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*ठेका किसी और का, पैरोकार कोई और!* *मानपुर में शराब का कथित ‘होम डिलीवरी नेटवर्क’, दुकान से बोरी में निकलती खेप और गांवों तक पहुंच रही शराब!* *ओवररेटिंग से ओवरटाइमिंग तक के आरोप, दोनों दुकानों की निगरानी पर उठे सवाल* *31 जुलाई की सुबह बाइक पर बोरी में शराब ले जाने का दावा, पूछने पर जेपी राय का माल बताए जाने की चर्चा* (आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी–उमरिया) मानपुर। शराब का ठेका किसी और के नाम, लेकिन दुकान से शराब निकलकर गांव-गांव तक पहुंचाने वाले कथित पैरोकारों के नाम अलग! मानपुर में शराब के कारोबार को लेकर सामने आ रहे आरोपों ने एक बार फिर आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मानपुर में संचालित दुकान क्रमांक-1, बस स्टैंड के आगे ताला रोड तथा दुकान क्रमांक-2, बिजौरी तिराहा को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार शिकायतें सामने आने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि इन दुकानों से शराब को दुकान परिसर से बाहर निकालकर मानपुर के गली-मोहल्लों से लेकर आसपास के दर्जनों गांवों तक पहुंचाया जा रहा है। सुबह का ‘खेल’ कैमरे में कैद होने का दावा शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 की सुबह का बताया जा रहा एक दृश्य इस कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आरोप है कि बिना नंबर की हीरो मोटरसाइकिल से एक बोरी में देशी और विदेशी मदिरा भरकर गांव की ओर ले जाई जा रही थी। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं है। उनके मुताबिक, सुबह दुकान खुलने के बाद से लेकर देर शाम और अंधेरा होने के बाद तक शराब की खेप इधर-उधर ले जाने का सिलसिला देखा जाता है। जब कथित रूप से शराब की खेप ले जा रहे लोगों से पूछताछ की गई तो जेपी राय नामक व्यक्ति का माल होने की बात कहे जाने का दावा किया गया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित व्यक्ति का पक्ष सामने आना भी बाकी है। दुकान में बिक्री या गांव-गांव ‘सप्लाई सेंटर’? सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि शराब केवल निर्धारित दुकान से बिक्री के लिए है तो दुकान से बोरी भरकर शराब बाहर कैसे निकल रही है? यदि यह शराब वैध रूप से ले जाई जा रही है तो उसके दस्तावेज, परिवहन की अनुमति और गंतव्य क्या है? और यदि यह दुकान से बाहर अवैध रूप से पहुंचाई जा रही है तो आबकारी विभाग की निगरानी आखिर कहां है? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है। *ओवररेटिंग और ओवरटाइमिंग के आरोपों से भी घिरी दुकानें* मानपुर की शराब दुकानों को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा केवल गांवों तक शराब पहुंचाने के ही आरोप नहीं लगाए जा रहे, बल्कि ओवररेटिंग और निर्धारित समय के बाद शराब बिक्री जैसे आरोप भी लंबे समय से चर्चा में हैं। स्थानीय स्तर पर इस कथित नेटवर्क से जुड़े होने के आरोपों में सत्यम तिवारी, सुरेंद्र गुप्ता सहित अन्य नाम भी सामने आने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन व्यक्तियों की किसी अवैध गतिविधि में संलिप्तता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और उनका पक्ष भी अपेक्षित है। क्या यह केवल कर्मचारियों का खेल है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि दुकान से बाहर शराब पहुंचाने का सिलसिला नियमित है तो अकेले किसी कर्मचारी या छोटे विक्रेता के स्तर पर इतने बड़े क्षेत्र में शराब की आपूर्ति संभव होने पर भी सवाल उठता है। *सीएम हेल्पलाइन तक शिकायतें, फिर भी नहीं थमा कथित कारोबार!* स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, मानपुर में शराब के कथित अनियमित कारोबार को लेकर मौखिक, लिखित और सीएम हेल्पलाइन तक शिकायतें की जा चुकी हैं। इसके बावजूद यदि वही गतिविधियां लगातार दिखाई दे रही हैं तो शिकायतों के निराकरण की वास्तविकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों ने आबकारी वृत्त प्रभारी पर शिकायतों को कथित रूप से ‘मैनेज’ किए जाने के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, यह आरोप जांच का विषय है और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। *आबकारी की कार्रवाई पर भी सवाल* *छोटी मछलियों पर दबिश, मगर बड़े कथित नेटवर्क पर क्यों खामोशी?* ग्रामीणों का आरोप है कि आबकारी अमला कभी-कभार मानपुर क्षेत्र में गश्त करता है और महुआ से कच्ची शराब बनाने वाले छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेता है। लेकिन सवाल यह है कि— जब दुकान से कथित रूप से शराब निकलकर गांवों तक पहुंच रही है, तो इसकी जांच क्यों नहीं होती? क्या दुकानों के स्टॉक और बिक्री रिकॉर्ड का नियमित मिलान किया जाता है? क्या सीसीटीवी फुटेज की जांच होती है? क्या दुकान से बाहर ले जाई जा रही शराब की निगरानी की जाती है? यदि इन सभी व्यवस्थाओं के बावजूद शराब गांवों तक पहुंच रही है तो फिर निगरानी तंत्र में कहीं न कहीं बड़ी खामी जरूर है। *कलेक्टर से सीधी मांग* *मानपुर की दोनों शराब दुकानों की हो औचक जांच* स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मानपुर की दोनों शराब दुकानों की औचक एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में— ● स्टॉक एवं बिक्री रजिस्टर की जांच ● सीसीटीवी फुटेज की जांच ● दुकान से बाहर शराब ले जाने की घटनाओं की पड़ताल ● ओवररेटिंग की जांच ● निर्धारित समय के बाद बिक्री की जांच ● गांवों तक शराब पहुंचाने वाले कथित नेटवर्क की जांच ● पूर्व शिकायतों के निराकरण की समीक्षा कराई जाए। नशे की आसान उपलब्धता से गांवों का माहौल प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि यदि शराब वास्तव में दुकान की सीमा से बाहर निकलकर गांव-गांव तक पहुंच रही है तो इसका सबसे ज्यादा असर युवा वर्ग और ग्रामीण परिवारों पर पड़ रहा है। शराब की आसान उपलब्धता से घरेलू विवाद, सड़क दुर्घटनाओं और अपराधों की आशंका बढ़ने की बात भी स्थानीय लोग कह रहे हैं। मानपुर जैसे शांत क्षेत्र में शराब की कथित अवैध सप्लाई का नेटवर्क यदि वास्तव में सक्रिय है तो यह सिर्फ आबकारी नियमों का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक चिंता का भी विषय है। अब प्रशासन की अग्निपरीक्षा! आरोप सही हैं तो कार्रवाई कब? आरोप गलत हैं तो जांच कर सच सामने क्यों नहीं लाया जाता? मानपुर के लोगों की निगाह अब जिला प्रशासन पर है। सवाल सीधा है— दुकान से बाहर निकलती शराब की कथित खेप आखिर किसके इशारे पर जा रही है? गांवों तक शराब पहुंचाने वाला नेटवर्क किसके संरक्षण में चल रहा है? बार-बार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती? और यदि शिकायतें गलत हैं तो प्रशासन निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सार्वजनिक क्यों नहीं करता? मानपुर के नागरिक अब दावे नहीं, कार्रवाई चाहते हैं। जिला प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच कराए जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मानपुर में शराब का कारोबार नियमों के अनुसार चल रहा है या फिर दुकान की आड़ में कोई बड़ा कथित नेटवर्क सक्रिय है। अब देखना यह है कि आबकारी विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में केवल कागजी कार्रवाई करता है या वास्तव में मानपुर की शराब दुकानों की जमीनी हकीकत की जांच कर कथित नेटवर्क पर शिकंजा कसता है।

6 hrs ago
user_Neeraj Singh Raghuvanshi
Neeraj Singh Raghuvanshi
बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
6 hrs ago
f3a7eb60-7dc8-4c77-8dd1-d82c71c04fcb

*ठेका किसी और का, पैरोकार कोई और!* *मानपुर में शराब का कथित ‘होम डिलीवरी नेटवर्क’, दुकान से बोरी में निकलती खेप और गांवों तक पहुंच रही शराब!* *ओवररेटिंग से ओवरटाइमिंग तक के आरोप, दोनों दुकानों की निगरानी पर उठे सवाल* *31 जुलाई की सुबह बाइक पर बोरी में शराब ले जाने का दावा, पूछने पर जेपी राय का माल बताए जाने की चर्चा* (आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी–उमरिया) मानपुर। शराब का ठेका किसी और के नाम, लेकिन दुकान से शराब निकलकर गांव-गांव तक पहुंचाने वाले कथित पैरोकारों के नाम अलग! मानपुर में शराब के कारोबार को लेकर सामने आ रहे आरोपों ने एक बार फिर आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मानपुर में संचालित दुकान क्रमांक-1, बस स्टैंड के आगे ताला रोड तथा दुकान क्रमांक-2, बिजौरी तिराहा को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार शिकायतें सामने आने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि इन दुकानों से शराब को दुकान परिसर से बाहर निकालकर मानपुर के गली-मोहल्लों से लेकर आसपास के दर्जनों गांवों तक पहुंचाया जा रहा है। सुबह का ‘खेल’ कैमरे में कैद होने का दावा शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 की सुबह का बताया जा रहा एक दृश्य इस कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आरोप है कि बिना नंबर की हीरो मोटरसाइकिल से एक बोरी में देशी और विदेशी मदिरा भरकर गांव की ओर ले जाई जा रही थी। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं है। उनके मुताबिक, सुबह दुकान खुलने के बाद से लेकर देर शाम और अंधेरा होने के बाद तक शराब की खेप इधर-उधर ले जाने का सिलसिला देखा जाता है। जब कथित रूप से शराब की खेप ले जा रहे लोगों से पूछताछ की गई तो जेपी राय नामक व्यक्ति का माल होने की बात कहे जाने का दावा किया गया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित व्यक्ति का पक्ष सामने आना भी बाकी है। दुकान में बिक्री या गांव-गांव ‘सप्लाई सेंटर’? सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि शराब केवल निर्धारित दुकान से बिक्री के लिए है तो दुकान से बोरी भरकर शराब बाहर कैसे निकल रही है? यदि यह शराब वैध रूप से ले जाई जा रही है तो उसके दस्तावेज, परिवहन की अनुमति और गंतव्य क्या है? और यदि यह दुकान से बाहर अवैध रूप से पहुंचाई जा रही है तो आबकारी विभाग की निगरानी आखिर कहां है? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है। *ओवररेटिंग और ओवरटाइमिंग के आरोपों से भी घिरी दुकानें* मानपुर की शराब दुकानों को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा केवल गांवों तक शराब पहुंचाने के ही आरोप नहीं लगाए जा रहे, बल्कि ओवररेटिंग और निर्धारित समय के बाद शराब बिक्री जैसे आरोप भी लंबे समय से चर्चा में हैं। स्थानीय स्तर पर इस कथित नेटवर्क से जुड़े होने के आरोपों में सत्यम तिवारी, सुरेंद्र गुप्ता सहित अन्य नाम भी सामने आने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन व्यक्तियों की किसी अवैध गतिविधि में संलिप्तता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और उनका पक्ष भी अपेक्षित है। क्या यह केवल कर्मचारियों का खेल है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि दुकान से बाहर शराब पहुंचाने का सिलसिला नियमित है तो अकेले किसी कर्मचारी या छोटे विक्रेता के स्तर पर इतने बड़े क्षेत्र में शराब की आपूर्ति संभव होने पर भी सवाल उठता है। *सीएम हेल्पलाइन तक शिकायतें, फिर भी नहीं थमा कथित कारोबार!* स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, मानपुर में शराब के कथित अनियमित कारोबार को लेकर मौखिक, लिखित और सीएम हेल्पलाइन तक शिकायतें की जा चुकी हैं। इसके बावजूद यदि वही गतिविधियां लगातार दिखाई दे रही हैं तो शिकायतों के निराकरण की वास्तविकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों ने आबकारी वृत्त प्रभारी पर शिकायतों को कथित रूप से ‘मैनेज’ किए जाने के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, यह आरोप जांच का विषय है और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। *आबकारी की कार्रवाई पर भी सवाल* *छोटी मछलियों पर दबिश, मगर बड़े कथित नेटवर्क पर क्यों खामोशी?* ग्रामीणों का आरोप है कि आबकारी अमला कभी-कभार मानपुर क्षेत्र में गश्त करता है और महुआ से कच्ची शराब बनाने वाले छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेता है। लेकिन सवाल यह है कि— जब दुकान से कथित रूप से शराब निकलकर गांवों तक पहुंच रही है, तो इसकी जांच क्यों नहीं होती? क्या दुकानों के स्टॉक और बिक्री रिकॉर्ड का नियमित मिलान किया जाता है? क्या सीसीटीवी फुटेज की जांच होती है? क्या दुकान से बाहर ले जाई जा रही शराब की निगरानी की जाती है? यदि इन सभी व्यवस्थाओं के बावजूद शराब गांवों तक पहुंच रही है तो फिर निगरानी तंत्र में कहीं न कहीं बड़ी खामी जरूर है। *कलेक्टर से सीधी मांग* *मानपुर की दोनों शराब दुकानों की हो औचक जांच* स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मानपुर की दोनों शराब दुकानों की औचक एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में— ● स्टॉक एवं बिक्री रजिस्टर की जांच ● सीसीटीवी फुटेज की जांच ● दुकान से बाहर शराब ले जाने की घटनाओं की पड़ताल ● ओवररेटिंग की जांच ● निर्धारित समय के बाद बिक्री की जांच ● गांवों तक शराब पहुंचाने वाले कथित नेटवर्क की जांच ● पूर्व शिकायतों के निराकरण की समीक्षा कराई जाए। नशे की आसान उपलब्धता से गांवों का माहौल प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि यदि शराब वास्तव में दुकान की सीमा से बाहर निकलकर गांव-गांव तक पहुंच रही है तो इसका सबसे ज्यादा असर युवा वर्ग और ग्रामीण परिवारों पर पड़ रहा है। शराब की आसान उपलब्धता से घरेलू विवाद, सड़क दुर्घटनाओं और अपराधों की आशंका बढ़ने की बात भी स्थानीय लोग कह रहे हैं। मानपुर जैसे शांत क्षेत्र में शराब की कथित अवैध सप्लाई का नेटवर्क यदि वास्तव में सक्रिय है तो यह सिर्फ आबकारी नियमों का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक चिंता का भी विषय है। अब प्रशासन की अग्निपरीक्षा! आरोप सही हैं तो कार्रवाई कब? आरोप गलत हैं तो जांच कर सच सामने क्यों नहीं लाया जाता? मानपुर के लोगों की निगाह अब जिला प्रशासन पर है। सवाल सीधा है— दुकान से बाहर निकलती शराब की कथित खेप आखिर किसके इशारे पर जा रही है? गांवों तक शराब पहुंचाने वाला नेटवर्क किसके संरक्षण में चल रहा है? बार-बार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती? और यदि शिकायतें गलत हैं तो प्रशासन निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सार्वजनिक क्यों नहीं करता? मानपुर के नागरिक अब दावे नहीं, कार्रवाई चाहते हैं। जिला प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच कराए जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मानपुर में शराब का कारोबार नियमों के अनुसार चल रहा है या फिर दुकान की आड़ में कोई बड़ा कथित नेटवर्क सक्रिय है। अब देखना यह है कि आबकारी विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में केवल कागजी कार्रवाई करता है या वास्तव में मानपुर की शराब दुकानों की जमीनी हकीकत की जांच कर कथित नेटवर्क पर शिकंजा कसता है।

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  • पर्यावरण सुकृति हेतु लोक सुनवाई का आयोजन मेसर्स जे.के. सीमेंट लिमिटेड को आवंटित पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु लोग लोक सुनवाई का आयोजन मेंसरस जे. के. सीमेंट लिमिटेड को आवंटित ग्राम अमिलिया बीमा डोंगरी महरोई बंधवाबारा कननावहरा देवगांव चंदनिया खुर्द बंधवा खुर्द एवं बरगवां तहसील पाली जिला उमरिया मध्य प्रदेश 1481.19 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित भूमिगत कोयला खदान वेस्ट आफ शहडोल साउथ कोल माइंस उत्पादन क्षमता 0.70 मिलियन टन प्रति वर्ष का टारगेट रखा गया।
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    पर्यावरण सुकृति हेतु लोक सुनवाई का आयोजन 
मेसर्स जे.के. सीमेंट लिमिटेड को आवंटित
पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु लोग लोक सुनवाई का आयोजन मेंसरस  जे. के. सीमेंट लिमिटेड को आवंटित ग्राम अमिलिया बीमा डोंगरी महरोई बंधवाबारा कननावहरा देवगांव चंदनिया खुर्द बंधवा खुर्द एवं बरगवां तहसील पाली जिला उमरिया मध्य प्रदेश 1481.19 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित भूमिगत कोयला खदान वेस्ट आफ शहडोल साउथ कोल माइंस उत्पादन क्षमता 0.70 मिलियन टन प्रति वर्ष का टारगेट रखा गया।
    user_Om Agrawal
    Om Agrawal
    पाली, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • मानपुर में शराब का कथित ‘होम डिलीवरी नेटवर्क’, दुकान से बोरी में निकलती खेप और गांवों तक पहुंच रही शराब!* *ठेका किसी और का, पैरोकार कोई और!* *मानपुर में शराब का कथित ‘होम डिलीवरी नेटवर्क’, दुकान से बोरी में निकलती खेप और गांवों तक पहुंच रही शराब!* *ओवररेटिंग से ओवरटाइमिंग तक के आरोप, दोनों दुकानों की निगरानी पर उठे सवाल* *31 जुलाई की सुबह बाइक पर बोरी में शराब ले जाने का दावा, पूछने पर जेपी राय का माल बताए जाने की चर्चा* (आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी–उमरिया) मानपुर। शराब का ठेका किसी और के नाम, लेकिन दुकान से शराब निकलकर गांव-गांव तक पहुंचाने वाले कथित पैरोकारों के नाम अलग! मानपुर में शराब के कारोबार को लेकर सामने आ रहे आरोपों ने एक बार फिर आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मानपुर में संचालित दुकान क्रमांक-1, बस स्टैंड के आगे ताला रोड तथा दुकान क्रमांक-2, बिजौरी तिराहा को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार शिकायतें सामने आने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि इन दुकानों से शराब को दुकान परिसर से बाहर निकालकर मानपुर के गली-मोहल्लों से लेकर आसपास के दर्जनों गांवों तक पहुंचाया जा रहा है। सुबह का ‘खेल’ कैमरे में कैद होने का दावा शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 की सुबह का बताया जा रहा एक दृश्य इस कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आरोप है कि बिना नंबर की हीरो मोटरसाइकिल से एक बोरी में देशी और विदेशी मदिरा भरकर गांव की ओर ले जाई जा रही थी। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं है। उनके मुताबिक, सुबह दुकान खुलने के बाद से लेकर देर शाम और अंधेरा होने के बाद तक शराब की खेप इधर-उधर ले जाने का सिलसिला देखा जाता है। जब कथित रूप से शराब की खेप ले जा रहे लोगों से पूछताछ की गई तो जेपी राय नामक व्यक्ति का माल होने की बात कहे जाने का दावा किया गया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित व्यक्ति का पक्ष सामने आना भी बाकी है। दुकान में बिक्री या गांव-गांव ‘सप्लाई सेंटर’? सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि शराब केवल निर्धारित दुकान से बिक्री के लिए है तो दुकान से बोरी भरकर शराब बाहर कैसे निकल रही है? यदि यह शराब वैध रूप से ले जाई जा रही है तो उसके दस्तावेज, परिवहन की अनुमति और गंतव्य क्या है? और यदि यह दुकान से बाहर अवैध रूप से पहुंचाई जा रही है तो आबकारी विभाग की निगरानी आखिर कहां है? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है। *ओवररेटिंग और ओवरटाइमिंग के आरोपों से भी घिरी दुकानें* मानपुर की शराब दुकानों को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा केवल गांवों तक शराब पहुंचाने के ही आरोप नहीं लगाए जा रहे, बल्कि ओवररेटिंग और निर्धारित समय के बाद शराब बिक्री जैसे आरोप भी लंबे समय से चर्चा में हैं। स्थानीय स्तर पर इस कथित नेटवर्क से जुड़े होने के आरोपों में सत्यम तिवारी, सुरेंद्र गुप्ता सहित अन्य नाम भी सामने आने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन व्यक्तियों की किसी अवैध गतिविधि में संलिप्तता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और उनका पक्ष भी अपेक्षित है। क्या यह केवल कर्मचारियों का खेल है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि दुकान से बाहर शराब पहुंचाने का सिलसिला नियमित है तो अकेले किसी कर्मचारी या छोटे विक्रेता के स्तर पर इतने बड़े क्षेत्र में शराब की आपूर्ति संभव होने पर भी सवाल उठता है। *सीएम हेल्पलाइन तक शिकायतें, फिर भी नहीं थमा कथित कारोबार!* स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, मानपुर में शराब के कथित अनियमित कारोबार को लेकर मौखिक, लिखित और सीएम हेल्पलाइन तक शिकायतें की जा चुकी हैं। इसके बावजूद यदि वही गतिविधियां लगातार दिखाई दे रही हैं तो शिकायतों के निराकरण की वास्तविकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों ने आबकारी वृत्त प्रभारी पर शिकायतों को कथित रूप से ‘मैनेज’ किए जाने के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, यह आरोप जांच का विषय है और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। *आबकारी की कार्रवाई पर भी सवाल* *छोटी मछलियों पर दबिश, मगर बड़े कथित नेटवर्क पर क्यों खामोशी?* ग्रामीणों का आरोप है कि आबकारी अमला कभी-कभार मानपुर क्षेत्र में गश्त करता है और महुआ से कच्ची शराब बनाने वाले छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेता है। लेकिन सवाल यह है कि— जब दुकान से कथित रूप से शराब निकलकर गांवों तक पहुंच रही है, तो इसकी जांच क्यों नहीं होती? क्या दुकानों के स्टॉक और बिक्री रिकॉर्ड का नियमित मिलान किया जाता है? क्या सीसीटीवी फुटेज की जांच होती है? क्या दुकान से बाहर ले जाई जा रही शराब की निगरानी की जाती है? यदि इन सभी व्यवस्थाओं के बावजूद शराब गांवों तक पहुंच रही है तो फिर निगरानी तंत्र में कहीं न कहीं बड़ी खामी जरूर है। बॉक्स | कलेक्टर से सीधी मांग मानपुर की दोनों शराब दुकानों की हो औचक जांच स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मानपुर की दोनों शराब दुकानों की औचक एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में— ● स्टॉक एवं बिक्री रजिस्टर की जांच ● सीसीटीवी फुटेज की जांच ● दुकान से बाहर शराब ले जाने की घटनाओं की पड़ताल ● ओवररेटिंग की जांच ● निर्धारित समय के बाद बिक्री की जांच ● गांवों तक शराब पहुंचाने वाले कथित नेटवर्क की जांच ● पूर्व शिकायतों के निराकरण की समीक्षा कराई जाए। नशे की आसान उपलब्धता से गांवों का माहौल प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि यदि शराब वास्तव में दुकान की सीमा से बाहर निकलकर गांव-गांव तक पहुंच रही है तो इसका सबसे ज्यादा असर युवा वर्ग और ग्रामीण परिवारों पर पड़ रहा है। शराब की आसान उपलब्धता से घरेलू विवाद, सड़क दुर्घटनाओं और अपराधों की आशंका बढ़ने की बात भी स्थानीय लोग कह रहे हैं। मानपुर जैसे शांत क्षेत्र में शराब की कथित अवैध सप्लाई का नेटवर्क यदि वास्तव में सक्रिय है तो यह सिर्फ आबकारी नियमों का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक चिंता का भी विषय है। अब प्रशासन की अग्निपरीक्षा! आरोप सही हैं तो कार्रवाई कब? आरोप गलत हैं तो जांच कर सच सामने क्यों नहीं लाया जाता? मानपुर के लोगों की निगाह अब जिला प्रशासन पर है। सवाल सीधा है— दुकान से बाहर निकलती शराब की कथित खेप आखिर किसके इशारे पर जा रही है? गांवों तक शराब पहुंचाने वाला नेटवर्क किसके संरक्षण में चल रहा है? बार-बार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती? और यदि शिकायतें गलत हैं तो प्रशासन निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सार्वजनिक क्यों नहीं करता? मानपुर के नागरिक अब दावे नहीं, कार्रवाई चाहते हैं। जिला प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच कराए जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मानपुर में शराब का कारोबार नियमों के अनुसार चल रहा है या फिर दुकान की आड़ में कोई बड़ा कथित नेटवर्क सक्रिय है। अब देखना यह है कि आबकारी विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में केवल कागजी कार्रवाई करता है या वास्तव में मानपुर की शराब दुकानों की जमीनी हकीकत की जांच कर कथित नेटवर्क पर शिकंजा कसता है।
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    मानपुर में शराब का कथित ‘होम डिलीवरी नेटवर्क’, दुकान से बोरी में निकलती खेप और गांवों तक पहुंच रही शराब!*

*ठेका किसी और का, पैरोकार कोई और!*
*मानपुर में शराब का कथित ‘होम डिलीवरी नेटवर्क’, दुकान से बोरी में निकलती खेप और गांवों तक पहुंच रही शराब!*
*ओवररेटिंग से ओवरटाइमिंग तक के आरोप, दोनों दुकानों की निगरानी पर उठे सवाल*
*31 जुलाई की सुबह बाइक पर बोरी में शराब ले जाने का दावा, पूछने पर जेपी राय का माल बताए जाने की चर्चा*
(आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी–उमरिया)
मानपुर। शराब का ठेका किसी और के नाम, लेकिन दुकान से शराब निकलकर गांव-गांव तक पहुंचाने वाले कथित पैरोकारों के नाम अलग! मानपुर में शराब के कारोबार को लेकर सामने आ रहे आरोपों ने एक बार फिर आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
मानपुर में संचालित दुकान क्रमांक-1, बस स्टैंड के आगे ताला रोड तथा दुकान क्रमांक-2, बिजौरी तिराहा को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार शिकायतें सामने आने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि इन दुकानों से शराब को दुकान परिसर से बाहर निकालकर मानपुर के गली-मोहल्लों से लेकर आसपास के दर्जनों गांवों तक पहुंचाया जा रहा है।
सुबह का ‘खेल’ कैमरे में कैद होने का दावा
शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 की सुबह का बताया जा रहा एक दृश्य इस कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आरोप है कि बिना नंबर की हीरो मोटरसाइकिल से एक बोरी में देशी और विदेशी मदिरा भरकर गांव की ओर ले जाई जा रही थी।
स्थानीय लोगों का दावा है कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं है। उनके मुताबिक, सुबह दुकान खुलने के बाद से लेकर देर शाम और अंधेरा होने के बाद तक शराब की खेप इधर-उधर ले जाने का सिलसिला देखा जाता है।
जब कथित रूप से शराब की खेप ले जा रहे लोगों से पूछताछ की गई तो जेपी राय नामक व्यक्ति का माल होने की बात कहे जाने का दावा किया गया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित व्यक्ति का पक्ष सामने आना भी बाकी है।
दुकान में बिक्री या गांव-गांव ‘सप्लाई सेंटर’?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि शराब केवल निर्धारित दुकान से बिक्री के लिए है तो दुकान से बोरी भरकर शराब बाहर कैसे निकल रही है?
यदि यह शराब वैध रूप से ले जाई जा रही है तो उसके दस्तावेज, परिवहन की अनुमति और गंतव्य क्या है?
और यदि यह दुकान से बाहर अवैध रूप से पहुंचाई जा रही है तो आबकारी विभाग की निगरानी आखिर कहां है?
इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।
*ओवररेटिंग और ओवरटाइमिंग के आरोपों से भी घिरी दुकानें*
मानपुर की शराब दुकानों को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा केवल गांवों तक शराब पहुंचाने के ही आरोप नहीं लगाए जा रहे, बल्कि ओवररेटिंग और निर्धारित समय के बाद शराब बिक्री जैसे आरोप भी लंबे समय से चर्चा में हैं।
स्थानीय स्तर पर इस कथित नेटवर्क से जुड़े होने के आरोपों में सत्यम तिवारी, सुरेंद्र गुप्ता सहित अन्य नाम भी सामने आने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन व्यक्तियों की किसी अवैध गतिविधि में संलिप्तता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और उनका पक्ष भी अपेक्षित है।
क्या यह केवल कर्मचारियों का खेल है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क?
यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि दुकान से बाहर शराब पहुंचाने का सिलसिला नियमित है तो अकेले किसी कर्मचारी या छोटे विक्रेता के स्तर पर इतने बड़े क्षेत्र में शराब की आपूर्ति संभव होने पर भी सवाल उठता है।
*सीएम हेल्पलाइन तक शिकायतें, फिर भी नहीं थमा कथित कारोबार!*
स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, मानपुर में शराब के कथित अनियमित कारोबार को लेकर मौखिक, लिखित और सीएम हेल्पलाइन तक शिकायतें की जा चुकी हैं।
इसके बावजूद यदि वही गतिविधियां लगातार दिखाई दे रही हैं तो शिकायतों के निराकरण की वास्तविकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों ने आबकारी वृत्त प्रभारी पर शिकायतों को कथित रूप से ‘मैनेज’ किए जाने के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, यह आरोप जांच का विषय है और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
*आबकारी की कार्रवाई पर भी सवाल*
*छोटी मछलियों पर दबिश, मगर बड़े कथित नेटवर्क पर क्यों खामोशी?*
ग्रामीणों का आरोप है कि आबकारी अमला कभी-कभार मानपुर क्षेत्र में गश्त करता है और महुआ से कच्ची शराब बनाने वाले छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेता है।
लेकिन सवाल यह है कि—
जब दुकान से कथित रूप से शराब निकलकर गांवों तक पहुंच रही है, तो इसकी जांच क्यों नहीं होती?
क्या दुकानों के स्टॉक और बिक्री रिकॉर्ड का नियमित मिलान किया जाता है?
क्या सीसीटीवी फुटेज की जांच होती है?
क्या दुकान से बाहर ले जाई जा रही शराब की निगरानी की जाती है?
यदि इन सभी व्यवस्थाओं के बावजूद शराब गांवों तक पहुंच रही है तो फिर निगरानी तंत्र में कहीं न कहीं बड़ी खामी जरूर है।
बॉक्स | कलेक्टर से सीधी मांग
मानपुर की दोनों शराब दुकानों की हो औचक जांच
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मानपुर की दोनों शराब दुकानों की औचक एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
जांच में—
● स्टॉक एवं बिक्री रजिस्टर की जांच
● सीसीटीवी फुटेज की जांच
● दुकान से बाहर शराब ले जाने की घटनाओं की पड़ताल
● ओवररेटिंग की जांच
● निर्धारित समय के बाद बिक्री की जांच
● गांवों तक शराब पहुंचाने वाले कथित नेटवर्क की जांच
● पूर्व शिकायतों के निराकरण की समीक्षा
कराई जाए।
नशे की आसान उपलब्धता से गांवों का माहौल प्रभावित
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शराब वास्तव में दुकान की सीमा से बाहर निकलकर गांव-गांव तक पहुंच रही है तो इसका सबसे ज्यादा असर युवा वर्ग और ग्रामीण परिवारों पर पड़ रहा है।
शराब की आसान उपलब्धता से घरेलू विवाद, सड़क दुर्घटनाओं और अपराधों की आशंका बढ़ने की बात भी स्थानीय लोग कह रहे हैं।
मानपुर जैसे शांत क्षेत्र में शराब की कथित अवैध सप्लाई का नेटवर्क यदि वास्तव में सक्रिय है तो यह सिर्फ आबकारी नियमों का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक चिंता का भी विषय है।
अब प्रशासन की अग्निपरीक्षा!
आरोप सही हैं तो कार्रवाई कब? आरोप गलत हैं तो जांच कर सच सामने क्यों नहीं लाया जाता?
मानपुर के लोगों की निगाह अब जिला प्रशासन पर है।
सवाल सीधा है—
दुकान से बाहर निकलती शराब की कथित खेप आखिर किसके इशारे पर जा रही है?
गांवों तक शराब पहुंचाने वाला नेटवर्क किसके संरक्षण में चल रहा है?
बार-बार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती?
और यदि शिकायतें गलत हैं तो प्रशासन निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सार्वजनिक क्यों नहीं करता?
मानपुर के नागरिक अब दावे नहीं, कार्रवाई चाहते हैं। जिला प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच कराए जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मानपुर में शराब का कारोबार नियमों के अनुसार चल रहा है या फिर दुकान की आड़ में कोई बड़ा कथित नेटवर्क सक्रिय है।
अब देखना यह है कि आबकारी विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में केवल कागजी कार्रवाई करता है या वास्तव में मानपुर की शराब दुकानों की जमीनी हकीकत की जांच कर कथित नेटवर्क पर शिकंजा कसता है।
    user_Ashutosh tripathi
    Ashutosh tripathi
    Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • हमारे ग्राम में पानी की सबसे बड़ी समस्या है कृपया इस पर ध्यान दें ग्राम अमूआरी में नल जल योजना का पानी एक माह से नहीं आ रहा है लोग अपने पैसे से टैंकर मंगा पानी भरकर अपना गुजारा कर रहे हैं ग्राम पंचायत मेहगांव जनपद पंचायत विजयराघवगढ़ थाना कैमूर जिला कटनी मध्य प्रदेश
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    हमारे ग्राम में पानी की सबसे बड़ी समस्या है कृपया इस पर ध्यान दें
ग्राम अमूआरी में नल जल योजना का पानी एक माह से नहीं आ रहा है लोग अपने पैसे से टैंकर मंगा पानी भरकर अपना गुजारा कर रहे हैं ग्राम पंचायत मेहगांव जनपद पंचायत विजयराघवगढ़ थाना कैमूर जिला कटनी मध्य प्रदेश
    user_Sunil rai
    Sunil rai
    Security Guard विजयराघवगढ़, कटनी, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • 🔥 कटनी में महिला कांग्रेस का 'हल्ला बोल' : कंगना रनौत और भाजपा के खिलाफ फूटा गुस्सा, सांकेतिक पुतला दहन कर लगाए दोहरे चरित्र के आरोप रजनी वर्मा के नेतृत्व में सड़कों पर उतरी महिला कांग्रेस, छात्रों के अपमान और महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा कटनी | संवाददाता कटनी शहर में शनिवार को महिला कांग्रेस ने भाजपा और मंडी से सांसद कंगना रनौत के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। शहर महिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की प्रदेश महासचिव रजनी वर्मा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिला कांग्रेस नेत्रियों, कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए कंगना रनौत एवं केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी का सांकेतिक पुतला दहन किया। महिला कांग्रेस का आरोप है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं के संबंध में सांसद कंगना रनौत द्वारा की गई टिप्पणी युवाओं और छात्र शक्ति का अपमान है। प्रदर्शन के दौरान महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और छात्रों का इस तरह अपमान करना निंदनीय है। शहर महिला कांग्रेस अध्यक्ष रजनी वर्मा ने कहा कि भाजपा के नेता महिलाओं के सम्मान और संस्कार की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन जब महिलाओं के साथ अपराध या दुष्कर्म जैसे गंभीर मामलों में आरोपियों का समर्थन या स्वागत किया जाता है, तब उनकी कथनी और करनी का अंतर साफ दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं और युवाओं के मुद्दों पर दोहरी मानसिकता अपनाती है, जिसका महिला कांग्रेस पूरे देश में विरोध कर रही है। वहीं शहर कांग्रेस अध्यक्ष अमित शुक्ला ने कहा कि जनता भाजपा के नेताओं के बयानों और कार्यशैली को देख रही है तथा आने वाले समय में लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी। उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के बजाय सरकार को युवाओं, महिलाओं और आम नागरिकों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। प्रदर्शन में राकेश जैन 'कक्का', हरिशंकर शुक्ला, प्रेम बत्रा, करण सिंह चौहान, विजय पटेल, सेवा दल अध्यक्ष मंगल सिंह, अदिता वर्मा, लता कनौजिया, शशि यादव, कल्पना पाठक, मनीषा शर्मा, अर्चना जायसवाल, दुर्गावती कोल, रूपा पाठक, अर्चना दुबे, नजमा बी, सुषमा ठाकुर, रुक्मणी पांडे, लता खरे, सुनीता सोनी, सुमन सैनी, शशि शेखर भारद्वाज, कमलेश यादव, तुलाराम गोटिया, मौसुफ अहमद, संदीप यादव, श्याम पाहुजा, राकेश द्विवेदी, अजय कोल, फरीद मोहम्मद, साहिल नामदेव, ओंकार टेकाम, उदय सिंह, इमरान खान, दिलदार खान, विजय समुद्री, रमेश अहिरवार, अर्जुन सिंह, अमित सिंह, ज़ालिम यादव, अहमद कुरैशी, मारूफ अहमद, इरशाद खान, जॉर्ज डेविड, आनंद पटेल, विनोद डेंगरे, एजाज खान, हर्षित मिश्रा, राजा खान सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित रहे।
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    🔥 कटनी में महिला कांग्रेस का 'हल्ला बोल' : कंगना रनौत और भाजपा के खिलाफ फूटा गुस्सा, सांकेतिक पुतला दहन कर लगाए दोहरे चरित्र के आरोप
रजनी वर्मा के नेतृत्व में सड़कों पर उतरी महिला कांग्रेस, छात्रों के अपमान और महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा
कटनी | संवाददाता
कटनी शहर में शनिवार को महिला कांग्रेस ने भाजपा और मंडी से सांसद कंगना रनौत के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। शहर महिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की प्रदेश महासचिव रजनी वर्मा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिला कांग्रेस नेत्रियों, कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए कंगना रनौत एवं केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी का सांकेतिक पुतला दहन किया।
महिला कांग्रेस का आरोप है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं के संबंध में सांसद कंगना रनौत द्वारा की गई टिप्पणी युवाओं और छात्र शक्ति का अपमान है। प्रदर्शन के दौरान महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और छात्रों का इस तरह अपमान करना निंदनीय है।
शहर महिला कांग्रेस अध्यक्ष रजनी वर्मा ने कहा कि भाजपा के नेता महिलाओं के सम्मान और संस्कार की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन जब महिलाओं के साथ अपराध या दुष्कर्म जैसे गंभीर मामलों में आरोपियों का समर्थन या स्वागत किया जाता है, तब उनकी कथनी और करनी का अंतर साफ दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं और युवाओं के मुद्दों पर दोहरी मानसिकता अपनाती है, जिसका महिला कांग्रेस पूरे देश में विरोध कर रही है।
वहीं शहर कांग्रेस अध्यक्ष अमित शुक्ला ने कहा कि जनता भाजपा के नेताओं के बयानों और कार्यशैली को देख रही है तथा आने वाले समय में लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी। उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के बजाय सरकार को युवाओं, महिलाओं और आम नागरिकों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
प्रदर्शन में राकेश जैन 'कक्का', हरिशंकर शुक्ला, प्रेम बत्रा, करण सिंह चौहान, विजय पटेल, सेवा दल अध्यक्ष मंगल सिंह, अदिता वर्मा, लता कनौजिया, शशि यादव, कल्पना पाठक, मनीषा शर्मा, अर्चना जायसवाल, दुर्गावती कोल, रूपा पाठक, अर्चना दुबे, नजमा बी, सुषमा ठाकुर, रुक्मणी पांडे, लता खरे, सुनीता सोनी, सुमन सैनी, शशि शेखर भारद्वाज, कमलेश यादव, तुलाराम गोटिया, मौसुफ अहमद, संदीप यादव, श्याम पाहुजा, राकेश द्विवेदी, अजय कोल, फरीद मोहम्मद, साहिल नामदेव, ओंकार टेकाम, उदय सिंह, इमरान खान, दिलदार खान, विजय समुद्री, रमेश अहिरवार, अर्जुन सिंह, अमित सिंह, ज़ालिम यादव, अहमद कुरैशी, मारूफ अहमद, इरशाद खान, जॉर्ज डेविड, आनंद पटेल, विनोद डेंगरे, एजाज खान, हर्षित मिश्रा, राजा खान सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित रहे।
    user_Balkishan Namdev
    Balkishan Namdev
    Electrician कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • पत्रकार ने जब जानना चाहा की कितना कंठ का किरण होता है एक ट्रक ड्राइवर का जीवन पत्रकार ने यह सोचा था किस सरल होता है जीवन लेकिन एक ट्रक ड्राइवर ने बताई सारी हकीकत
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    पत्रकार ने जब जानना चाहा की कितना कंठ का किरण होता है एक ट्रक ड्राइवर का जीवन पत्रकार ने यह सोचा था किस सरल होता है जीवन लेकिन एक ट्रक ड्राइवर ने बताई सारी हकीकत
    user_Arya tak news
    Arya tak news
    Local News Reporter कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • कटनी नगर//- जब छात्रों के बीच घुटनों के बल बैठे कलेक्टर 📰 AIMA MEDIA | जन जन की आवाज विशेष संवाददाता | कटनी जब छात्रों के बीच घुटनों के बल बैठे कलेक्टर, मुस्कुराहटों से गूंज उठा छात्रावास सीडब्ल्यूएसएन छात्रावास में विशेष विद्यार्थियों की प्रतिभा से प्रभावित हुए कलेक्टर आशीष तिवारी, ब्रेल, अबेकस और सांकेतिक भाषा से बच्चों ने दिखाई अद्भुत क्षमता कटनी, 31 जुलाई। प्रेमनगर स्थित सीडब्ल्यूएसएन (विशेष आवश्यकता वाले बच्चों) छात्रावास में शुक्रवार को संवेदनशीलता, आत्मीयता और प्रेरणा का अनूठा दृश्य देखने को मिला। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने छात्रावास पहुंचकर औपचारिकताओं से दूर सीधे विद्यार्थियों के बीच जाकर घुटनों के बल बैठकर उनसे संवाद किया। कलेक्टर के इस आत्मीय व्यवहार ने बच्चों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी और कुछ ही पलों में पूरा परिसर अपनत्व और उत्साह से भर गया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने विद्यार्थियों से उनकी पढ़ाई, रुचियों और भविष्य के सपनों पर चर्चा की। विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों ने भी पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन कर सभी का दिल जीत लिया। यह मुलाकात केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि विश्वास, प्रेरणा और संवेदनशीलता का संदेश बन गई। ब्रेल और अबेकस पर दिखाई प्रतिभा दृष्टिबाधित विद्यार्थियों साहिल काछी, अनुराग यादव, अजय पटेल, रोहित बर्मन, मनीष सपेरा एवं पर्वत सिंह ने ब्रेल लिपि में पढ़ने और लिखने की अपनी दक्षता का शानदार प्रदर्शन किया। अबेकस और टेलर फ्रेम की सहायता से उन्होंने गणितीय प्रश्नों का तेज और सटीक समाधान प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने डेज़ी प्लेयर, स्मार्टफोन और की-बोर्ड के माध्यम से अध्ययन कर यह साबित किया कि यदि उचित अवसर और संसाधन मिलें तो कोई भी चुनौती उनके हौसलों के आगे बड़ी नहीं होती। सांकेतिक भाषा बनी संवाद का सशक्त माध्यम श्रवणबाधित विद्यार्थियों ने सांकेतिक भाषा के माध्यम से अपने विचारों और भावनाओं को सहजता एवं आत्मविश्वास के साथ व्यक्त किया। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया और यह संदेश दिया कि संवाद केवल शब्दों से नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति और सीखने की इच्छा से भी होता है। कलेक्टर ने दिए उपहार, बढ़ाया हौसला विद्यार्थियों की प्रतिभा और मेहनत से प्रभावित होकर कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने उन्हें कॉपी, पेन, चॉकलेट और बिस्किट भेंट किए। उन्होंने बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, आत्मविश्वास बनाए रखने तथा जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। आधुनिक सुविधाओं पर दिया विशेष जोर कलेक्टर ने छात्रावास में संचालित रिसोर्स सेंटर, जूडो सेंटर और फिजियोथेरेपी सेंटर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विशेष आवश्यकता वाले प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधन और आवश्यक सहयोग निरंतर उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी सकें। निरीक्षण के दौरान जिला परियोजना समन्वयक श्री प्रेम नारायण तिवारी, एपीसी (आईईडी) श्री अनिल त्रिपाठी, छात्रावास वार्डन श्री सुरेश कुमार धाकड़, सहायक वार्डन श्री अवनीश तिवारी, लेखापाल श्री अतुल बड़गैया, छात्रावास स्टाफ तथा साइटसेवर्स इंडिया की टीम उपस्थित रही।
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    कटनी नगर//-
जब छात्रों के बीच घुटनों के बल बैठे कलेक्टर
📰 AIMA MEDIA | जन जन की आवाज
विशेष संवाददाता | कटनी
जब छात्रों के बीच घुटनों के बल बैठे कलेक्टर, मुस्कुराहटों से गूंज उठा छात्रावास
सीडब्ल्यूएसएन छात्रावास में विशेष विद्यार्थियों की प्रतिभा से प्रभावित हुए कलेक्टर आशीष तिवारी, ब्रेल, अबेकस और सांकेतिक भाषा से बच्चों ने दिखाई अद्भुत क्षमता
कटनी, 31 जुलाई। प्रेमनगर स्थित सीडब्ल्यूएसएन (विशेष आवश्यकता वाले बच्चों) छात्रावास में शुक्रवार को संवेदनशीलता, आत्मीयता और प्रेरणा का अनूठा दृश्य देखने को मिला। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने छात्रावास पहुंचकर औपचारिकताओं से दूर सीधे विद्यार्थियों के बीच जाकर घुटनों के बल बैठकर उनसे संवाद किया। कलेक्टर के इस आत्मीय व्यवहार ने बच्चों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी और कुछ ही पलों में पूरा परिसर अपनत्व और उत्साह से भर गया।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने विद्यार्थियों से उनकी पढ़ाई, रुचियों और भविष्य के सपनों पर चर्चा की। विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों ने भी पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन कर सभी का दिल जीत लिया। यह मुलाकात केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि विश्वास, प्रेरणा और संवेदनशीलता का संदेश बन गई।
ब्रेल और अबेकस पर दिखाई प्रतिभा
दृष्टिबाधित विद्यार्थियों साहिल काछी, अनुराग यादव, अजय पटेल, रोहित बर्मन, मनीष सपेरा एवं पर्वत सिंह ने ब्रेल लिपि में पढ़ने और लिखने की अपनी दक्षता का शानदार प्रदर्शन किया। अबेकस और टेलर फ्रेम की सहायता से उन्होंने गणितीय प्रश्नों का तेज और सटीक समाधान प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने डेज़ी प्लेयर, स्मार्टफोन और की-बोर्ड के माध्यम से अध्ययन कर यह साबित किया कि यदि उचित अवसर और संसाधन मिलें तो कोई भी चुनौती उनके हौसलों के आगे बड़ी नहीं होती।
सांकेतिक भाषा बनी संवाद का सशक्त माध्यम
श्रवणबाधित विद्यार्थियों ने सांकेतिक भाषा के माध्यम से अपने विचारों और भावनाओं को सहजता एवं आत्मविश्वास के साथ व्यक्त किया। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया और यह संदेश दिया कि संवाद केवल शब्दों से नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति और सीखने की इच्छा से भी होता है।
कलेक्टर ने दिए उपहार, बढ़ाया हौसला
विद्यार्थियों की प्रतिभा और मेहनत से प्रभावित होकर कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने उन्हें कॉपी, पेन, चॉकलेट और बिस्किट भेंट किए। उन्होंने बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, आत्मविश्वास बनाए रखने तथा जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
आधुनिक सुविधाओं पर दिया विशेष जोर
कलेक्टर ने छात्रावास में संचालित रिसोर्स सेंटर, जूडो सेंटर और फिजियोथेरेपी सेंटर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विशेष आवश्यकता वाले प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधन और आवश्यक सहयोग निरंतर उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी सकें।
निरीक्षण के दौरान जिला परियोजना समन्वयक श्री प्रेम नारायण तिवारी, एपीसी (आईईडी) श्री अनिल त्रिपाठी, छात्रावास वार्डन श्री सुरेश कुमार धाकड़, सहायक वार्डन श्री अवनीश तिवारी, लेखापाल श्री अतुल बड़गैया, छात्रावास स्टाफ तथा साइटसेवर्स इंडिया की टीम उपस्थित रही।
    user_आदिशक्ति माँ विंध्यवासिनी मंदि
    आदिशक्ति माँ विंध्यवासिनी मंदि
    Classified ads newspaper publisher कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • *गुजरात में भयानक घटना!* *आरोप है कि 105 हार्ट सर्जरी ज़रूरी नहीं होने के बावजूद की गईं।* *पूछने पर वे बेखौफ होकर कहते हैं, “ऐसा क्यों किया?” —* *हॉस्पिटल चलाना है, सैलरी और दूसरे खर्चों के लिए पैसे चाहिए!* *लोगों को सावधान रहना चाहिए।* 😳😳😳😈👽👽👽
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    *गुजरात में भयानक घटना!*
*आरोप है कि 105 हार्ट सर्जरी ज़रूरी नहीं होने के बावजूद की गईं।*
*पूछने पर वे बेखौफ होकर कहते हैं, “ऐसा क्यों किया?” —*
*हॉस्पिटल चलाना है, सैलरी और दूसरे खर्चों के लिए पैसे चाहिए!*
*लोगों को सावधान रहना चाहिए।*
😳😳😳😈👽👽👽
    user_Naresh Bajaj
    Naresh Bajaj
    पत्रकार कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • मैहर के नागपुर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल पर मौत के बाद शव सौंपने में कथित तौर पर पैसों की मांग शव देने के लिए पैसे मांगने का आरोप फिर भी कार्यवाही शून्य नागपुर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल पर गंभीर आरोप लगने के बाद भी जिला प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल मरीज के परिजनों से कथित अभद्रता और कथित वसूली के आरोपों से मचा हड़कंप—महिला की मौत के बाद शव सौंपने को लेकर भी सामने आया गंभीर दावा! मैहर के नागपुर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल को लेकर सामने आए आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं दावा किया जा रहा है कि अस्पताल में मरीज के परिजनों के साथ कथित अभद्रता की गई और पैसे को लेकर विवाद हुआ सबसे गंभीर दावा यह है कि महिला मरीज की मौत के बाद शव सौंपने में कथित तौर पर पैसों की मांग की गई और भुगतान के बाद शव सौंपा गया* अगर यह दावा सही है तो मामला बेहद गंभीर है अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा क्या अस्पताल के बिल और भुगतान रिकॉर्ड की जांच होगी क्या परिजनों के बयान दर्ज किए जाएंगे क्या शव सौंपने की पूरी प्रक्रिया की जांच होगी क्या दोष साबित होने पर जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होगी? वही अस्पताल के रजिस्ट्रेशन पर भी सवाल उठाए गए है सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि अस्पताल का पंजीयन डॉ. प्रशांत वानखेड़े के नाम पर है जबकि कथित तौर पर पिछले कई महीनों से उनकी अस्पताल में मौजूदगी नहीं है तो सवाल उठता है आखिर अस्पताल का संचालन कौन कर रहा है क्या स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के वर्तमान संचालन और पंजीयन की स्थिति का सत्यापन किया है इसके साथ ही पार्किंग व्यवस्था और अन्य निर्धारित मानकों के पालन को लेकर भी शिकायतें और सवाल सामने आ रहे हैं अब मैहर प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सच्चाई सामने लाएगा या गंभीर आरोपों के बावजूद मामला सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा जनता जवाब चाहती है स्वास्थ्य विभाग जवाब दे प्रशासन जवाब दे और अस्पताल प्रबंधन भी अपना पक्ष सामने रखे क्योंकि मामला सिर्फ आरोपों का नहीं—सवाल है कि अगर आरोप सही हैं तो कार्यवाही कब होगी और अगर गलत हैं तो सच्चाई जनता के सामने कब आएगी?
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    मैहर के नागपुर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल पर मौत के बाद शव सौंपने में कथित तौर पर पैसों की मांग
शव देने के लिए पैसे मांगने का आरोप फिर भी कार्यवाही शून्य नागपुर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल पर गंभीर आरोप लगने के बाद भी जिला प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल मरीज के परिजनों से कथित अभद्रता और कथित वसूली के आरोपों से मचा हड़कंप—महिला की मौत के बाद शव सौंपने को लेकर भी सामने आया गंभीर दावा! मैहर के नागपुर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल को लेकर सामने आए आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं दावा किया जा रहा है कि अस्पताल में मरीज के परिजनों के साथ कथित अभद्रता की गई और पैसे को लेकर विवाद हुआ सबसे गंभीर दावा यह है कि महिला मरीज की मौत के बाद शव सौंपने में कथित तौर पर पैसों की मांग की गई और भुगतान के बाद शव सौंपा गया*
अगर यह दावा सही है तो मामला बेहद गंभीर है अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा क्या अस्पताल के बिल और भुगतान रिकॉर्ड की जांच होगी क्या परिजनों के बयान दर्ज किए जाएंगे क्या शव सौंपने की पूरी प्रक्रिया की जांच होगी क्या दोष साबित होने पर जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होगी?
वही अस्पताल के रजिस्ट्रेशन पर भी सवाल उठाए गए है सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि अस्पताल का पंजीयन डॉ. प्रशांत वानखेड़े के नाम पर है जबकि कथित तौर पर पिछले कई महीनों से उनकी अस्पताल में मौजूदगी नहीं है तो सवाल उठता है आखिर अस्पताल का संचालन कौन कर रहा है क्या स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के वर्तमान संचालन और पंजीयन की स्थिति का सत्यापन किया है इसके साथ ही पार्किंग व्यवस्था और अन्य निर्धारित मानकों के पालन को लेकर भी शिकायतें और सवाल सामने आ रहे हैं अब मैहर प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सच्चाई सामने लाएगा या गंभीर आरोपों के बावजूद मामला सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा जनता जवाब चाहती है स्वास्थ्य विभाग जवाब दे प्रशासन जवाब दे और अस्पताल प्रबंधन भी अपना पक्ष सामने रखे
क्योंकि मामला सिर्फ आरोपों का नहीं—सवाल है कि अगर आरोप सही हैं तो कार्यवाही कब होगी और अगर गलत हैं तो सच्चाई जनता के सामने कब आएगी?
    user_Pushpendra Kumar Vishwaka
    Pushpendra Kumar Vishwaka
    Computer Software Shop मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
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