उत्तराखंड के सुदूर क्षेत्र उत्तरकाशी के मोरी में आज भी देश की आजादी और राज्य गठन के दशकों बाद भी ग्रामीण एक अदद पुल के अभाव में अपनी जान हथेली पर रखकर उफनती नदी पार करने को मजबूर हैं। यह भयावह दृश्य कोई एडवेंचर टूरिज्म या फिल्म की शूटिंग नहीं है, बल्कि पर्वतीय विकास के दावों की पोल खोलती खौफनाक हकीकत है। बुनियादी सुरक्षा और रास्ते के बिना ग्रामीण यहाँ हर रोज अपनी जिंदगी जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं। यह स्थिति सीधे तौर पर व्यवस्था और लोकतंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है। लंबे समय से पुल निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन लगातार इसकी उपेक्षा हो रही है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि अगर इस प्रशासनिक लापरवाही के कारण यहाँ किसी मासूम बच्चे, बुजुर्ग या ग्रामीण की जान चली जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या वाकई जनता की बुनियादी सुरक्षा और जिंदगी की कीमत केवल चुनावी वादों और प्रशासनिक फाइलों तक ही सीमित है? अगर हमारी व्यवस्था अपने नागरिकों को एक सुरक्षित रास्ता तक नहीं दे सकती, तो हमें खुद को एक संवेदनशील समाज कहने का कोई हक नहीं है। उत्तराखंड सरकार और प्रशासन से सीधे सवाल किया गया है कि क्या शासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद केवल मुआवजे की औपचारिकता ही पूरी की जाए? सुदूर सीमांत क्षेत्रों की इस भौगोलिक विभीषिका को देखते हुए यहाँ युद्ध स्तर पर स्थाई पुल या फिर ट्रॉली और हैंगिंग ब्रिज जैसी तात्कालिक सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जा रही है? माननीय मुख्यमंत्री और संबंधित शासन-प्रशासन से करबद्ध प्रार्थना की गई है कि वे फाइलों के ढर्रे से बाहर निकलकर मोरी क्षेत्र की इस गंभीर समस्या का तुरंत संज्ञान लें और इसका स्थाई समाधान ढूंढें, इससे पहले कि यह उफनती नदी किसी के घर का चिराग बुझा दे। इस सुदूर पहाड़ की आवाज को शासन के कानों तक पहुँचाने की पुरजोर अपील की गई है।
उत्तराखंड के सुदूर क्षेत्र उत्तरकाशी के मोरी में आज भी देश की आजादी और राज्य गठन के दशकों बाद भी ग्रामीण एक अदद पुल के अभाव में अपनी जान हथेली पर रखकर उफनती नदी पार करने को मजबूर हैं। यह भयावह दृश्य कोई एडवेंचर टूरिज्म या फिल्म की शूटिंग नहीं है, बल्कि पर्वतीय विकास के दावों की पोल खोलती खौफनाक हकीकत है। बुनियादी सुरक्षा और रास्ते के बिना ग्रामीण यहाँ हर रोज अपनी जिंदगी जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं। यह स्थिति सीधे तौर पर व्यवस्था और लोकतंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है। लंबे समय से पुल निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन लगातार इसकी उपेक्षा हो रही है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि अगर इस प्रशासनिक लापरवाही के कारण यहाँ किसी मासूम बच्चे, बुजुर्ग या ग्रामीण की जान चली जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या वाकई जनता की बुनियादी सुरक्षा और जिंदगी की कीमत केवल चुनावी वादों और प्रशासनिक फाइलों तक ही सीमित है? अगर हमारी व्यवस्था अपने नागरिकों को एक सुरक्षित रास्ता तक नहीं दे सकती, तो हमें खुद को एक संवेदनशील समाज कहने का कोई हक नहीं है। उत्तराखंड सरकार और प्रशासन से सीधे सवाल किया गया है कि क्या शासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद केवल मुआवजे की औपचारिकता ही पूरी की जाए? सुदूर सीमांत क्षेत्रों की इस भौगोलिक विभीषिका को देखते हुए यहाँ युद्ध स्तर पर स्थाई पुल या फिर ट्रॉली और हैंगिंग ब्रिज जैसी तात्कालिक सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जा रही है? माननीय मुख्यमंत्री और संबंधित शासन-प्रशासन से करबद्ध प्रार्थना की गई है कि वे फाइलों के ढर्रे से बाहर निकलकर मोरी क्षेत्र की इस गंभीर समस्या का तुरंत संज्ञान लें और इसका स्थाई समाधान ढूंढें, इससे पहले कि यह उफनती नदी किसी के घर का चिराग बुझा दे। इस सुदूर पहाड़ की आवाज को शासन के कानों तक पहुँचाने की पुरजोर अपील की गई है।
- उत्तराखण्ड की संस्कृति, आस्था और विरासत को सशक्त करने की दिशा में राज्य सरकार की ओर से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसके तहत चलाई जा रही 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व विशेष ट्रेन यात्रा' के अंतर्गत सोमवार के दिन उत्तरकाशी से आए श्रद्धालुओं का जत्था सोमनाथ के लिए रवाना हुआ। यह विशेष यात्रा प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को और अधिक मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है।1
- अयोध्या के भव्य राम मंदिर के साथ-साथ उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में कथित अनियमितताओं और चोरी के मामलों को लेकर उत्तरकाशी में कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जिला कांग्रेस कमेटी उत्तरकाशी के जिलाध्यक्ष प्रदीप रावत के नेतृत्व में भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी स्थानीय हनुमान मंदिर प्रांगण में एकत्रित हुए और सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ कर एक अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जिलाध्यक्ष प्रदीप रावत ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि एक तरफ जहां राम मंदिर में चोरी और घपले की बातें सामने आ रही हैं, वहीं बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में भी लगातार चोरियां हो रही हैं। उन्होंने दावा किया कि इन मामलों और षड्यंत्रों में जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनके तार सीधे तौर पर भाजपा और उसके शीर्ष नेतृत्व से जुड़े हुए हैं। कांग्रेस का कहना है कि जो सरकार राम के नाम पर सत्ता में आई थी, वह राम मंदिर बनने के एक साल के भीतर ही वहां के सम्मान और संपत्तियों की रक्षा करने में नाकाम रही है, जिसे उन्होंने सनातन धर्म और करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर एक बड़ा कुठाराघात बताया। वर्तमान सरकार और कानूनी प्रणाली पर भरोसा उठने की बात कहते हुए कांग्रेस नेताओं ने किसी सरकारी अधिकारी के बजाय भगवान हनुमान के चरणों में एक मांग पत्र सौंपा। इस मांग पत्र के माध्यम से कांग्रेस ने मांग की है कि मंदिरों में चोरी और घपला करने वाले दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए और धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों का असली चेहरा जनता के सामने लाया जाए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस आस्था के खिलवाड़ के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक अपनी आवाज बुलंद करने का संकल्प लिया है।4
- उत्तराखंड के श्रीनगर से लोकप्रिय लोक गायक दीपक चमोली जी से जुड़ी जानकारी सामने आई है।1
- टिहरी गढ़वाल के कलक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में आयोजित पीसीपीएनडीटी जिला सलाहकार समिति की त्रैमासिक बैठक में कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने पीसीपीएनडीटी अधिनियम का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई करने की बात कही है। इसी क्रम में, उत्तराखंड अल्ट्रासाउंड, घनसाली के निरीक्षण में अनियमितताएं पाए जाने और संचालक रविंद्र बिष्ट के स्पष्टीकरण से असंतुष्ट होने पर जिलाधिकारी ने इस केंद्र का लाइसेंस निरस्त करने के निर्देश दिए हैं, जबकि स्मृति नर्सिंग होम, घनसाली का लाइसेंस पहले ही निरस्त किया जा चुका है। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्याम विजय ने जानकारी दी कि जनपद में वर्तमान में कुल आठ पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित हैं, जिनमें छह शासकीय और दो निजी केंद्र शामिल हैं। इन सभी मशीनों में एक्टिव ट्रैकर स्थापित कर नियमित निगरानी की जा रही है। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2026 से जून 2026 के मध्य जनपद में कुल 2,177 अल्ट्रासाउंड परीक्षण किए गए हैं। इसके अलावा, प्रतापनगर, थौलधार एवं भिलंगना विकासखंडों में अपेक्षाकृत कम लिंगानुपात पाए जाने पर जिलाधिकारी ने संबंधित चिकित्सा अधिकारियों को विशेष निगरानी और नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। बैठक के दौरान पीसीपीएनडीटी मुखबिर योजना की समीक्षा करते हुए जिला समन्वयक तनुजा रावत ने बताया कि अवैध गतिविधियों की सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और शासन द्वारा प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। इस बैठक में मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल, एसीएमओ डॉ. चंदन कुमार, डीजीसी स्वराज सिंह पंवार, समिति सदस्य सुशील कुमार बहुगुणा, मनोज नकोटी और जगदीश बडोनी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।1
- ईंधन की बढ़ती कीमतों, पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण (E20) नीति और महंगाई के विरोध में विभिन्न संगठनों ने 15 जुलाई 2026 को भारत बंद का आह्वान किया है। इस राष्ट्रव्यापी बंद के तहत किसान संगठनों, युवाओं और ट्रांसपोर्टरों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और चक्का जाम करने की अपील की है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि E20 नीति लागू होने से वाहनों के माइलेज में कमी आ रही है और उनके इंजन पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है, लेकिन सरकार इस दिशा में कोई राहत प्रदान नहीं कर रही है। इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का पूरा लाभ आम उपभोक्ताओं तक न पहुंचाए जाने को लेकर भी नाराजगी व्यक्त की जा रही है। दूसरी ओर, इन दावों पर सरकार का दृष्टिकोण बिल्कुल अलग है। सरकार की ओर से E20 नीति का बचाव करते हुए इसे देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आयातित तेल पर निर्भरता को कम करने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।1
- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के "ड्रग्स फ्री देवभूमि" के विजन को साकार करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) देहरादून के नेतृत्व में चलाए जा रहे "ऑपरेशन प्रहार" के तहत दून पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों से मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त तीन शातिर नशा तस्करों को गिरफ्तार किया है। इन अभियुक्तों के पास से बाजार में करीब ₹6 लाख मूल्य की 20.06 ग्राम अवैध स्मैक और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक ऑल्टो कार बरामद की गई है। पहली कार्रवाई विकासनगर कोतवाली पुलिस द्वारा 13 जुलाई 2026 को क्षेत्र में चेकिंग के दौरान की गई। पुलिस ने चाय बागान रोड उदियाबाग से ऑल्टो कार संख्या-यू0के0-07-बीटी-3409 में सवार अभियुक्त दिलशाद उर्फ शानू (उम्र 36 वर्ष, निवासी रामपुर कला, सहसपुर) को 7.69 ग्राम अवैध स्मैक के साथ गिरफ्तार किया। वहीं, त्यागी फार्म हाउस के पास से दूसरे अभियुक्त जावेद (उम्र 29 वर्ष, निवासी शंकरपुर रामपुर, सहसपुर) को 5.96 ग्राम अवैध स्मैक के साथ पकड़ा गया। इन दोनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, दोनों अभियुक्त पहले भी नशा तस्करी के मामले में जेल जा चुके हैं और दिलशाद के खिलाफ पहले से ही एनडीपीएस एक्ट के दो मुकदमे दर्ज हैं। दूसरी कार्रवाई डोईवाला कोतवाली पुलिस द्वारा तेलीवाला रोड पर की गई, जहां संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की चेकिंग के दौरान अभियुक्त फरीद (उम्र 24 वर्ष, निवासी नियामवाला, डोईवाला) को 6.41 ग्राम अवैध स्मैक के साथ गिरफ्तार किया गया। फरीद के खिलाफ कोतवाली डोईवाला में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी फरीद का भी पूर्व में आपराधिक इतिहास रहा है और वह पहले चोरी की वारदात में जेल जा चुका है।1
- देहरादून में प्लॉट उपलब्ध है। इस संबंध में किसी भी प्रकार की अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए दिए गए नंबर 8126111514 पर संपर्क किया जा सकता है।4
- उत्तराखंड के सुदूर क्षेत्र उत्तरकाशी के मोरी में आज भी देश की आजादी और राज्य गठन के दशकों बाद भी ग्रामीण एक अदद पुल के अभाव में अपनी जान हथेली पर रखकर उफनती नदी पार करने को मजबूर हैं। यह भयावह दृश्य कोई एडवेंचर टूरिज्म या फिल्म की शूटिंग नहीं है, बल्कि पर्वतीय विकास के दावों की पोल खोलती खौफनाक हकीकत है। बुनियादी सुरक्षा और रास्ते के बिना ग्रामीण यहाँ हर रोज अपनी जिंदगी जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं। यह स्थिति सीधे तौर पर व्यवस्था और लोकतंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है। लंबे समय से पुल निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन लगातार इसकी उपेक्षा हो रही है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि अगर इस प्रशासनिक लापरवाही के कारण यहाँ किसी मासूम बच्चे, बुजुर्ग या ग्रामीण की जान चली जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या वाकई जनता की बुनियादी सुरक्षा और जिंदगी की कीमत केवल चुनावी वादों और प्रशासनिक फाइलों तक ही सीमित है? अगर हमारी व्यवस्था अपने नागरिकों को एक सुरक्षित रास्ता तक नहीं दे सकती, तो हमें खुद को एक संवेदनशील समाज कहने का कोई हक नहीं है। उत्तराखंड सरकार और प्रशासन से सीधे सवाल किया गया है कि क्या शासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद केवल मुआवजे की औपचारिकता ही पूरी की जाए? सुदूर सीमांत क्षेत्रों की इस भौगोलिक विभीषिका को देखते हुए यहाँ युद्ध स्तर पर स्थाई पुल या फिर ट्रॉली और हैंगिंग ब्रिज जैसी तात्कालिक सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जा रही है? माननीय मुख्यमंत्री और संबंधित शासन-प्रशासन से करबद्ध प्रार्थना की गई है कि वे फाइलों के ढर्रे से बाहर निकलकर मोरी क्षेत्र की इस गंभीर समस्या का तुरंत संज्ञान लें और इसका स्थाई समाधान ढूंढें, इससे पहले कि यह उफनती नदी किसी के घर का चिराग बुझा दे। इस सुदूर पहाड़ की आवाज को शासन के कानों तक पहुँचाने की पुरजोर अपील की गई है।1