भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता बिहार का शिक्षा विभाग,'धनकुबेर' बने बैठे हैं कई जिला शिक्षा पदाधिकारी बिहार में शिक्षा विभाग की साख अब धीरे-धीरे धूमिल होती जा रही है और इसका हाल भी प्रदेश की पुलिस व्यवस्था जैसा होता दिख रहा है। हाल ही में सामने आ रहे विभिन्न मामलों और वीडियो ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के अधिकतर जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) की छवि अब एक 'रिश्वतखोर' अधिकारी के रूप में तब्दील होती जा रही है। यही वह मुख्य कारण है जिसकी वजह से निजी विद्यालयों के संचालकों के मन में विभाग का कोई खौफ नहीं बचा है। उन्हें भली-भांति ज्ञात है कि व्यवस्था की कुर्सी पर बैठे लोग बिकाऊ हैं, बस खरीदने वाला दिलदार होना चाहिए। शिक्षा विभाग के गलियारों में चर्चा आम है कि यदि बिहार के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों की संपत्ति की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो इनमें से अधिकतर अधिकारी 'धनकुबेर' से कम नहीं निकलेंगे। अकूत संपत्ति और भ्रष्टाचार के इस खेल ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को खोखला कर दिया है। भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता बिहार का शिक्षा विभाग,'धनकुबेर' बने बैठे हैं कई जिला शिक्षा पदाधिकारी बिहार में शिक्षा विभाग की साख अब धीरे-धीरे धूमिल होती जा रही है और इसका हाल भी प्रदेश की पुलिस व्यवस्था जैसा होता दिख रहा है। हाल ही में सामने आ रहे विभिन्न मामलों और वीडियो ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के अधिकतर जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) की छवि अब एक 'रिश्वतखोर' अधिकारी के रूप में तब्दील होती जा रही है। यही वह मुख्य कारण है जिसकी वजह से निजी विद्यालयों के संचालकों के मन में विभाग का कोई खौफ नहीं बचा है। उन्हें भली-भांति ज्ञात है कि व्यवस्था की कुर्सी पर बैठे लोग बिकाऊ हैं, बस खरीदने वाला दिलदार होना चाहिए। शिक्षा विभाग के गलियारों में चर्चा आम है कि यदि बिहार के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों की संपत्ति की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो इनमें से अधिकतर अधिकारी 'धनकुबेर' से कम नहीं निकलेंगे। अकूत संपत्ति और भ्रष्टाचार के इस खेल ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को खोखला कर दिया है। सरकारी फाइलों को आगे बढ़ाने से लेकर निजी स्कूलों को एनओसी (NOC) देने तक, हर मेज के नीचे से रिश्वत का लेन-देन अब एक अघोषित नियम बन चुका है। *पश्चिम चंपारण का जिला मुख्यालय बेतिया भी इस काली सच्चाई से अछूता नहीं है। बेतिया जिला शिक्षा विभाग की स्थिति भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है*, *जहाँ पारदर्शिता का अभाव और अधिकारियों की मनमानी चरम पर है। स्थानीय स्तर पर भी विभाग की कार्यशैली को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने से इन अधिकारियों के हौसले बुलंद हैं*। यह वीडियो और बढ़ते भ्रष्टाचार के प्रमाण इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जब तक इन 'सफेदपोश धनकुबेरों' पर नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक बिहार की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की कल्पना करना बेमानी होगा। अब समय आ गया है कि सरकार इन अधिकारियों की संपत्तियों की जांच कराए ताकि जनता के सामने विभाग की असली तस्वीर साफ हो सके।
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता बिहार का शिक्षा विभाग,'धनकुबेर' बने बैठे हैं कई जिला शिक्षा पदाधिकारी बिहार में शिक्षा विभाग की साख अब धीरे-धीरे धूमिल होती जा रही है और इसका हाल भी प्रदेश की पुलिस व्यवस्था जैसा होता दिख रहा है। हाल ही में सामने आ रहे विभिन्न मामलों और वीडियो ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के अधिकतर जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) की छवि अब एक 'रिश्वतखोर' अधिकारी के रूप में तब्दील होती जा रही है। यही वह मुख्य कारण है जिसकी वजह से निजी विद्यालयों के संचालकों के मन में विभाग का कोई खौफ नहीं बचा है। उन्हें भली-भांति ज्ञात है कि व्यवस्था की कुर्सी पर बैठे लोग बिकाऊ हैं, बस खरीदने वाला दिलदार होना चाहिए। शिक्षा विभाग के गलियारों में चर्चा आम है कि यदि बिहार के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों की संपत्ति की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो इनमें से अधिकतर अधिकारी 'धनकुबेर' से कम नहीं निकलेंगे। अकूत संपत्ति और भ्रष्टाचार के इस खेल ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को खोखला कर दिया है। भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता बिहार का शिक्षा विभाग,'धनकुबेर' बने बैठे हैं कई जिला शिक्षा पदाधिकारी बिहार में शिक्षा विभाग की साख अब धीरे-धीरे धूमिल होती जा रही है और इसका हाल भी प्रदेश की पुलिस व्यवस्था जैसा होता दिख रहा है। हाल ही में सामने आ रहे विभिन्न मामलों और वीडियो ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के अधिकतर जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) की छवि अब एक 'रिश्वतखोर' अधिकारी के रूप में तब्दील होती जा रही है। यही वह मुख्य कारण है जिसकी वजह से निजी विद्यालयों के संचालकों के मन में विभाग का कोई खौफ नहीं बचा है। उन्हें भली-भांति ज्ञात है कि व्यवस्था की कुर्सी पर बैठे लोग बिकाऊ हैं, बस खरीदने वाला दिलदार होना चाहिए। शिक्षा विभाग के गलियारों में चर्चा आम है कि यदि बिहार के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों की संपत्ति की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो इनमें से अधिकतर अधिकारी 'धनकुबेर' से कम नहीं निकलेंगे। अकूत संपत्ति और भ्रष्टाचार के इस खेल ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को खोखला कर दिया है। सरकारी फाइलों को आगे बढ़ाने से लेकर निजी स्कूलों को एनओसी (NOC) देने तक, हर मेज के नीचे से रिश्वत का लेन-देन अब एक अघोषित नियम बन चुका है। *पश्चिम चंपारण का जिला मुख्यालय बेतिया भी इस काली सच्चाई से अछूता नहीं है। बेतिया जिला शिक्षा विभाग की स्थिति भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है*, *जहाँ पारदर्शिता का अभाव और अधिकारियों की मनमानी चरम पर है। स्थानीय स्तर पर भी विभाग की कार्यशैली को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने से इन अधिकारियों के हौसले बुलंद हैं*। यह वीडियो और बढ़ते भ्रष्टाचार के प्रमाण इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जब तक इन 'सफेदपोश धनकुबेरों' पर नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक बिहार की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की कल्पना करना बेमानी होगा। अब समय आ गया है कि सरकार इन अधिकारियों की संपत्तियों की जांच कराए ताकि जनता के सामने विभाग की असली तस्वीर साफ हो सके।
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- सघन शहरी क्षेत्र को जलजमाव और सड़ांध से बचाने के लिए नालों की बेहतर सफाई जरूरी: गरिमा मझौलिया से जापान साह की रिपोर्ट बेतिया। नगर निगम क्षेत्र में जलजमाव और नालों से उठने वाली दुर्गंध की समस्या को गंभीरता से लेते हुए महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने मुख्य नालों की सफाई में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सघन शहरी क्षेत्रों को जलजमाव और कचरे या सिल्ट की सड़ांध से बचाने के लिए नालों की नियमित एवं प्रभावी सफाई अत्यंत आवश्यक है। महापौर ने नगर निगम प्रशासन के मानव बल एवं सरकारी उपकरणों के माध्यम से जारी सफाई कार्य की प्रगति का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बेतिया नगर निगम क्षेत्र स्थित राजकीय कन्या मध्य विद्यालय के समीप मुख्य नाले की तल से हो रही सफाई का जायजा लिया और सफाई निरीक्षकों को सख्त निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्कूलों एवं सार्वजनिक स्थलों के आसपास नालों में जमा गाद और कचरे से उठने वाली दुर्गंध आमजन, विशेषकर बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन रही है। इसे देखते हुए सभी प्रमुख नालों की सफाई को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। महापौर ने नालों की तल तक से गाद हटाने, कचरे के समुचित निष्पादन की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी कि सफाई कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान विद्यालय की छात्राओं ने महापौर से मुलाकात कर नाले से उत्पन्न खतरे से सुरक्षा के लिए उसके किनारे चहारदीवारी निर्माण की मांग रखी। साथ ही नाले के समीप खाली पड़ी जमीन को लघु वाटिका या पार्क के रूप में विकसित कर सौंदर्यीकरण करने का अनुरोध भी किया। इस पर महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने आश्वस्त किया कि छात्राओं की मांगों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा करने की पहल की जाएगी। उन्होंने कहा कि शहर को स्वच्छ और दुर्गंधमुक्त बनाने के लिए नगर निगम पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।1
- बेतिया सर्किट हाउस में खरवार समाज के लोगों ने जाति प्रमाण पत्र बनाने में आ रही परेशानियों को लेकर राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य राजू खरवार को आवेदन सौंपा। प्रतिनिधियों ने बताया कि कई अंचल कार्यालयों में अब भी प्रमाण पत्र बनाने से इनकार किया जा रहा है, जबकि सरकार ने सभी जरूरी कागजात के आधार पर प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। मीडिया से बातचीत में राजू खरवार ने कहा कि पिछले वर्ष बिहार सरकार द्वारा जारी निर्देश में केवल खतियान को अनिवार्य नहीं माना गया था, फिर भी जमीनी स्तर पर आदेश का पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लिखित शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। उनके आगमन पर समाजसेवियों ने फूल-माला पहनाकर स्वागत किया।1
- रविवार के दिन मझौलिया पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार 20 लीटर देशी चूलाई शराब के साथ एक शराब कारोबारी को किया गया गिरफ्तार।यह जानकारी पुलिस निरीक्षक सह थानाध्यक्ष अमर कुमार ने दी।उन्होंने बताया कि मझौलिया थाना कांड संख्या 386/26 के नामजद प्राथमिकी अभियुक्त अमर सहनी पिता स्व.मंगल सहनी साकिन माधोपुर मलाही टोला को मेडिकल जांच उपरांत न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।इस पुलिसिया कार्रवाई से शराब कारोबारियों में हड़कंप सा मच गया है।4
- दैनिक चलंत दरिद्र नारायण भोज3
- भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता बिहार का शिक्षा विभाग,'धनकुबेर' बने बैठे हैं कई जिला शिक्षा पदाधिकारी बिहार में शिक्षा विभाग की साख अब धीरे-धीरे धूमिल होती जा रही है और इसका हाल भी प्रदेश की पुलिस व्यवस्था जैसा होता दिख रहा है। हाल ही में सामने आ रहे विभिन्न मामलों और वीडियो ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के अधिकतर जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) की छवि अब एक 'रिश्वतखोर' अधिकारी के रूप में तब्दील होती जा रही है। यही वह मुख्य कारण है जिसकी वजह से निजी विद्यालयों के संचालकों के मन में विभाग का कोई खौफ नहीं बचा है। उन्हें भली-भांति ज्ञात है कि व्यवस्था की कुर्सी पर बैठे लोग बिकाऊ हैं, बस खरीदने वाला दिलदार होना चाहिए। शिक्षा विभाग के गलियारों में चर्चा आम है कि यदि बिहार के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों की संपत्ति की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो इनमें से अधिकतर अधिकारी 'धनकुबेर' से कम नहीं निकलेंगे। अकूत संपत्ति और भ्रष्टाचार के इस खेल ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को खोखला कर दिया है। सरकारी फाइलों को आगे बढ़ाने से लेकर निजी स्कूलों को एनओसी (NOC) देने तक, हर मेज के नीचे से रिश्वत का लेन-देन अब एक अघोषित नियम बन चुका है। *पश्चिम चंपारण का जिला मुख्यालय बेतिया भी इस काली सच्चाई से अछूता नहीं है। बेतिया जिला शिक्षा विभाग की स्थिति भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है*, *जहाँ पारदर्शिता का अभाव और अधिकारियों की मनमानी चरम पर है। स्थानीय स्तर पर भी विभाग की कार्यशैली को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने से इन अधिकारियों के हौसले बुलंद हैं*। यह वीडियो और बढ़ते भ्रष्टाचार के प्रमाण इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जब तक इन 'सफेदपोश धनकुबेरों' पर नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक बिहार की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की कल्पना करना बेमानी होगा। अब समय आ गया है कि सरकार इन अधिकारियों की संपत्तियों की जांच कराए ताकि जनता के सामने विभाग की असली तस्वीर साफ हो सके।1