीजों के दबाव का उल्लेख करते हुए इसे उप जिला अस्पताल में क्रमोन्नत करने की मांग की, ताकि स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। अंत में विधायक उमेश डामोर ने कहा कि आदिवासी क्षेत्र केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि वास्तविक विकास चाहता है। सरकार यदि संवेदनशीलता के साथ कार्य करे तो प्रदेश को विकास की नई दिशा दी जा सकती है।1
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- आज दिनाक 18/02/2026 को स्थानीय महाविद्यालय जे.आर शर्मा झाड़ोल में “निर्वाचन साक्षरता क्लब” (इ.एल.सी.) का गठन कर निर्वाचन साक्षरता महोत्सव के तहत विविध आयोजन किया गया | महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एम. के. जैन ने बताया कि इ.एल.सी . का उदेश्य लोकतान्त्रिक मूल्यों एवं मतदान के प्रति जागरूकता को बढाना बताया | कार्यक्रम में मतदाता सूची में नाम जुडवाने कि प्रकिया इ. वी. एम. मशीन से मतदान कि पद्धति तथा अधिकाधिक लोगो को मतदान के लिए प्रेरित करने पर विस्तार से जानकारी दी गई | महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान के सहायक आचार्य राजेश बिलोनिया ने छात्रों को मतदान की शपथ दिलाते हुए भारत में चुनाव पद्धति के एतिहासिक विकास पर प्रकाश डालते हुए मताधिकार को लोकतंत्र की सबसे बडी शक्ति हैं और एक-एक मत अमूल्य हैं , स्वस्थ लोकतंत्र के निर्माण में सभी को मतदान करना अनिवार्य हैं | एन एस एस प्रभारी डॉ. अनिता गन्ना ने बताया कि महोत्सव के अन्तर्गत विधिवत आयोजन जेसे प्रश्नोत्तरी निबन्ध रंगोली आदि प्रतियोगिता का महाविद्यालय में आयोजन किया जाएगा |धन्यवाद ज्योति जैन ने दिया |1
- बांसवाड़ा जिले के मोटागांव क्षेत्र मे एक भीषण सड़क हादसे में दो चचेरे भाइयों की दर्दनाक मौत हो गई। जानकारी के अनुसार बोरदा निवासी नंदू पिता शंभू और विक्रम पिता लक्ष्मण बाइक से करगासिया से बोरदा लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही मोटागांव थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। जहां इलाज के दौरान दोनों ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर ट्रैक्टर चालक की तलाश शुरू कर दी है वही परिजनों ने लिखित रिपोर्ट दी है ।1
- बाँसवाड़ा जिले के सज्जनगढ़ ब्लॉक के घोती की टोडी गांव की 43 वर्षीय कमलादेवी भगोरा ने परंपरा, परिश्रम और परिवर्तन का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। साधारण किसान परिवार से जुड़ी कमलादेवी ने अपने अनुभव, संघर्ष और सीख को नेतृत्व में बदलकर न केवल अपने परिवार बल्कि सात गांवों की सैकड़ों महिलाओं को नई दिशा दी। सामाजिक संस्था वागधारा से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने भूमि अधिकार, महिला सशक्तिकरण, पंचायत भागीदारी और टिकाऊ जैविक कृषि पर काम शुरू किया। उनके प्रयासों से सात गांवों में महिला सक्षम समूह और ग्राम स्वराज समूह गठित हुए, जिनमें करीब 280 महिला-पुरुष जुड़े। इन समूहों ने महिलाओं की पंचायत भागीदारी, आर्थिक निर्णयों में भूमिका और सामुदायिक नेतृत्व को मजबूत किया। कमलादेवी ने अपने खेत में जैविक खेती अपनाकर उदाहरण प्रस्तुत किया। दो गायों से तैयार जैविक खाद, दशपर्णी-निमास्त्र जैसे कीटनाशकों और स्थानीय बीजों के उपयोग से उन्होंने लागत घटाई और उत्पादन बेहतर किया। वर्ष 2021-2025 के बीच बकरी पालन से लगभग 1.02 लाख रुपये की आय अर्जित कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की। मक्का, तुवर और सब्जियों की खेती के साथ बीज संरक्षण की परंपरा को भी पुनर्जीवित किया। उनकी पहल से प्रेरित होकर आसपास की महिलाओं ने भी छोटे स्तर पर जैविक खेती शुरू की। अब तक वे 200 से अधिक महिला किसानों को प्रशिक्षण दे चुकी हैं और स्थानीय बीज बैंक स्थापित करने की दिशा में काम कर रही हैं। समूह सदस्य बताती हैं कि जैविक खेती से खर्च कम हुआ, बचत बढ़ी और आत्मविश्वास मजबूत हुआ। सामाजिक पूर्वाग्रहों और चुनौतियों के बावजूद कमलादेवी ने संवाद और धैर्य से बदलाव की राह बनाई। आज उनकी पहल केवल आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और महिला नेतृत्व का सशक्त उदाहरण बन चुकी है। उनकी आगे की योजना अधिक महिलाओं को संगठित कर जैविक उत्पादों के लिए बेहतर बाजार व्यवस्था विकसित करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां आत्मनिर्भर और स्वस्थ कृषि प्रणाली अपना सकें।1
- सलूम्बर, 18 फरवरी। जिले में चल रहे शुद्ध आहार–मिलावट पर वार अभियान के तहत प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 200 किलो अवधि पार व दूषित खाद्य सामग्री मौके पर ही नष्ट करवाई। कलेक्टर अवधेश मीना और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. महेंद्र कुमार परमार के निर्देशन में खाद्य सुरक्षा अधिकारी घनश्याम सिंह सोलंकी के नेतृत्व में टीम ने लसाडिया उपखंड के दो प्रतिष्ठानों पर निरीक्षण किया। पहली कार्रवाई भेरूनाथ किराना एवं जनरल स्टोर में हुई, जहां बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड मसाले व अन्य सामग्री मिली। वहीं बस स्टैंड स्थित मेसर्स सत्यनारायण जनरल स्टोर से सूजी, मिर्च, हल्दी, देसी घी सहित कई ब्रांडेड खाद्य पदार्थ अवधि पार पाए गए। सभी सामग्री जब्त कर नष्ट की गई और सरसों तेल व जीरे के नमूने जांच के लिए भेजे गए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी खाद्य कारोबारियों से लाइसेंस प्रदर्शित रखने, साफ-सफाई और स्वास्थ्य प्रमाण पत्र सुनिश्चित करने की अपील की गई। जिले में यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।1
- डूंगरपुर। डूंगरपुर जिले के चौरासी थाना क्षेत्र के गैंजी गांव स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में बुधवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब निर्माणाधीन भवन की छत से बाहर निकले लोहे के सरियों पर एक युवक और एक युवती के शव लटके हुए पाए गए। सूचना मिलते ही गांव में लोगों की भीड़ एकत्र हो गई। प्रथम दृष्टया मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है। थानाधिकारी भंवर सिंह राठौड़ ने बताया कि सुबह टेलीफोन से सूचना मिली कि स्कूल की नई बन रही इमारत की छत पर सरियों से युवक-युवती के शव लटके हुए हैं। सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना किया। एफएसएल टीम को भी बुलाया गया, जिसने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए। पुलिस ने मृतक युवक की पहचान मनोज (22) पुत्र सुरेश खराड़ी निवासी पाकरोन के रूप में की है। उसके साथ मिली युवती की पहचान गीता (21) पुत्री बदा बारिया निवासी देवगांव, थाना धम्बोला क्षेत्र के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों के परिजनों को सूचना दे दी है। घटना की गंभीरता को देखते हुए सीमलवाड़ा पुलिस उप अधीक्षक मदनलाल विश्नोई भी मौके पर पहुंचे। मृतक युवक विवाहित था और उसकी एक बेटी भी है। एक फरवरी को वह घर में विवाद के बाद निकला था। उसकी पत्नी ने 17 फरवरी को चौरासी थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विद्यालय की प्रधानाचार्या जशोदा कलासुआ ने बताया कि स्कूल का समय सुबह 10 बजे का है तथा वर्तमान में परीक्षाएं चल रही हैं, हालांकि बुधवार को कोई परीक्षा निर्धारित नहीं थी। घटना की सूचना मिलते ही स्कूल प्रबंधन और ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। बुधवार दोपहर मृतक युवक का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया, जबकि युवती के शव का पोस्टमार्टम परिजनों की अनुपस्थिति के कारण नहीं हो सका। गुरुवार को पोस्टमार्टम होने की संभावना जताई गई है।1