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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश की शिक्षा व्यवस्था को फिर से संवारने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। सड़कों पर उतरकर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डटकर खड़े होने वाले देश भर के हर एक युवा और छात्र को इसके लिए बहुत-बहुत बधाई दी गई है। आंदोलन की दो प्रमुख मांगें अभी भी बाकी हैं। पहली मांग यह है कि प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य का सम्मान करते हुए उनसे माफ़ी मांगें, और दूसरी मांग यह है कि छात्रों पर हुई हिंसा के जिम्मेदार दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, किसानों, मजदूरों और गरीबों समेत समाज के उन सभी वर्गों को, जिन्हें इस सरकार द्वारा दबाया और कुचला गया है, अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने का संदेश दिया गया है।

4 hrs ago
user_SURENDRA KUMAR
SURENDRA KUMAR
चाणक्यपुरी, नई दिल्ली, दिल्ली•
4 hrs ago

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश की शिक्षा व्यवस्था को फिर से संवारने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। सड़कों पर उतरकर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डटकर खड़े होने वाले देश भर के हर एक युवा और छात्र को इसके लिए बहुत-बहुत बधाई दी गई है। आंदोलन की दो प्रमुख मांगें अभी भी बाकी हैं। पहली मांग यह है कि प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य का सम्मान करते हुए उनसे माफ़ी मांगें, और दूसरी मांग यह है कि छात्रों पर हुई हिंसा के जिम्मेदार दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, किसानों, मजदूरों और गरीबों समेत समाज के उन सभी वर्गों को, जिन्हें इस सरकार द्वारा दबाया और कुचला गया है, अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने का संदेश दिया गया है।

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  • धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश की शिक्षा व्यवस्था को फिर से संवारने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। सड़कों पर उतरकर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डटकर खड़े होने वाले देश भर के हर एक युवा और छात्र को इसके लिए बहुत-बहुत बधाई दी गई है। आंदोलन की दो प्रमुख मांगें अभी भी बाकी हैं। पहली मांग यह है कि प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य का सम्मान करते हुए उनसे माफ़ी मांगें, और दूसरी मांग यह है कि छात्रों पर हुई हिंसा के जिम्मेदार दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, किसानों, मजदूरों और गरीबों समेत समाज के उन सभी वर्गों को, जिन्हें इस सरकार द्वारा दबाया और कुचला गया है, अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने का संदेश दिया गया है।
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    धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश की शिक्षा व्यवस्था को फिर से संवारने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। सड़कों पर उतरकर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डटकर खड़े होने वाले देश भर के हर एक युवा और छात्र को इसके लिए बहुत-बहुत बधाई दी गई है।

आंदोलन की दो प्रमुख मांगें अभी भी बाकी हैं। पहली मांग यह है कि प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य का सम्मान करते हुए उनसे माफ़ी मांगें, और दूसरी मांग यह है कि छात्रों पर हुई हिंसा के जिम्मेदार दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, किसानों, मजदूरों और गरीबों समेत समाज के उन सभी वर्गों को, जिन्हें इस सरकार द्वारा दबाया और कुचला गया है, अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने का संदेश दिया गया है।
    user_SURENDRA KUMAR
    SURENDRA KUMAR
    चाणक्यपुरी, नई दिल्ली, दिल्ली•
    4 hrs ago
  • धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली में सुरक्षा कारणों से बंद किए गए मेट्रो स्टेशनों को फिर से खोल दिया गया है। राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार यात्रियों के लिए फिर से चालू कर दिए गए हैं। डीएमआरसी ने बताया कि स्थिति सामान्य होने के बाद मेट्रो सेवाएं पूरी तरह बहाल कर दी गई हैं। इस फैसले से कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में आने-जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिली है।
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    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली में सुरक्षा कारणों से बंद किए गए मेट्रो स्टेशनों को फिर से खोल दिया गया है। राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार यात्रियों के लिए फिर से चालू कर दिए गए हैं।

डीएमआरसी ने बताया कि स्थिति सामान्य होने के बाद मेट्रो सेवाएं पूरी तरह बहाल कर दी गई हैं। इस फैसले से कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में आने-जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिली है।
    user_Shivam k jha
    Shivam k jha
    करोल बाग, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    5 hrs ago
  • दिल्ली ब्यूरो रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों के आगे आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा है। इस बड़े घटनाक्रम के बीच शिक्षा मंत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
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    दिल्ली ब्यूरो रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों के आगे आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा है। इस बड़े घटनाक्रम के बीच शिक्षा मंत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
    user_द कहर न्यूज़ एजेंसी
    द कहर न्यूज़ एजेंसी
    Journalist Delhi Cantonment, New Delhi•
    8 hrs ago
  • सच्चे देशभक्तों से आज ही अपना आवेदन भेजकर बदलाव का हिस्सा बनने का आग्रह किया गया है। इस पहल के माध्यम से लोगों से बदलाव की प्रक्रिया से जुड़ने की अपील करते हुए जय हिंद का नारा दिया गया है।
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    सच्चे देशभक्तों से आज ही अपना आवेदन भेजकर बदलाव का हिस्सा बनने का आग्रह किया गया है। इस पहल के माध्यम से लोगों से बदलाव की प्रक्रिया से जुड़ने की अपील करते हुए जय हिंद का नारा दिया गया है।
    user_Bharatiya Jan KRANTI SENA
    Bharatiya Jan KRANTI SENA
    Political party office करोल बाग, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    9 hrs ago
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जंतर-मंतर पर पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों, युवाओं और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की लगातार मांग के बाद यह कदम सामने आया है। शुक्रवार को केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात में सीजेपी के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान पद नहीं छोड़ते, प्रदर्शन जारी रहेगा। शनिवार को इस्तीफा देते हुए प्रधान ने कहा कि उन्हें प्रजातंत्र पर पूरा भरोसा है। इस्तीफे की खबर के बाद जंतर-मंतर पर डटे CJP के नेताओं और समर्थकों ने इसे आंदोलन की बड़ी जीत बताते हुए जश्न मनाया। पार्टी के नेता अभिजीत दिपके ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि लगातार संघर्ष की वजह से सरकार को झुकना पड़ा है। दिपके ने कहा, 'हमने कर दिखाया। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। लोग कहते थे कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन हमने साबित कर दिया कि झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन का मकसद सिर्फ मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों को न्याय दिलाना है। अभिजीत दिपके ने पीड़ित छात्रों के लिए लड़ाई जारी रखने का वादा करते हुए कहा, 'पीड़ितों के लिए मैं लड़ूंगा, न्याय दिलाऊंगा।' आंदोलन के प्रतीक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं है।' इसके साथ ही उन्होंने सरकार के सामने मांग रखी कि कथित तौर पर परीक्षा विवाद के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा और उचित सहायता प्रदान की जाए।
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    केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जंतर-मंतर पर पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों, युवाओं और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की लगातार मांग के बाद यह कदम सामने आया है। शुक्रवार को केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात में सीजेपी के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान पद नहीं छोड़ते, प्रदर्शन जारी रहेगा। शनिवार को इस्तीफा देते हुए प्रधान ने कहा कि उन्हें प्रजातंत्र पर पूरा भरोसा है।

इस्तीफे की खबर के बाद जंतर-मंतर पर डटे CJP के नेताओं और समर्थकों ने इसे आंदोलन की बड़ी जीत बताते हुए जश्न मनाया। पार्टी के नेता अभिजीत दिपके ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि लगातार संघर्ष की वजह से सरकार को झुकना पड़ा है। दिपके ने कहा, 'हमने कर दिखाया। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। लोग कहते थे कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन हमने साबित कर दिया कि झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन का मकसद सिर्फ मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों को न्याय दिलाना है।

अभिजीत दिपके ने पीड़ित छात्रों के लिए लड़ाई जारी रखने का वादा करते हुए कहा, 'पीड़ितों के लिए मैं लड़ूंगा, न्याय दिलाऊंगा।' आंदोलन के प्रतीक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं है।' इसके साथ ही उन्होंने सरकार के सामने मांग रखी कि कथित तौर पर परीक्षा विवाद के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा और उचित सहायता प्रदान की जाए।
    user_Rekha Panchal
    Rekha Panchal
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    11 hrs ago
  • धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी बयानबाजी शुरू कर दी है। एक तरफ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ, तो वहीं दूसरी तरफ अखिलेश यादव का बयान भी तुरंत सामने आ गया। इस घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश में नई रणनीति की तैयारी और एक नई पारी का दौर शुरू होता दिख रहा है।
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    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी बयानबाजी शुरू कर दी है। एक तरफ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ, तो वहीं दूसरी तरफ अखिलेश यादव का बयान भी तुरंत सामने आ गया। इस घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश में नई रणनीति की तैयारी और एक नई पारी का दौर शुरू होता दिख रहा है।
    user_Vinod Rastogi
    Vinod Rastogi
    चाणक्यपुरी, नई दिल्ली, दिल्ली•
    4 hrs ago
  • देश में नेताओं की भूमिका और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इस बात को लेकर गहरा आक्रोश जताया जा रहा है कि क्या ऐसे नेता देश को अंदर से खोखला बनाने का काम कर रहे हैं। देश के राजनीतिक माहौल पर चिंता जताते हुए यह सवाल पूछा गया है कि क्या आज देश का यही कड़वा सच बनकर रह गया है।
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    देश में नेताओं की भूमिका और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इस बात को लेकर गहरा आक्रोश जताया जा रहा है कि क्या ऐसे नेता देश को अंदर से खोखला बनाने का काम कर रहे हैं। देश के राजनीतिक माहौल पर चिंता जताते हुए यह सवाल पूछा गया है कि क्या आज देश का यही कड़वा सच बनकर रह गया है।
    user_Shivam k jha
    Shivam k jha
    करोल बाग, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    5 hrs ago
  • जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने वाले जुनैद नामक व्यक्ति के प्रति एकजुटता और सुरक्षा की भावना व्यक्त की गई है। एक तस्वीर में हिंदी और उर्दू भाषा में लिखे संदेश के माध्यम से उनके प्रति अपना समर्थन और सुरक्षा का भाव जाहिर किया गया है।
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    जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने वाले जुनैद नामक व्यक्ति के प्रति एकजुटता और सुरक्षा की भावना व्यक्त की गई है। एक तस्वीर में हिंदी और उर्दू भाषा में लिखे संदेश के माध्यम से उनके प्रति अपना समर्थन और सुरक्षा का भाव जाहिर किया गया है।
    user_Reporter Shahnawaz
    Reporter Shahnawaz
    Local News Reporter Hauz Khas, South Delhi•
    7 hrs ago
  • दिल्ली के जामिया इलाके के पास पांच छात्रों को हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया है। हालांकि, बाद में जेबा खान और अफजल आलम नामक व्यक्तियों के हस्तक्षेप के बाद इन सभी छात्रों को रिहा कर दिया गया। इस घटना को लेकर हिरासत और नजरबंदी के आधारों पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं और लोकतंत्र में विरोध करने के अधिकार पर विशेष जोर दिया गया है।
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    दिल्ली के जामिया इलाके के पास पांच छात्रों को हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया है। हालांकि, बाद में जेबा खान और अफजल आलम नामक व्यक्तियों के हस्तक्षेप के बाद इन सभी छात्रों को रिहा कर दिया गया। इस घटना को लेकर हिरासत और नजरबंदी के आधारों पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं और लोकतंत्र में विरोध करने के अधिकार पर विशेष जोर दिया गया है।
    user_Reporter Shahnawaz
    Reporter Shahnawaz
    Local News Reporter Hauz Khas, South Delhi•
    4 hrs ago
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