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बिहार सरकार ने पश्चिम चंपारण को दिया सबसे बड़ा सौगात | बिहार के पश्चिम चंपारण में नई सरकार ने दिया सबसे बड़ा सौगात चंपारण में खुलेंगे 6 नया डिग्री कॉलेज
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बिहार सरकार ने पश्चिम चंपारण को दिया सबसे बड़ा सौगात | बिहार के पश्चिम चंपारण में नई सरकार ने दिया सबसे बड़ा सौगात चंपारण में खुलेंगे 6 नया डिग्री कॉलेज
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- वित्तीय आपातकाल की तरफ बढ़ रहा है बिहार! एनडीए सरकार की रेवड़ी सियासत ने बिहार का खजाना खाली कर दिया है!!1
- रविवार के दिन मझौलिया पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार 20 लीटर देशी चूलाई शराब के साथ एक शराब कारोबारी को किया गया गिरफ्तार।यह जानकारी पुलिस निरीक्षक सह थानाध्यक्ष अमर कुमार ने दी।उन्होंने बताया कि मझौलिया थाना कांड संख्या 386/26 के नामजद प्राथमिकी अभियुक्त अमर सहनी पिता स्व.मंगल सहनी साकिन माधोपुर मलाही टोला को मेडिकल जांच उपरांत न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।इस पुलिसिया कार्रवाई से शराब कारोबारियों में हड़कंप सा मच गया है।4
- बिहार राज्य खेत मजदूर यूनियन, पश्चिम चम्पारण जिला कमिटी की जीबी बैठक बलिराम भवन के सभागार में राजेन्द्र साह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक की शुरुआत मृत मजदूरों एवं दिवंगत मजदूर नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। बैठक का विधिवत उद्घाटन एटक प्रभारी ओम प्रकाश क्रांति ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने देश और राज्य की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति पर विस्तार से चर्चा करते हुए नोएडा एवं एनसीआर दिल्ली में मजदूरों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने सरकार और पूंजीपतियों पर मजदूर विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि मजदूरों के अधिकारों को लगातार कुचला जा रहा है। साथ ही, जेल में बंद मजदूर नेताओं की अविलंब रिहाई, झूठे मुकदमों की वापसी और शोषण करने वाले मालिकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई। बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 1 मई को मजदूर दिवस मनाने तथा 25 मई को किसान सभा एवं खेत मजदूर यूनियन के संयुक्त तत्वावधान में धरना-प्रदर्शन आयोजित करने का ऐलान किया गया। इसके साथ ही यूनियन की सदस्यता बढ़ाने और संगठन को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। खेत मजदूरों को उजड़ने से बचाने के लिए आंदोलन को तेज करने का भी संकल्प लिया गया। जिला सचिव सुबोध मुखिया ने बैठक में अपना कार्य-प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और संगठन को सशक्त बनाकर मजदूर हित में संघर्ष को तेज करने का आह्वान किया। बैठक को किसान नेता राधामोहन यादव, बब्लू दूबे समेत कई नेताओं ने संबोधित किया। इस दौरान वीरन यादव, परसन साह, अच्छे लाल सहनी, पीताम्बर शर्मा, विशुन प्रसाद, साधु सिंह, फरमान, आरती, संजय सिंह सहित अन्य सदस्यों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इसी क्रम में ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC), बिहार राज्य खेत मजदूर यूनियन, बिहार राज्य किसान सभा एवं ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन के संयुक्त तत्वावधान में नोएडा और एनसीआर दिल्ली में मजदूरों पर हो रहे हमलों के खिलाफ जोरदार प्रतिरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तार मजदूर नेताओं की रिहाई, गलत मुकदमों की वापसी और ट्रेड यूनियन अधिकारों पर हमले बंद करने की मांग की। विरोध स्वरूप प्रधानमंत्री एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पुतला दहन कर आक्रोश व्यक्त किया गया। प्रदर्शनकारियों ने उत्तर प्रदेश पुलिस, सरकार और पूंजीपतियों के बीच कथित सांठगांठ पर सवाल उठाते हुए मजदूरों पर हो रहे अत्याचार को तत्काल रोकने की मांग की। कार्यक्रम का नेतृत्व एटक नेता ओम प्रकाश क्रांति, एआईवाईएफ के राज्य सचिव गयासुद्दीन, किसान नेता राधामोहन यादव, खेत मजदूर नेता सुबोध मुखिया, बब्लू दूबे, मनोज साह, गुलाब प्रसाद, चन्द्रिका प्रसाद, इदू अंसारी, वीरन यादव, ओम प्रकाश साह, संजय सिंह, आरती, विशुन प्रसाद, साधु सिंह, फरहान, केदार चौधरी सहित कई प्रमुख नेताओं ने किया। कुल मिलाकर, बैठक और विरोध प्रदर्शन के माध्यम से मजदूरों के हक और अधिकारों की लड़ाई को और तेज करने का स्पष्ट संदेश दिया गया।1
- बेतिया के संत जेवियर स्कूल में विस्फोट, छात्र घायल; जांच में जुटी पुलिस और FSL बेतिया से बड़ी खबर है, जहां शहर के संत जेवियर स्कूल बेतिया में शनिवार सुबह वॉशरूम के अंदर हुए विस्फोट से एक छात्र घायल हो गया। घटना के बाद स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कक्षा 8C के एक नाबालिग छात्र ने ही वॉशरूम में विस्फोटक पदार्थ रखा था। विस्फोट के दौरान वह खुद भी उसकी चपेट में आकर घायल हो गया। स्कूल प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित छात्र को निष्कासित कर दिया। घायल छात्र को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। हैरानी की बात यह रही कि इस घटना की सूचना स्कूल प्रशासन द्वारा पुलिस को नहीं दी गई। बाद में पीड़ित छात्र के परिजनों ने डायल 112 पर कॉल कर पुलिस को जानकारी दी। सूचना मिलते ही सदर-1 एसडीपीओ विवेक दीप पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उनके साथ मुफस्सिल थाना की टीम और फॉरेंसिक विशेषज्ञ भी घटनास्थल पर जांच के लिए पहुंचे। फॉरेंसिक जांच में प्रारंभिक तौर पर यह सामने आया है कि विस्फोट में इस्तेमाल किया गया पदार्थ सामान्य पटाखा नहीं था, बल्कि उससे अधिक प्रभावी और बड़ा था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि छात्र के पास यह सामग्री कहां से और कैसे पहुंची। घटना के बाद स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है और जल्द ही सच्चाई सामने लाई जाएगी।1
- 2027 के पहले चरण में मकान सूचीकरण एवं आवास की गणना की शुरुआत 2 मई से 31 मई तक चलेगा। 18.04.2026.1
- भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता बिहार का शिक्षा विभाग,'धनकुबेर' बने बैठे हैं कई जिला शिक्षा पदाधिकारी बिहार में शिक्षा विभाग की साख अब धीरे-धीरे धूमिल होती जा रही है और इसका हाल भी प्रदेश की पुलिस व्यवस्था जैसा होता दिख रहा है। हाल ही में सामने आ रहे विभिन्न मामलों और वीडियो ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के अधिकतर जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) की छवि अब एक 'रिश्वतखोर' अधिकारी के रूप में तब्दील होती जा रही है। यही वह मुख्य कारण है जिसकी वजह से निजी विद्यालयों के संचालकों के मन में विभाग का कोई खौफ नहीं बचा है। उन्हें भली-भांति ज्ञात है कि व्यवस्था की कुर्सी पर बैठे लोग बिकाऊ हैं, बस खरीदने वाला दिलदार होना चाहिए। शिक्षा विभाग के गलियारों में चर्चा आम है कि यदि बिहार के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों की संपत्ति की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो इनमें से अधिकतर अधिकारी 'धनकुबेर' से कम नहीं निकलेंगे। अकूत संपत्ति और भ्रष्टाचार के इस खेल ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को खोखला कर दिया है। सरकारी फाइलों को आगे बढ़ाने से लेकर निजी स्कूलों को एनओसी (NOC) देने तक, हर मेज के नीचे से रिश्वत का लेन-देन अब एक अघोषित नियम बन चुका है। *पश्चिम चंपारण का जिला मुख्यालय बेतिया भी इस काली सच्चाई से अछूता नहीं है। बेतिया जिला शिक्षा विभाग की स्थिति भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है*, *जहाँ पारदर्शिता का अभाव और अधिकारियों की मनमानी चरम पर है। स्थानीय स्तर पर भी विभाग की कार्यशैली को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने से इन अधिकारियों के हौसले बुलंद हैं*। यह वीडियो और बढ़ते भ्रष्टाचार के प्रमाण इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जब तक इन 'सफेदपोश धनकुबेरों' पर नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक बिहार की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की कल्पना करना बेमानी होगा। अब समय आ गया है कि सरकार इन अधिकारियों की संपत्तियों की जांच कराए ताकि जनता के सामने विभाग की असली तस्वीर साफ हो सके।1