पांढुर्णा के वार्ड क्रमांक 8 में नगरपालिका द्वारा एक कुएं की सफाई का कार्य शुरू तो किया गया था, लेकिन बीच में ही रुक गया है। इस अधूरी कार्रवाई से स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी और चिंता व्याप्त है। निवासियों का कहना है कि गर्मी का मौसम बीत जाने के बाद बारिश शुरू होते ही जल्दबाजी में यह सफाई अभियान शुरू किया गया था। हालांकि, अब पिछले तीन-चार दिनों से कुएं पर न तो कोई सफाई कार्य होता दिख रहा है और न ही कोई कर्मचारी या सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, कुआं खुला होने के बावजूद उसके आसपास पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए हैं। रात के समय न तो बैरिकेडिंग दिखाई देती है और न ही कोई निगरानी व्यवस्था मौजूद है, जिससे अंधेरे में पैदल राहगीरों, दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का गंभीर खतरा बना हुआ है। रहवासियों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते उचित सुरक्षा प्रबंध नहीं किए गए तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। नागरिकों ने नगरपालिका प्रशासन से मांग की है कि कुएं की सफाई का कार्य शीघ्र पूरा कराया जाए। साथ ही, तब तक स्थल पर मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
पांढुर्णा के वार्ड क्रमांक 8 में नगरपालिका द्वारा एक कुएं की सफाई का कार्य शुरू तो किया गया था, लेकिन बीच में ही रुक गया है। इस अधूरी कार्रवाई से स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी और चिंता व्याप्त है। निवासियों का कहना है कि गर्मी का मौसम बीत जाने के बाद बारिश शुरू होते ही जल्दबाजी में यह सफाई अभियान शुरू किया गया था। हालांकि, अब पिछले तीन-चार दिनों से कुएं पर न तो कोई सफाई कार्य होता दिख रहा है और न ही कोई कर्मचारी या सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, कुआं खुला होने के बावजूद उसके आसपास पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए हैं। रात के समय न तो बैरिकेडिंग दिखाई देती है और न ही कोई निगरानी व्यवस्था मौजूद है, जिससे अंधेरे में पैदल राहगीरों, दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का गंभीर खतरा बना हुआ है। रहवासियों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते उचित सुरक्षा प्रबंध नहीं किए गए तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। नागरिकों ने नगरपालिका प्रशासन से मांग की है कि कुएं की सफाई का कार्य शीघ्र पूरा कराया जाए। साथ ही, तब तक स्थल पर मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
- पांढुर्णा के तीन शेर चौक स्थित बीएसएनएल टावर पर सोमवार दोपहर से चढ़ा एक रहस्यमयी व्यक्ति बुधवार को आखिरकार रेस्क्यू टीम द्वारा सुरक्षित नीचे उतार लिया गया है। तीन दिनों तक प्रशासन की सांसें अटकाए रखने वाले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे का इसी के साथ समापन हो गया। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय पुलिस के साथ भोपाल फायर रेस्क्यू और नागपुर फायर सेफ्टी की विशेषज्ञ टीमों ने संयुक्त मोर्चा संभाला था। विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीकी उपकरणों का उपयोग करते हुए कई घंटों की योजनाबद्ध कार्रवाई के बाद युवक को सकुशल नीचे उतारा। रेस्क्यू के दौरान युवक का व्यवहार सबसे हैरान करने वाला रहा, क्योंकि ऊंचाई पर बैठकर वह बार-बार प्रशासन से खाने में मच्छी-भात उपलब्ध कराने की मांग कर रहा था। उसकी इस अजीबोगरीब शर्त ने पुलिस और रेस्क्यू दल के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी थीं। इस पूरे घटनाक्रम ने बीएसएनएल की लचर सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुरक्षाकर्मियों की लापरवाही के कारण ही एक अज्ञात व्यक्ति इतनी आसानी से 230 फीट ऊंचे टावर पर चढ़ गया। जनता ने अब मांग उठाई है कि कंपनी की सुरक्षा में चूक करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल, युवक को सुरक्षित नीचे उतारने के बाद चिकित्सकीय परीक्षण के लिए भेजा गया है। पुलिस अब उसकी पहचान जुटाने और टावर पर चढ़ने के पीछे के कारणों का पता लगाने में लगी है।1
- छिंदवाड़ा जिले के पांढुर्णा में एक अज्ञात व्यक्ति को आज बीएसएनएल टावर से नीचे उतारा गया। यह व्यक्ति बीते तीन दिनों से टावर पर चढ़ा हुआ था। इंडिया NDRF की टीम और पुलिस प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से उसे टावर के ऊपर से सुरक्षित नीचे उतारा जा सका।1
- पांढुर्णा में एक चिंताजनक घटना सामने आई है, जहाँ पिछले तीन दिनों से एक अज्ञात युवक बीएसएनएल टावर पर चढ़ा हुआ है। प्रशासन इतने लंबे समय के बाद भी उसे नीचे उतारने में पूरी तरह से असमर्थ रहा है, जिससे उसकी बेबसी साफ झलक रही है। लगभग 50 वर्ष का यह अज्ञात व्यक्ति बिना कुछ खाए-पिए लगातार टावर पर ही अपनी जान जोखिम में डालकर बैठा है। इस पूरे मामले में पांढुर्णा का प्रशासन नतमस्तक दिखाई दे रहा है और तीन दिन बीत जाने के बावजूद भी व्यक्ति को सुरक्षित नीचे नहीं उतारा जा सका है।1
- मुलताई के ग्राम खंभरा में पिछले तीन वर्षों से ग्रामीण जलभराव की गंभीर समस्या से परेशान थे, जिसका कोई समाधान नहीं मिल पा रहा था। सड़क पर पानी जमा होने और उसके निकास के लिए कोई रास्ता न होने के कारण, विशेषकर बरसात के मौसम में, बच्चों, महिलाओं और स्कूल जाने वाले छात्रों सहित सभी ग्रामवासियों को बदबूदार पानी से गुजरने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इस समस्या को और बढ़ा रहा था गांव के ही एक व्यक्ति द्वारा बार-बार नाली को बंद करने का काम। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को समस्या बताने के बावजूद भी इसका निराकरण नहीं हो पाया था। यह मामला जैसे ही समाज सेवी जनार्दन जे.डी. पाटिल जी के संज्ञान में आया, उन्होंने तुरंत इस पर पहल की। उन्होंने तहसीलदार महोदय और एस.डी.एम. महोदय मुलताई को इस समस्या से अवगत कराया, जिसके बाद कार्रवाई शुरू हुई। इस पहल के परिणामस्वरूप, आज सरपंच, पंच और ग्रामीणों के सहयोग से वर्षों पुरानी इस समस्या का समाधान कर लिया गया। ग्राम खंभरा के सरपंच ने बताया कि जल्द ही स्थायी नाली बनाकर पानी के निकास की व्यवस्था हमेशा के लिए सुनिश्चित कर दी जाएगी। तीन सालों की लंबी परेशानी के बाद समस्या का समाधान होने से ग्रामीणों में बहुत हर्ष और खुशी की लहर है, सभी ग्रामवासी जनार्दन जे.डी. पाटिल जी के हस्तक्षेप से मिले इस समाधान से अत्यंत प्रसन्न हैं।1
- मुलताई नगर के भगत सिंह वार्ड में नगर पालिका द्वारा कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी नाराजगी है। वार्डवासियों का आरोप है कि इस निर्माण कार्य में गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा जा रहा, जिससे भविष्य में कई समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। एक प्रमुख समस्या यह है कि पेयजल आपूर्ति पाइपलाइन का वाल्व नाली के अंदर स्थित है, जहाँ अक्सर पानी भरा रहता है। इस स्थिति के कारण वाल्व के संचालन, मरम्मत या उसे बदलने में वार्डवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या के बारे में नगर पालिका अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार को कई बार जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। इसके अतिरिक्त, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि नाली निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री में केवल रेत, गिट्टी और सीमेंट का उपयोग हो रहा है, जबकि सरिया (स्टील रॉड) का उपयोग नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में ठेकेदार से बात करने पर वार्डवासियों को कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इन आरोपों के चलते वार्ड में निर्माण कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका से पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनकी माँग है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, पेयजल पाइपलाइन के वाल्व को नाली के बाहर एक सुरक्षित स्थान पर स्थापित कर वार्डवासियों की इस समस्या का शीघ्र समाधान किया जाए।1
- आमला विकासखंड की ग्राम पंचायत इटावा के मुख्य बस स्टैंड पर सुलभ शौचालय और यात्री प्रतीक्षालय जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण प्रतिदिन हजारों यात्रियों, महिलाओं, बुजुर्गों, व्यापारियों और स्थानीय लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि शासन-प्रशासन ने अब तक इस गंभीर समस्या पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया है। इटावा का मुख्य बस स्टैंड मुलताई मार्ग पर एक प्रमुख आवागमन केंद्र है, जहाँ सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक यात्रियों की अच्छी-खासी भीड़ रहती है। इसके बावजूद, सार्वजनिक सुलभ शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है और न ही यात्रियों के लिए बैठने का कोई प्रतीक्षालय उपलब्ध है। स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों के अनुसार, शौचालय न होने से सबसे ज़्यादा परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को उठानी पड़ती है। वहीं, प्रतीक्षालय के अभाव में यात्रियों को कड़ी धूप, बारिश और अन्य खराब मौसम की स्थितियों में खुले में ही बसों का इंतजार करना पड़ता है। इससे दुकानदारों और आम नागरिकों को भी दैनिक रूप से परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों और व्यापारियों ने ग्राम पंचायत तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से तत्काल इटावा मुख्य बस स्टैंड पर सुलभ शौचालय और यात्री प्रतीक्षालय के निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसा करने से यात्रियों को आवश्यक सुविधाएँ मिल सकेंगी और उनकी लंबे समय से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान हो पाएगा।4
- पांढुर्णा में भाजपा जिलाध्यक्ष संदीप मोहोड ने नागपुर–छिंदवाड़ा मार्ग पर सौंसर के पास सड़क पर गिरे एक बाइक चालक को देखकर तत्काल अपना वाहन रोका। उन्होंने तुरंत अपने साथ मौजूद सहयोगियों को घायल की सहायता करने के निर्देश दिए और उसकी मदद के लिए सक्रिय हो गए। घटना के बाद, संदीप मोहोड ने घायल बाइक चालक को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की और आवश्यक सहयोग सुनिश्चित किया। उनकी इस तत्परता के कारण घायल को समय पर प्राथमिक सहायता मिल सकी। इस दौरान, उन्होंने जोर देकर कहा कि संकट की घड़ी में मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और सड़क दुर्घटनाओं में समय पर मिली सहायता किसी भी घायल के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती है, इसलिए प्रत्येक नागरिक को जरूरतमंद की मदद के लिए आगे आना चाहिए। इस पूरी घटना के दौरान स्थानीय लोगों ने भी घायल की सहायता में सहयोग किया।2