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बारां जिले के छीपाबड़ौद स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियाँ चल रही हैं। इस दौरान पश्चिमोत्तानासन और कटि चक्रासन जैसे योगासनों का अभ्यास किया जा रहा है, जिन्हें विशेष रूप से मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद बताया गया है। लोगों से इन योगासनों को सीखने और नियमित रूप से करने का आग्रह किया गया है।
Jagdish Chandra Sharma
बारां जिले के छीपाबड़ौद स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियाँ चल रही हैं। इस दौरान पश्चिमोत्तानासन और कटि चक्रासन जैसे योगासनों का अभ्यास किया जा रहा है, जिन्हें विशेष रूप से मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद बताया गया है। लोगों से इन योगासनों को सीखने और नियमित रूप से करने का आग्रह किया गया है।
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- राजस्थान के छबड़ा में 'अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र' और 'ओशो आशीष ध्यान योग केंद्र' के संचालक स्वामी ध्यान गगन और एस. एल. नागर ने 'हरियालो राजस्थान' अभियान के तहत पेड़ लगाने की अपील की है। उनका नारा है: "सत्यमेव जयते की सुगंध फैलाएँ, हरियालो राजस्थान बनाएँ; पेड़-पौधे हम सब लगाएँ, मरुधरा को स्वर्ग बनाएँ!" इसे सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि संस्कृति और अस्तित्व को बचाने का महायज्ञ बताया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा 'एक पेड़ मां के नाम' की अपील का भी उल्लेख करते हुए कहा कि केवल फोटो के लिए नहीं, बल्कि बच्चों की तरह पेड़ों का पालन-पोषण कर धरती माता का कर्ज चुकाया जाए। अपील में कहा गया है कि पेड़-पौधे जीवन का आधार हैं, जो प्राणवायु और मरुभूमि को शीतलता देते हैं। यदि आज ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को केवल बंजर धरती और भयंकर गर्मी ही मिलेगी। पर्यावरण संतुलन, वर्षा की कमी और गर्मी की रोकथाम के लिए घने जंगल और पेड़-पौधे ही एकमात्र उपाय हैं। यह बादलों को आकर्षित करते हैं और भूजल स्तर बढ़ाते हैं। खेजड़ी और रोहिड़ा जैसे राज्य वृक्षों का संरक्षण आवश्यक है, क्योंकि उन्होंने अकाल के समय भी जनजीवन को पाला है। इसके अलावा, हरे-भरे पेड़ मोर और चिंकारा जैसे अनगिनत जीवों का आश्रय भी हैं, जिनके नष्ट होने से उनका अस्तित्व खतरे में है। नागर ने नागरिकों से संवेदनशील बनने और हर विशेष अवसर पर कम से कम एक पौधा लगाने तथा उसके बड़े होने तक उसकी जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया। उन्होंने हरे पेड़ों को काटने से खुद बचने और दूसरों को भी रोकने की बात कही, बिश्नोई समाज के 363 लोगों के बलिदान का स्मरण कराते हुए। सामूहिक भागीदारी के तहत पार्कों, सड़कों के किनारों और खाली जमीनों पर सघन वृक्षारोपण करने की सलाह दी गई है। केंद्र ने यह संदेश भी दिया कि पेड़ काटना अपनी ही साँसों की डोर को काटने जैसा है। अंत में, 'अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र' ने जन-जन तक अपने आह्वान को पहुँचाने और राजस्थान की पावन धरा को फिर से हरा-भरा और खुशहाल बनाने का संकल्प लेने की अपील की।4
- मध्य प्रदेश के गुना स्थित सामान्य वन मंडल में वर्ष 2020 की विवादित तालाब और चेकडैम स्वीकृतियों का मामला अब सिर्फ निर्माण कार्यों तक सीमित न रहकर वन विभाग की पारदर्शिता, विभागीय जवाबदेही और सूचना के अधिकार (RTI) कानून के पालन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन स्वीकृतियों पर अधिकारियों ने आपत्तियां दर्ज कीं और जिनके खिलाफ शिकायत के बाद विभागीय जांच शुरू होने के संकेत मिले, उन्हीं मामलों में जब RTI के तहत आरोप पत्रों की प्रतियां मांगी गईं तो विभाग ने यह कहकर जवाब देने से इनकार कर दिया कि संबंधित अधिकारी के विरुद्ध उपवनमंडल कार्यालय में कोई विभागीय जांच नहीं चल रही है। इससे यह मामला और भी पेचीदा हो गया है। वर्ष 2020 में कई तालाब और चेकडैम प्रस्तावों पर वन अधिकारियों ने अतिक्रमण, वन भूमि प्रभावित होने और वृक्षों को नुकसान जैसी आपत्तियां उठाई थीं। दस्तावेज़ों के अनुसार, कई प्रस्तावों पर गंभीर टिप्पणियां की गई थीं, लेकिन बाद में उन्हीं कार्यों को मंजूरी मिल गई। कटोरिया आदिवासी बस्ती, मुहालपुर, बीलखेड़ा, हिंगराजखेड़ा, जटाखेड़ा, रघोगढ़ और नागा बाबा पाटई जैसे क्षेत्रों से जुड़े प्रस्ताव बाद में विवाद का केंद्र बने। 16 जून 2023 को इस संबंध में एक विस्तृत शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें आरोप था कि अधिकारियों की आपत्तियों को महत्व नहीं दिया गया। शिकायत में तत्कालीन मानचित्रकार शाखा से जुड़े नवल किशोर सेन की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे। इसके बाद विभागीय स्तर पर पत्राचार और जांच संबंधी गतिविधियों के संकेत भी सामने आए थे। वर्ष 2025 के दस्तावेज़ों में जांच प्रक्रिया से जुड़े संकेत दिखाई दिए और विभागीय सूत्रों के अनुसार मामला जांच के लिए आगे बढ़ा, लेकिन उसके बाद न तो रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, न निष्कर्ष सामने आया, न जिम्मेदारी तय हुई और न ही विभाग ने जांच की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की। जब RTI के माध्यम से विभागीय जांच में दाखिल आरोप पत्रों और संबंधित अभिलेखों की प्रतियां मांगी गईं, तो विभाग ने स्पष्ट जानकारी देने के बजाय केवल यह कहा कि विभागीय जांच नहीं चल रही है। इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या मांगी गई सूचना और दिए गए जवाब का विषय अलग-अलग था, यदि आरोप पत्र मौजूद नहीं थे तो स्पष्ट रूप से क्यों नहीं बताया गया, और यदि रिकॉर्ड किसी अन्य कार्यालय में था तो आवेदन स्थानांतरित क्यों नहीं किया गया। अब जनता यह पूछ रही है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ था तो जांच की आवश्यकता क्यों पड़ी, यदि जांच हुई तो उसका परिणाम कहां है, और यदि आरोप पत्रों की मांग की गई थी तो उनका जवाब क्यों नहीं दिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि "क्या तालाब स्वीकृति विवाद की पूरी सच्चाई कभी सामने आएगी, या यह मामला भी फाइलों के बोझ तले दबकर रह जाएगा?" यह प्रश्न अब केवल एक प्रकरण का नहीं, बल्कि वन विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी बन चुका है।1
- गुना कलेक्टर श्री किशोर कुमार ने 'स्कूल चले हम अभियान' के द्वितीय चरण के तहत पुरानी छावनी स्थित पीएमश्री शासकीय माध्यमिक विद्यालय का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को खूब बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए अभी से मेहनत शुरू करने के लिए प्रेरित किया। कलेक्टर ने छात्रों से योग, ध्यान और व्यायाम को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने की सलाह दी, ताकि वे स्वस्थ रहकर अपने परिवार, समाज और देश का भला कर सकें। उन्होंने नई जगहों पर घूमने और दुनिया को समझने के महत्व पर भी जोर दिया, जिससे सोच का दायरा बढ़ता है और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। विद्यालय पहुंचने पर कलेक्टर श्री किशोर कुमार का विद्यार्थियों ने स्वागत गीत गाकर अभिनंदन किया। कलेक्टर ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से उनके भविष्य के सपनों पर चर्चा की और उन्हें बताया कि यह उम्र बड़े लक्ष्य तय करने की है। कलेक्टर ने कहा कि यदि विद्यार्थी अभी से अनुशासन, मेहनत और सकारात्मक आदतों को अपनाते हैं, तो वे जीवन में किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।2
- चांचौड़ा-बीनागंज क्षेत्र में आज एक बड़ा हादसा टल गया, जहाँ एक चलती मोटरसाइकिल में अचानक भीषण आग लग गई। घटना के समय बाइक पर एक ही परिवार के चार सदस्य, पति-पत्नी और उनके दो बच्चे सवार थे। आग भड़कते ही बाइक चला रहे युवक ने सूझबूझ दिखाते हुए गाड़ी रोक दी, जिससे परिवार ने समय रहते मोटरसाइकिल से कूदकर अपनी जान बचाई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, परिवार कहीं जा रहा था तभी अचानक इंजन के पास से लपटें उठने लगीं। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और पूरी मोटरसाइकिल धू-धू कर जलने लगी। राहगीरों और स्थानीय लोगों की मदद से जब तक आग पर काबू पाया जाता, तब तक मोटरसाइकिल पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी। बीच सड़क पर हुई इस घटना से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है।1
- कलेक्टर एसपी ने डीजल पेट्रोल बचाने का दिया संदेश, एक साथ सभी अधिकारी बस में सवार होकर शिविर में शामिल होने पहुंचे। राजगढ़ कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा एवं पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी आज गुरुवार को सारंगपुर विकासखंड के ग्राम बाबल्दा में आयोजित जनकल्याण शिविर में शामिल होने के लिए। जिला अधिकारियों के साथ कलेक्ट्रेट परिसर से बस द्वारा रवाना हुए। इस दौरान अधिकारियों ने शिविर की व्यवस्थाओं एवं विभिन्न विभागों द्वारा प्रदाय की जाने वाली सेवाओं की जानकारी ली। जनकल्याण शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित निराकरण, शासन की जनहितकारी योजनाओं के लाभ वितरण तथा आमजन से सीधे संवाद पर विशेष जोर दिया जाएगा।।1
- बारां जिले के छीपाबड़ौद स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियाँ चल रही हैं। इस दौरान पश्चिमोत्तानासन और कटि चक्रासन जैसे योगासनों का अभ्यास किया जा रहा है, जिन्हें विशेष रूप से मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद बताया गया है। लोगों से इन योगासनों को सीखने और नियमित रूप से करने का आग्रह किया गया है।1
- बाल बाल बचा परिवार चलती हुई बाइक में लगी आग. घटना इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर हो रही वायरल बाल बाल बचा परिवार चलती हुई बाइक में लगी आग1
- गुरुवार (18 जून) को सुबह करीब 9:20 बजे कोटा में इंदौर-जोधपुर इंटरसिटी रणथंभौर एक्सप्रेस (12465) के आगे लगे जनरल कोच के पहियों के पास से अचानक धुआं निकलने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। एहतियातन ट्रेन को तत्काल लूनीरिछा स्टेशन पर रोक दिया गया। धुआं निकलता देख कई यात्री जल्दबाजी में कोच से नीचे उतर आए। रेलवे कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच की, जिसमें प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कोच का ब्रेक जाम होने से लगातार घर्षण के कारण धुआं निकलने की बात सामने आई। ब्रेक रिलीज करने के बाद धुआं बंद हो गया और तकनीकी खामी को दूर कर स्थिति को नियंत्रण में लिया गया। इस घटना के कारण ट्रेन करीब 20 मिनट की देरी से आगे रवाना हुई। पीछे आ रही बांद्रा-बरौनी अवध एक्सप्रेस को भी कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। रेलवे कर्मचारियों के अनुसार, समय पर तकनीकी खराबी का पता चल जाने से एक संभावित बड़ा हादसा टल गया, क्योंकि ब्रेक जाम होने पर यदि समय पर ध्यान न दिया जाए तो आग लगने की आशंका भी बन सकती है।1
- मध्य प्रदेश में रणथंबोर एक्सप्रेस ट्रेन से धुआँ निकलने की घटना सामने आई है। इस घटना के बाद ट्रेन में सवार यात्री घबरा गए और वे तुरंत ट्रेन से नीचे उतर गए। फिलहाल, इस घटना के संबंध में अधिक विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।1