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टैक्सी ड्रायवर से मारपीट, आरोपी के खिलाफ कांकेर थाना में रिपोर्ट दर्ज
Ashish parihar Parihar
टैक्सी ड्रायवर से मारपीट, आरोपी के खिलाफ कांकेर थाना में रिपोर्ट दर्ज
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- टैक्सी ड्रायवर से मारपीट, आरोपी के खिलाफ कांकेर थाना में रिपोर्ट दर्ज1
- Post by सतभक्ति संदेश1
- बलरामपुर।आदिवासी विकास विभाग द्वारा मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना अंतर्गत संचालित प्रयास आवासीय विद्यालयों में सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9वीं में प्रवेश हेतु ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इच्छुक एवं पात्र विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। जारी सूचना के अनुसार ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 17 अप्रैल 2026 रात्रि 12 बजे तक निर्धारित की गई है। आवेदन पत्र में त्रुटि सुधार के लिए 18 अप्रैल से 21 अप्रैल 2026 तक तथा जिला स्तर पर दस्तावेजों का परीक्षण 22 अप्रैल से 28 अप्रैल 2026 तक किया जाएगा।विद्यार्थी 1 मई से 9 मई 2026 के बीच अपने प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकेंगे। प्रवेश हेतु परीक्षा का आयोजन 10 मई 2026 को किया जाएगा। बलरामपुर जिले के सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रयास आवासीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे मेडिकल, इंजीनियरिंग एवं अन्य परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है।ऑनलाइन आवेदन एवं विस्तृत जानकारी के लिए अभ्यर्थी विभागीय वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं। साथ ही कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, बलरामपुर से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।1
- नमस्कार जय जोहार जय छत्तीसगढ़ आप देख रहे हैं द छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में पुलिस और स्पेशल टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। 34 नग बिना तराशे हुए हीरे (रॉ डायमंड्स) के साथ एक अंतरराज्यीय तस्कर को गिरफ्तार किया गया है। इन हीरों की अनुमानित कीमत 63 लाख 50 हजार रुपये बताई जा रही है। आरोपी ग्राहक की तलाश में नहरगांव स्कूल के पास घूम रहा था, तभी पुलिस की नजर पड़ गई। घटना की विस्तृत जानकारी कुछ यूं है… गरियाबंद पुलिस और स्पेशल टीम की सतर्कता के कारण उड़ीसा के कालाहांडी जिले का निवासी बंशी शेट्टी (पिता डमरू शेट्टी, उम्र 50 वर्ष, निवासी भवानीपटम धोबीपारा, जिला कालाहांडी, उड़ीसा) को रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपी के पास से 34 नग बिना तराशे हुए हीरे बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार आरोपी नहरगांव स्कूल के पास ग्राहक ढूंढने के लिए घूम रहा था। टीम ने उसकी तलाशी ली तो भारी मात्रा में हीरे मिले। इन अनकट हीरों की बाजार मूल्य लगभग 63 लाख 50 हजार रुपये आंकी जा रही है। वर्तमान में आरोपी के खिलाफ माइनिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कार्यवाही शुरू कर दी गई है। पुलिस आगे की जांच में यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये हीरे कहां से आए हैं, इनका असली स्रोत क्या है और क्या कोई बड़ा गिरोह इस तस्करी में शामिल है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ पुलिस की सतर्कता और अवैध खनन-तस्करी पर सख्त रुख को दर्शाती है। ऐसे तस्करों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की लूट रोकी जा सके। द छत्तीसगढ़ हमेशा की तरह राज्य की महत्वपूर्ण खबरें आपके तक बिना किसी संशोधन के पहुंचाता रहेगा। दर्शकों, अगर आपके इलाके में कोई अवैध खनन, हीरे-मणियों की तस्करी या संदिग्ध गतिविधि नजर आए तो तुरंत गरियाबंद पुलिस या नजदीकी थाने में सूचना दें। आपकी एक सतर्कता राज्य की संपत्ति बचाने में मदद कर सकती है। हेल्पलाइन नंबर 112 पर भी कॉल करें। अधिक अपडेट्स के लिए द छत्तीसगढ़ चैनल को अभी सब्सक्राइब करें, लाइक और शेयर जरूर करें। नमस्कार… जय छत्तीसगढ़!1
- नारायणपुर जिले के लिए एक बड़ी राहत और सकारात्मक खबर सामने आई है। अब नारायणपुर को ‘अति संवेदनशील (Most Sensitive)’ श्रेणी से हटा दिया गया है। सुरक्षा व्यवस्था में सुधार, लगातार विकास कार्य, सड़क, मोबाइल टावर, कैंप और प्रशासनिक सक्रियता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इस फैसले से जिले में विकास कार्यों को और गति मिलेगी, सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होगा और नारायणपुर की छवि में भी सकारात्मक बदलाव आएगा। नारायणपुर के लिए यह एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम माना जा रहा है।1
- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना अंतर्गत हितग्राहियों को राशि अंतरित की _कोंडागांव जिले के 7673 हितग्राहियों को मिला योजना का लाभ कोंडागांव :- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बुधवार को बलौदाबाजार में आयोजित कार्यक्रम में दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत 4.95 लाख से अधिक पात्र परिवारों के लिए राज्य सरकार की ओर से 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये की राशि का अंतरण किया। इन हितग्राहियों में कोण्डागांव जिले के 7673 हितग्राही भी शामिल है, जिनके खाते में 07 करोड़ 67 लाख 30 हजार रूपए की अंतरित हुई। मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से जिले के हितग्राही कन्हैयालाल कौशिक से सीधा संवाद किया और योजना की राशि के उपयोग के बारे में जानकारी ली। इस अवसर पर जिला कार्यालय के सभाकक्ष में बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष सुश्री लता उसेण्डी के मुख्य आतिथ्य में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें हितग्राहियों को प्रमाण पत्र दी गई। इस दौरान कलेक्टर श्रीमती नुपूर राशि पन्ना, नगर पालिका अध्यक्ष नरपति पटेल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक सुश्री लता उसेण्डी ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना शासन की महात्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज हितग्राहियों के खाते में राशि अंतरित की है। ऐसे भूमिहीन जो मजदूरी या अन्य कार्यों से जीवनयापन कर रहे हैं, उन्हें इस राशि से काफी राहत मिलेगी और आर्थिक मजबूती आएगी। उन्होंने कहा कि परिवार जब आर्थिक रूप से मजबूत होता है तभी हम बच्चों की शिक्षा, पालन पोषण और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति बेहतर ढंग से कर पाते हैं। उन्होंने सभी लाभान्वित हितग्राहियों को शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष नरपति पटेल, उपाध्यक्ष जसकेतु उसेण्डी, जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष टोमेन्द्र ठाकुर एवं जिला पंचायत सदस्य नन्दलाल राठौर ने भी संबोधित करते हुए इस योजना को भूमिहीन कृषि श्रमिकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में इसे शासन की महत्वपूर्ण पहल बताया। कार्यक्रम में जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष टोमेन्द्र ठाकुर, जिला पंचायत सदस्य नन्दलाल राठौर, श्रीमती यशोदा कश्यप और श्रीमती रामदई नाग, पार्षद सुश्री सोनामणि पोयाम, प्रेम नाग सहित अपर कलेक्टर चित्रकांत चाली ठाकुर, एसडीएम अजय उरांव, संयुक्त कलेक्टर वहीदुर्रहमान सहित राजस्व विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को आर्थिक रूप से संबल बनाने के लिए शुरू की गई एक प्रमुख योजना है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के भूमिहीन कृषि श्रमिकों को सशक्त बनाना है। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा के अनुरूप भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हज़ार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को आर्थिक सुरक्षा का सशक्त संबल मिलेगा। सशक्त श्रमिकों के माध्यम से सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य सुनिश्चित करना छत्तीसगढ़ सरकार का संकल्प है।4
- *बुनागाँव की छात्रा जानवी कौशिक का जवाहर नवोदय विद्यालय के लिए चयन* कोंडागांव - प्रतिभा और कड़े संघर्ष के संगम से सफलता की नई इबारत लिखी जाती है।कुछ ऐसा ही कर दिखाया है कोंडागांव जिला अंतर्गत ग्राम बुनागाँव की होनहार छात्रा जानवी कौशिक ने।जनपद प्राथमिक शाला बुनागाँव की कक्षा पांचवी की छात्रा जानवी का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय कोंडागांव के लिए हुआ है। *सफलता की परंपरा बना बुनागाँव स्कूल* यह उपलब्धि न केवल जानवी के परिवार के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।इस सफलता के पीछे शिक्षक सूरज नेताम और मोनिका साहू का विशेष योगदान है जिनके मार्गदर्शन में छात्र 4-5 माह तक कड़ी मेहनत और विशेष अध्ययन करते हैं।गौरतलब हो कि शाला में प्रतिवर्ष स्कूल सहित अवकाश के दिनों में शिक्षकों के द्वारा कोचिंग सह मार्गदर्शन दिए जा रहे हैं,फलस्वरूप हर वर्ष बच्चे प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण कर उच्च शैक्षणिक संस्थानों चयनित हो रहे हैं।उनके मार्गदर्शन में अभी तक 45 से अधिक बच्चे नवोदय स्कूल, एकलव्य,आदर्श,बुनियादी विद्यालय,प्रयास सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण कर निःशुल्क उच्च आवासीय शैक्षणिक संस्थानों में चयनित होकर अपना भविष्य गढ़ रहे हैं।1
- डोंगरगढ़ की माँ बम्लेश्वरी: 2200 साल पुरानी आस्था की अमर गाथा, जहां प्रेम, भक्ति और चमत्कार एक साथ बुनते हैं देवी का दरबार! छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में पहाड़ी पर विराजमान यह शक्तिपीठ लाखों भक्तों की मनोकामना पूरी करता है – जानिए पूरी कथा, राजाओं की भक्ति से लेकर प्रेमियों के पुनर्जीवन तक नमस्कार दोस्तों, आप देख रहे हैं द छत्तीसगढ़ चैनल। मैं हूं आपके साथ योगेश कुमार साहू। आज हम लेकर आए हैं छत्तीसगढ़ की सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ बम्लेश्वरी मंदिर, डोंगरगढ़ की पूरी कहानी। यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि 2200 वर्ष पुरानी भक्ति, राजसी इतिहास और एक अनोखी प्रेम कथा का जीवंत साक्षी है। चैत्र नवरात्र 2026 में यहां लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं – 1000 सीढ़ियां चढ़कर, रोपवे से या पैदल – सब माँ के दर्शन के लिए। 7 दिनों में 10 लाख से ज्यादा भक्त आ चुके हैं, और मंदिर 8 हजार से ज्यादा ज्योति कलशों से जगमगा रहा है। प्रसाद योजना के तहत नए पर्यटक सुविधा केंद्र भी बन चुके हैं। लेकिन असली महिमा तो माँ की चमत्कारी कहानी में है। चलिए, विस्तार से जानते हैं। 1600 फीट ऊंची पहाड़ी पर बड़ी बम्लेश्वरी, नीचे छोटी बम्लेश्वरी और मंझली रणचंडी – तीनों स्वरूपों में माँ बगलामुखी (दुर्गा का रूप) जागृत हैं। प्राचीन नाम था कामाख्या नगरी या कामावती नगर। यहां की यात्रा हर भक्त को माँ के चरणों में ले जाती है। 2200 वर्ष पुरानी शुरुआत: राजा वीरसेन की संतानहीन पीड़ा और मंदिर की नींव करीब 2200 साल पहले, कामाख्या नगरी में राजा वीरसेन का शासन था। वे प्रजापालक थे, लेकिन संतान नहीं थी। पंडितों की सलाह पर उन्होंने शिवजी और माँ दुर्गा की एक साल तक कठोर तपस्या की। देवी-देवता प्रसन्न हुए, रानी को पुत्र रत्न प्राप्त हुआ – नाम रखा मदनसेन। आभार में राजा ने पहाड़ी पर माँ बम्लेश्वरी (दुर्गा का शक्तिरूप) का मंदिर बनवाया। यहीं से शुरू हुई इस धाम की यात्रा। मदनसेन के बाद उनके पुत्र राजा कामसेन गद्दी पर आए। वे भी माँ बगलामुखी के परम भक्त थे। राजा कामसेन की तपस्या और माँ का पहाड़ी पर अवतरण कामसेन ने तपोबल से माँ बगलामुखी को इतना प्रसन्न किया कि विनती की – “माँ, पहाड़ी की चोटी पर विराजमान हो जाओ, ताकि प्रजा आसानी से दर्शन कर सके।” माँ प्रसन्न हुईं और बड़ी बम्लेश्वरी स्वरूप में प्रकट हो गईं। लेकिन जंगल और दुर्गम रास्ते से भक्तों को कष्ट होता देख राजा ने फिर प्रार्थना की – “माँ, नीचे भी विराजमान हो जाओ।” माँ ने उनकी भक्ति और प्रजा-कल्याण की भावना देखी, और पहाड़ से उतरकर छोटी बम्लेश्वरी व मंझली रणचंडी के रूप में जागृत हो गईं। आज भी तीनों माताएं भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं। अब आती है वो सबसे भावुक प्रेम कथा – माधवानल और कामकंदला की जुदाई और माँ का चमत्कार यह कथा मंदिर की सबसे प्रसिद्ध है। कामाख्या नगरी संगीत-नृत्य की नगरी थी। राजा कामसेन के दरबार में गायक माधवानल और नृतकी कामकंदला आए। दोनों पहली नजर में प्रेम में पड़ गए। एक बार नृत्य में ताल बिगड़ने पर माधवानल ने कारण बताया। राजा प्रसन्न होकर मोतियों की माला दी, लेकिन माधवानल ने उसे कामकंदला को सौंप दिया। राजा क्रोधित हुए और माधवानल को निकाल दिया। राजकुमार मदनादित्य भी कामकंदला पर मोहित था। उसने राजद्रोह का आरोप लगाकर कामकंदला को बंदी बना लिया। माधवानल मदद के लिए उज्जैन पहुंचे – राजा विक्रमादित्य के पास। विक्रमादित्य ने युद्ध किया, शिव-दुर्गा के हस्तक्षेप से संधि हुई। लेकिन विक्रमादित्य ने परीक्षा ली – झूठ बोला कि माधवानल मर गया। दुख से कामकंदला ने तालाब में कूदकर प्राण त्याग दिए। माधवानल को पता चला तो उसने भी जीवन समाप्त कर दिया। यहां हुआ चमत्कार! विक्रमादित्य ने माँ बगलामुखी को आह्वान किया। माँ प्रकट हुईं, दोनों प्रेमियों को जीवित किया और कहा – “सच्चा प्रेम कभी नहीं मरता। मैं यहां जागृत रूप में रहूंगी, सच्चे प्रेमियों और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करूंगी।” यही कारण है कि माँ बम्लेश्वरी को “प्रेमियों की देवी” भी कहा जाता है। यह कथा ‘माधवानल कामकंदला’ ग्रंथ में विस्तार से है। मंदिर का वर्णन और वर्तमान महिमा बड़ी बम्लेश्वरी 1600 फीट ऊंची पहाड़ी पर है – 1000+ सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मंदिर भव्य, माँ की मूर्ति चमकदार। नीचे छोटी बम्लेश्वरी अक्षरधाम शैली में – 8 द्वार, 44 स्तंभ, 95 फीट ऊंचा। गर्भगृह सोने-चांदी से सजा। चारों ओर हरा-भरा जंगल, तालाब – प्रकृति का अद्भुत संगम। ट्रस्ट (1976 से) संचालित। रोपवे, धर्मशालाएं, भोजनालय सब उपलब्ध। नवरात्र में नारियल चढ़ाव, ज्योति कलश – मंदिर जगमगाता है। भक्त कहते हैं – “सच्चे दिल से मांगी मनोकामना पूरी होती है।” संतान, विवाह, नौकरी, स्वास्थ्य – सब मिलता है। कैसे पहुंचें? • रेल: डोंगरगढ़ जंक्शन (मुंबई-हावड़ा रूट) • सड़क: राजनांदगांव से 35 किमी, रायपुर से 106 किमी (NH-6) • हवाई: रायपुर एयरपोर्ट (72 किमी) दोस्तों, डोंगरगढ़ की माँ बम्लेश्वरी सिर्फ धाम नहीं, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर हैं। यहां राजा वीरसेन की भक्ति, कामसेन की तपस्या और माधवानल-कामकंदला का प्रेम एक साथ सांस लेता है। जो एक बार आता है, बार-बार लौटना चाहता है। अगर आप भी माँ के दरबार में जाना चाहते हैं, तो बस मन में संकल्प लीजिए – माँ जरूर बुलाएंगी। जय माँ बम्लेश्वरी! जय छत्तीसगढ़! धन्यवाद देखने के लिए। अगर आपको यह वीडियो पसंद आया तो लाइक, शेयर और सब्सक्राइब जरूर करें। बेल आइकन दबाकर नोटिफिकेशन ऑन रखें, ताकि छत्तीसगढ़ की हर खबर और कहानी सबसे पहले आप तक पहुंचे। नमस्कार, जय जोहार!1