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शाला प्रवेश उत्सव के दौरान एक बार फिर माहौल गरमा गया। इस कार्यक्रम में विधायक के गुस्से के कारण काफी हलचल मच गई, जिसका एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

17 hrs ago
user_Suraj Gupta
Suraj Gupta
सीतापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
17 hrs ago

शाला प्रवेश उत्सव के दौरान एक बार फिर माहौल गरमा गया। इस कार्यक्रम में विधायक के गुस्से के कारण काफी हलचल मच गई, जिसका एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

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  • छत्तीसगढ़ के शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में जनसुनवाई के दौरान विधायक रामकुमार टोप्पो ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है।
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    छत्तीसगढ़ के शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में जनसुनवाई के दौरान विधायक रामकुमार टोप्पो ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है।
    user_Suraj Gupta
    Suraj Gupta
    सीतापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    15 hrs ago
  • सरगुजा के मैनपाट में सीएमडीसी की प्रस्तावित बॉक्साइट खनन परियोजना को लेकर आयोजित जनसुनवाई में स्थानीय ग्रामीणों ने भारी विरोध दर्ज कराया। मैनपाट, कमलेश्वरपुर और रोपाखार क्षेत्र के लोगों ने परियोजना पर अपनी आपत्तियां उठाते हुए खनन के खिलाफ प्रशासनिक और सीएमडीसी अधिकारियों के सामने जमकर नारे लगाए। बुधवार को हुई इस जनसुनवाई के दौरान करीब 147 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित खनन के खिलाफ 7 लोगों ने लिखित और 53 लोगों ने मौखिक रूप से, कुल 60 लोगों ने आपत्तियां दर्ज कराईं। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि खनन से पर्यावरण, जलस्रोत, वन क्षेत्र और स्थानीय जनजीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने एक स्वर में कहा कि बॉक्साइट माइंस खुलने से उनकी जल, जंगल व जमीन को खतरा है और कंपनी सिर्फ बॉक्साइट खोदकर चली जाएगी, जिससे इलाके का विकास नहीं होगा। यह भी बताया गया कि मैनपाट के रोपाखार, कमलेश्वरपुर, सरभंजा व लुरैना पथरई में सीएमडीसी को बॉक्साइट खनन के लिए लीज पर भूमि मिली है और पूर्व में भी हुई जनसुनवाई का ग्रामीणों ने कड़ा विरोध करते हुए टेंट-पंडाल उखाड़ दिए थे। जनसुनवाई में मौजूद अपर कलेक्टर सुनील कुमार नायक ने बताया कि इस सुनवाई का उद्देश्य प्रस्तावित परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन करना है। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि प्राप्त सभी आपत्तियों और सुझावों का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा तथा नियमानुसार सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा। नायक ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल खनन शुरू होने का कोई निर्णय नहीं हुआ है। वहीं, सीएमडीसी के रायपुर से आए अधिकारी ने कहा कि परियोजना की पूरी जानकारी लोगों तक नहीं पहुंचने के कारण विरोध की स्थिति बनी है और वे लोगों को परियोजना से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी उपलब्ध कराएंगे।
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    सरगुजा के मैनपाट में सीएमडीसी की प्रस्तावित बॉक्साइट खनन परियोजना को लेकर आयोजित जनसुनवाई में स्थानीय ग्रामीणों ने भारी विरोध दर्ज कराया। मैनपाट, कमलेश्वरपुर और रोपाखार क्षेत्र के लोगों ने परियोजना पर अपनी आपत्तियां उठाते हुए खनन के खिलाफ प्रशासनिक और सीएमडीसी अधिकारियों के सामने जमकर नारे लगाए। बुधवार को हुई इस जनसुनवाई के दौरान करीब 147 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित खनन के खिलाफ 7 लोगों ने लिखित और 53 लोगों ने मौखिक रूप से, कुल 60 लोगों ने आपत्तियां दर्ज कराईं।

ग्रामीणों ने आशंका जताई कि खनन से पर्यावरण, जलस्रोत, वन क्षेत्र और स्थानीय जनजीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने एक स्वर में कहा कि बॉक्साइट माइंस खुलने से उनकी जल, जंगल व जमीन को खतरा है और कंपनी सिर्फ बॉक्साइट खोदकर चली जाएगी, जिससे इलाके का विकास नहीं होगा। यह भी बताया गया कि मैनपाट के रोपाखार, कमलेश्वरपुर, सरभंजा व लुरैना पथरई में सीएमडीसी को बॉक्साइट खनन के लिए लीज पर भूमि मिली है और पूर्व में भी हुई जनसुनवाई का ग्रामीणों ने कड़ा विरोध करते हुए टेंट-पंडाल उखाड़ दिए थे।

जनसुनवाई में मौजूद अपर कलेक्टर सुनील कुमार नायक ने बताया कि इस सुनवाई का उद्देश्य प्रस्तावित परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन करना है। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि प्राप्त सभी आपत्तियों और सुझावों का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा तथा नियमानुसार सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा। नायक ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल खनन शुरू होने का कोई निर्णय नहीं हुआ है। वहीं, सीएमडीसी के रायपुर से आए अधिकारी ने कहा कि परियोजना की पूरी जानकारी लोगों तक नहीं पहुंचने के कारण विरोध की स्थिति बनी है और वे लोगों को परियोजना से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी उपलब्ध कराएंगे।
    user_Jarif Khan
    Jarif Khan
    बतौली, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    14 hrs ago
  • एक ओर देश 'विकसित भारत' के निर्माण का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत पारेमेर का आश्रित ग्राम कौहाड़ाही आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। घने जंगलों और ऊँचे पहाड़ों के बीच बसा यह आदिवासी बहुल गाँव, जो विशेष पिछड़ी कोरवा जनजाति के परिवारों की आबादी वाला है, इसकी तस्वीर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक गहरी खाई को उजागर करती है। इस गाँव तक पहुँचने के लिए न तो पक्की सड़क है और न ही आवागमन के लिए कोई समुचित कच्चा मार्ग उपलब्ध है, जिससे बरसात के मौसम में हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। कई परिवार आज भी मिट्टी के कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं, जबकि बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी यहाँ पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति चिंतनीय है, क्योंकि गाँव में केवल एक प्राथमिक शाला संचालित है, जिसका संचालन भी आंगनबाड़ी भवन में किया जा रहा है, जो दूरस्थ क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की कमी को दर्शाता है। सरकारें आदिवासी क्षेत्रों के विकास और मूलभूत सुविधाओं जैसे सड़क, आवास, शिक्षा, पेयजल तथा विद्युत के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये की योजनाओं और बजट का दावा करती हैं। इसके बावजूद, कौहाड़ाही जैसे गाँवों की यह स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर ये विकास योजनाएँ धरातल तक क्यों नहीं पहुँच पा रही हैं और क्यों आदिवासी परिवार आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को विवश हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब केवल घोषणाओं का नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम दिखाने का समय है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि शासन-प्रशासन कौहाड़ाही जैसे उपेक्षित गाँवों की ओर गंभीरता से ध्यान देगा और उन्हें भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ठोस एवं समयबद्ध कदम उठाएगा, ताकि इस दूरस्थ आदिवासी अंचल में भी विकास के बड़े दावे पूरे हो सकें।
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    एक ओर देश 'विकसित भारत' के निर्माण का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत पारेमेर का आश्रित ग्राम कौहाड़ाही आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। घने जंगलों और ऊँचे पहाड़ों के बीच बसा यह आदिवासी बहुल गाँव, जो विशेष पिछड़ी कोरवा जनजाति के परिवारों की आबादी वाला है, इसकी तस्वीर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक गहरी खाई को उजागर करती है।

इस गाँव तक पहुँचने के लिए न तो पक्की सड़क है और न ही आवागमन के लिए कोई समुचित कच्चा मार्ग उपलब्ध है, जिससे बरसात के मौसम में हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। कई परिवार आज भी मिट्टी के कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं, जबकि बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी यहाँ पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति चिंतनीय है, क्योंकि गाँव में केवल एक प्राथमिक शाला संचालित है, जिसका संचालन भी आंगनबाड़ी भवन में किया जा रहा है, जो दूरस्थ क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की कमी को दर्शाता है।

सरकारें आदिवासी क्षेत्रों के विकास और मूलभूत सुविधाओं जैसे सड़क, आवास, शिक्षा, पेयजल तथा विद्युत के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये की योजनाओं और बजट का दावा करती हैं। इसके बावजूद, कौहाड़ाही जैसे गाँवों की यह स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर ये विकास योजनाएँ धरातल तक क्यों नहीं पहुँच पा रही हैं और क्यों आदिवासी परिवार आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को विवश हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब केवल घोषणाओं का नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम दिखाने का समय है।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि शासन-प्रशासन कौहाड़ाही जैसे उपेक्षित गाँवों की ओर गंभीरता से ध्यान देगा और उन्हें भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ठोस एवं समयबद्ध कदम उठाएगा, ताकि इस दूरस्थ आदिवासी अंचल में भी विकास के बड़े दावे पूरे हो सकें।
    user_ऋषभ तिवारी
    ऋषभ तिवारी
    पत्रकार Udaipur (Dharamjaigarh), Raigarh•
    17 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अंबिकापुर में आयोजित दो दिवसीय 'रामगढ़ महोत्सव' के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने रामगढ़ की ऐतिहासिक और पौराणिक भूमि को नमन करते हुए प्रदेश के विकास और संस्कृति संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने यह महत्वपूर्ण दावा भी किया कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब कोई मुख्यमंत्री इस पावन स्थल और रामगढ़ महोत्सव में पहुँचा है। अपने दौरे के दौरान, मुख्यमंत्री ने विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक 'सीता बेंगरा' और 'जोगीमारा' गुफाओं का भ्रमण किया और उनके पुरातात्विक महत्व को करीब से समझा। उन्होंने रामगढ़ के पौराणिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि त्रेतायुग में प्रभु श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने अपने वनवास काल का कुछ समय इस पावन भूमि पर व्यतीत किया था, जिसे उन्होंने अत्यंत सौभाग्य की बात कहा। मुख्यमंत्री साय ने समस्त क्षेत्रवासियों को रामगढ़ महोत्सव की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हुए क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का आह्वान भी किया। इस दौरान उन्होंने कहा, "रामगढ़ की यह धरती प्रभु श्री राम के चरणों से पवित्र हुई है। यहाँ की ऐतिहासिक गुफाओं और पौराणिक गाथाओं को विश्व पटल पर पहचान दिलाना हमारी प्राथमिकता है। इस महोत्सव में आना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्य का विषय है।" मुख्यमंत्री के इस दौरे को क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं को बढ़ावा देने और स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अंबिकापुर में आयोजित दो दिवसीय 'रामगढ़ महोत्सव' के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने रामगढ़ की ऐतिहासिक और पौराणिक भूमि को नमन करते हुए प्रदेश के विकास और संस्कृति संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने यह महत्वपूर्ण दावा भी किया कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब कोई मुख्यमंत्री इस पावन स्थल और रामगढ़ महोत्सव में पहुँचा है।

अपने दौरे के दौरान, मुख्यमंत्री ने विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक 'सीता बेंगरा' और 'जोगीमारा' गुफाओं का भ्रमण किया और उनके पुरातात्विक महत्व को करीब से समझा। उन्होंने रामगढ़ के पौराणिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि त्रेतायुग में प्रभु श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने अपने वनवास काल का कुछ समय इस पावन भूमि पर व्यतीत किया था, जिसे उन्होंने अत्यंत सौभाग्य की बात कहा। मुख्यमंत्री साय ने समस्त क्षेत्रवासियों को रामगढ़ महोत्सव की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हुए क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का आह्वान भी किया। इस दौरान उन्होंने कहा, "रामगढ़ की यह धरती प्रभु श्री राम के चरणों से पवित्र हुई है। यहाँ की ऐतिहासिक गुफाओं और पौराणिक गाथाओं को विश्व पटल पर पहचान दिलाना हमारी प्राथमिकता है। इस महोत्सव में आना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्य का विषय है।"

मुख्यमंत्री के इस दौरे को क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं को बढ़ावा देने और स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
    user_प्रदेश उजाला
    प्रदेश उजाला
    अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    13 hrs ago
  • ग्राम पंचायत नरधा में 24 जून को आयोजित ग्राम सभा की बैठक में आम जनता ने दारू भट्टी खोलने की मांग की है। इस बैठक के प्रस्ताव में शासन से दारू भट्टी की इस मांग को बाकायदा शामिल कर लिया गया है।
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    ग्राम पंचायत नरधा में 24 जून को आयोजित ग्राम सभा की बैठक में आम जनता ने दारू भट्टी खोलने की मांग की है। इस बैठक के प्रस्ताव में शासन से दारू भट्टी की इस मांग को बाकायदा शामिल कर लिया गया है।
    user_SURGUJA TIMES
    SURGUJA TIMES
    Digital News & Media Agency अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    21 hrs ago
  • झारखंड के गुमला जिले के कुरूमगढ़ डरकाना स्थित प्राथमिक विद्यालय का भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। बताया गया है कि बरसात के दिनों में स्कूल के कमरों के अंदर पानी भर जाता है, जिसके कारण बच्चों को पढ़ने-लिखने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
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    झारखंड के गुमला जिले के कुरूमगढ़ डरकाना स्थित प्राथमिक विद्यालय का भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। बताया गया है कि बरसात के दिनों में स्कूल के कमरों के अंदर पानी भर जाता है, जिसके कारण बच्चों को पढ़ने-लिखने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
    user_Pablic aap
    Pablic aap
    चैनपुर, गुमला, झारखंड•
    30 min ago
  • रतनपुर पुलिस ने एक त्वरित कार्रवाई करते हुए 70 लीटर कच्ची महुआ शराब जब्त की है। यह कार्रवाई पुलिस द्वारा लगातार जारी अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है।
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    रतनपुर पुलिस ने एक त्वरित कार्रवाई करते हुए 70 लीटर कच्ची महुआ शराब जब्त की है। यह कार्रवाई पुलिस द्वारा लगातार जारी अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है।
    user_Durgesh maravi
    Durgesh maravi
    Korba, Chhattisgarh•
    5 hrs ago
  • शाला प्रवेश उत्सव के दौरान एक बार फिर माहौल गरमा गया। इस कार्यक्रम में विधायक के गुस्से के कारण काफी हलचल मच गई, जिसका एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
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    शाला प्रवेश उत्सव के दौरान एक बार फिर माहौल गरमा गया। इस कार्यक्रम में विधायक के गुस्से के कारण काफी हलचल मच गई, जिसका एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
    user_Suraj Gupta
    Suraj Gupta
    सीतापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    17 hrs ago
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