न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर बुधवार को गोंडवाना समग्र बिछुआ के तत्वावधान में गुमतरा क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों ने बिछुआ तहसील कार्यालय पहुंचकर मध्य प्रदेश के राज्यपाल के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने थाना बिछुआ के अपराध क्रमांक 410/2025 की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की SIT/CID से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इस प्रकरण में पुलिस और विद्युत विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से साक्ष्यों से छेड़छाड़ की गई है और निर्दोषों को फंसाया जा रहा है, साथ ही एक सीएम हेल्पलाइन शिकायतकर्ता से मारपीट की गई। गोंडवाना समग्र बिछुआ के पदाधिकारियों ने ज्ञापन में बताया कि विशाल नल चालक था ही नहीं, उसने फरवरी 2025 में ही यह काम छोड़ दिया था। इसके बावजूद 2 सितंबर 2025 को योगेंद्र उर्फ बंटी देशमुख द्वारा अवैध रूप से तार फैलाए गए और विद्युत विभाग के लाइनमैन ने उसे ट्रांसफार्मर से जोड़ दिया। 12 सितंबर 2025 को हुई घटना के बाद खुद को बचाने के लिए बंटी देशमुख और विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने कनेक्शन से छेड़छाड़ कर महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट कर दिया। उन्होंने उपनिरीक्षक अजय सिंह सलाम और निरीक्षक सतीश उईके पर रिश्वत लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप लगाया। यह भी आरोप है कि अनपढ़ सरपंच विज्ञान बाई धुर्वे से जबरन हस्ताक्षर कराए गए और मेमोरेंडम में वास्तविक हस्ताक्षर नहीं हैं। सबसे बड़ा सवाल चालान पेश करने में हुए विलंब को लेकर उठाया गया, जहाँ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अनुसार 90 दिन में चालान पेश करना अनिवार्य है, लेकिन पुलिस ने 7 माह बाद निर्दोष व्यक्ति को आरोपी बनाकर चालान पेश किया। इस दौरान न्यायालय को विलंब का कोई कारण भी नहीं बताया गया। गोंडवाना समग्र का आरोप है कि इसी 7 माह के दौरान पुलिस साक्ष्यों को बदल रही थी और निजी स्वार्थ के लिए दबाव में काम कर रही थी। ज्ञापन में यह भी बताया गया कि विशाल ने जब सीएम हेल्पलाइन पर निष्पक्ष जांच की मांग की तो इसके विरोध में 14 फरवरी 2026 को रात 7 बजे उपनिरीक्षक अजय सिंह सलाम ने विशाल को घर से उठाकर पूरी रात थाने में अवैध हिरासत में रखा और प्रताड़ित किया। इसे संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन बताया गया है। गोंडवाना समग्र बिछुआ ने राज्यपाल से मांग की कि तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव रविन्द्र कुमार उईके को झूठा आरोपी बनाया गया है, क्योंकि वे 7 अगस्त 2025 को ही सेवानिवृत्त हो चुके थे, जबकि घटना 12 सितंबर 2025 को हुई। इसके अलावा, वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत निरस्त किए गए दावों की पुनः समीक्षा की जाए और वास्तविक दोषी बंटी देशमुख व विद्युत विभाग के अधिकारियों के खिलाफ सरपंच के माध्यम से FIR दर्ज की जाए। गोंडवाना समग्र बिछुआ के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिन के भीतर दोषियों पर कार्रवाई और SIT जांच के आदेश नहीं हुए तो संगठन उग्र आंदोलन करेगा। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग मौजूद रहे। एसडीएम ने ज्ञापन प्राप्त कर जांच कराकर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर बुधवार को गोंडवाना समग्र बिछुआ के तत्वावधान में गुमतरा क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों ने बिछुआ तहसील कार्यालय पहुंचकर मध्य प्रदेश के राज्यपाल के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने थाना बिछुआ के अपराध क्रमांक 410/2025 की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की SIT/CID से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इस प्रकरण में पुलिस और विद्युत विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से साक्ष्यों से छेड़छाड़ की गई है और निर्दोषों को फंसाया जा रहा है, साथ ही एक सीएम हेल्पलाइन शिकायतकर्ता से मारपीट की गई। गोंडवाना समग्र बिछुआ के पदाधिकारियों ने ज्ञापन में बताया कि विशाल नल चालक था ही नहीं, उसने फरवरी 2025 में ही यह काम छोड़ दिया था। इसके बावजूद 2 सितंबर 2025 को योगेंद्र उर्फ बंटी देशमुख द्वारा अवैध रूप से तार फैलाए गए और विद्युत विभाग के लाइनमैन ने उसे ट्रांसफार्मर से जोड़ दिया। 12 सितंबर 2025 को हुई घटना के बाद खुद को बचाने
के लिए बंटी देशमुख और विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने कनेक्शन से छेड़छाड़ कर महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट कर दिया। उन्होंने उपनिरीक्षक अजय सिंह सलाम और निरीक्षक सतीश उईके पर रिश्वत लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप लगाया। यह भी आरोप है कि अनपढ़ सरपंच विज्ञान बाई धुर्वे से जबरन हस्ताक्षर कराए गए और मेमोरेंडम में वास्तविक हस्ताक्षर नहीं हैं। सबसे बड़ा सवाल चालान पेश करने में हुए विलंब को लेकर उठाया गया, जहाँ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अनुसार 90 दिन में चालान पेश करना अनिवार्य है, लेकिन पुलिस ने 7 माह बाद निर्दोष व्यक्ति को आरोपी बनाकर चालान पेश किया। इस दौरान न्यायालय को विलंब का कोई कारण भी नहीं बताया गया। गोंडवाना समग्र का आरोप है कि इसी 7 माह के दौरान पुलिस साक्ष्यों को बदल रही थी और निजी स्वार्थ के लिए दबाव में काम कर रही थी। ज्ञापन में यह भी बताया गया कि विशाल ने जब सीएम हेल्पलाइन पर निष्पक्ष जांच की मांग की तो इसके विरोध में 14 फरवरी 2026 को
रात 7 बजे उपनिरीक्षक अजय सिंह सलाम ने विशाल को घर से उठाकर पूरी रात थाने में अवैध हिरासत में रखा और प्रताड़ित किया। इसे संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन बताया गया है। गोंडवाना समग्र बिछुआ ने राज्यपाल से मांग की कि तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव रविन्द्र कुमार उईके को झूठा आरोपी बनाया गया है, क्योंकि वे 7 अगस्त 2025 को ही सेवानिवृत्त हो चुके थे, जबकि घटना 12 सितंबर 2025 को हुई। इसके अलावा, वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत निरस्त किए गए दावों की पुनः समीक्षा की जाए और वास्तविक दोषी बंटी देशमुख व विद्युत विभाग के अधिकारियों के खिलाफ सरपंच के माध्यम से FIR दर्ज की जाए। गोंडवाना समग्र बिछुआ के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिन के भीतर दोषियों पर कार्रवाई और SIT जांच के आदेश नहीं हुए तो संगठन उग्र आंदोलन करेगा। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग मौजूद रहे। एसडीएम ने ज्ञापन प्राप्त कर जांच कराकर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
- न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर बुधवार को गोंडवाना समग्र बिछुआ के तत्वावधान में गुमतरा क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों ने बिछुआ तहसील कार्यालय पहुंचकर मध्य प्रदेश के राज्यपाल के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने थाना बिछुआ के अपराध क्रमांक 410/2025 की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की SIT/CID से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इस प्रकरण में पुलिस और विद्युत विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से साक्ष्यों से छेड़छाड़ की गई है और निर्दोषों को फंसाया जा रहा है, साथ ही एक सीएम हेल्पलाइन शिकायतकर्ता से मारपीट की गई। गोंडवाना समग्र बिछुआ के पदाधिकारियों ने ज्ञापन में बताया कि विशाल नल चालक था ही नहीं, उसने फरवरी 2025 में ही यह काम छोड़ दिया था। इसके बावजूद 2 सितंबर 2025 को योगेंद्र उर्फ बंटी देशमुख द्वारा अवैध रूप से तार फैलाए गए और विद्युत विभाग के लाइनमैन ने उसे ट्रांसफार्मर से जोड़ दिया। 12 सितंबर 2025 को हुई घटना के बाद खुद को बचाने के लिए बंटी देशमुख और विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने कनेक्शन से छेड़छाड़ कर महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट कर दिया। उन्होंने उपनिरीक्षक अजय सिंह सलाम और निरीक्षक सतीश उईके पर रिश्वत लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप लगाया। यह भी आरोप है कि अनपढ़ सरपंच विज्ञान बाई धुर्वे से जबरन हस्ताक्षर कराए गए और मेमोरेंडम में वास्तविक हस्ताक्षर नहीं हैं। सबसे बड़ा सवाल चालान पेश करने में हुए विलंब को लेकर उठाया गया, जहाँ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अनुसार 90 दिन में चालान पेश करना अनिवार्य है, लेकिन पुलिस ने 7 माह बाद निर्दोष व्यक्ति को आरोपी बनाकर चालान पेश किया। इस दौरान न्यायालय को विलंब का कोई कारण भी नहीं बताया गया। गोंडवाना समग्र का आरोप है कि इसी 7 माह के दौरान पुलिस साक्ष्यों को बदल रही थी और निजी स्वार्थ के लिए दबाव में काम कर रही थी। ज्ञापन में यह भी बताया गया कि विशाल ने जब सीएम हेल्पलाइन पर निष्पक्ष जांच की मांग की तो इसके विरोध में 14 फरवरी 2026 को रात 7 बजे उपनिरीक्षक अजय सिंह सलाम ने विशाल को घर से उठाकर पूरी रात थाने में अवैध हिरासत में रखा और प्रताड़ित किया। इसे संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन बताया गया है। गोंडवाना समग्र बिछुआ ने राज्यपाल से मांग की कि तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव रविन्द्र कुमार उईके को झूठा आरोपी बनाया गया है, क्योंकि वे 7 अगस्त 2025 को ही सेवानिवृत्त हो चुके थे, जबकि घटना 12 सितंबर 2025 को हुई। इसके अलावा, वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत निरस्त किए गए दावों की पुनः समीक्षा की जाए और वास्तविक दोषी बंटी देशमुख व विद्युत विभाग के अधिकारियों के खिलाफ सरपंच के माध्यम से FIR दर्ज की जाए। गोंडवाना समग्र बिछुआ के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिन के भीतर दोषियों पर कार्रवाई और SIT जांच के आदेश नहीं हुए तो संगठन उग्र आंदोलन करेगा। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग मौजूद रहे। एसडीएम ने ज्ञापन प्राप्त कर जांच कराकर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।3
- आज मंगलवार को छिंदवाड़ा कलेक्टर हरेंद्र नारायन ने कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित जनसुनवाई में शहरी, ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों से आए आवेदकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। दोपहर 12 बजे शुरू हुई इस जनसुनवाई में, आवेदकों ने ज़मीन के सीमांकन, नक्शा दुरूस्त करने, अतिक्रमण हटाने, नाला गहरीकरण, प्रधानमंत्री आवास योजना, बिजली-पानी और सामाजिक सहायता जैसी विभिन्न शिकायतें रखीं। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को इन सभी मामलों के त्वरित निवारण के निर्देश दिए। उन्होंने कई प्रकरणों को तत्काल नोट कर उनके समाधान का आदेश दिया, जबकि कुछ मामलों को समयसीमा समीक्षा के लिए चिह्नित किया ताकि उनका भी शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जा सके।1
- आशा कार्यकर्ताओं और आशा पर्यवेक्षकों ने मिलकर मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन प्रस्तुत किया है। इस ज्ञापन में उन्होंने अपनी 18 सूत्रीय मांगों को विस्तार से उल्लेखित किया है।1
- बादलपार स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में बाउंड्री वॉल बनाने की मांग की जा रही है। मंदिर परिसर में बाउंड्री वॉल नहीं होने के कारण आवारा जानवरों का आतंक बढ़ गया है, जिसके चलते वहां लगे पेड़-पौधे नष्ट हो रहे हैं। इस समस्या के समाधान और परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जल्द से जल्द बाउंड्री वॉल के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।2
- छिंदवाड़ा जिले के पांढुर्णा में एक अज्ञात व्यक्ति को आज बीएसएनएल टावर से नीचे उतारा गया। यह व्यक्ति बीते तीन दिनों से टावर पर चढ़ा हुआ था। इंडिया NDRF की टीम और पुलिस प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से उसे टावर के ऊपर से सुरक्षित नीचे उतारा जा सका।1
- पांढुर्णा में एक चिंताजनक घटना सामने आई है, जहाँ पिछले तीन दिनों से एक अज्ञात युवक बीएसएनएल टावर पर चढ़ा हुआ है। प्रशासन इतने लंबे समय के बाद भी उसे नीचे उतारने में पूरी तरह से असमर्थ रहा है, जिससे उसकी बेबसी साफ झलक रही है। लगभग 50 वर्ष का यह अज्ञात व्यक्ति बिना कुछ खाए-पिए लगातार टावर पर ही अपनी जान जोखिम में डालकर बैठा है। इस पूरे मामले में पांढुर्णा का प्रशासन नतमस्तक दिखाई दे रहा है और तीन दिन बीत जाने के बावजूद भी व्यक्ति को सुरक्षित नीचे नहीं उतारा जा सका है।1
- पांढुर्णा के आस्था के प्रमुख केंद्र हनुमान लोक जाम सावली में मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचे। प्रातःकालीन आरती के दौरान मंदिर परिसर भक्तों की श्रद्धा और जयकारों से गूँज उठा। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने चमत्कारी श्री हनुमान मंदिर में माथा टेककर पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की, और आरती में शामिल होकर एक आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया। उल्लेखनीय है कि हनुमान लोक जाम सावली में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को यहाँ भक्तों की अधिक भीड़ देखने को मिलती है।1
- छिंदवाड़ा जिले के बिछुआ विकासखंड के ग्राम खमरा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत निर्मित मार्ग आज गड्ढों और पानी के तालाब में तब्दील हो गया है। इस मार्ग की मौजूदा स्थिति को देखकर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर गड्ढे में रोड है या रोड में गड्ढा, और पानी में रोड है या रोड में पानी। यह समस्या विशेष रूप से खमरा से किशनपुर, डोला-पांजरा मार्ग पर केंद्रित है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क का निर्माण तो ठेकेदार द्वारा कर दिया गया, लेकिन पानी की उचित निकासी के लिए नालियों का निर्माण नहीं कराया गया। इसी के चलते हल्की बारिश में भी सड़क पर लगभग एक-एक फीट पानी भर जाता है, जिससे सड़क जगह-जगह से जर्जर होकर उखड़ गई है। इस बदहाल सड़क से रोजाना मिडिल स्कूल, हाई स्कूल और छात्रावास के सैकड़ों स्कूली बच्चे आते-जाते हैं। सड़क पर भरे गंदे पानी और कीचड़ के कारण जब भी कोई वाहन गुजरता है, तो पानी उछलकर बच्चों की ड्रेस खराब कर देता है, जिससे कई बार उन्हें वापस घर लौटना पड़ता है और उनकी पढ़ाई भी लगातार प्रभावित हो रही है। इसके अलावा, पानी में गड्ढों की गहराई का अंदाजा न लगने के कारण कई बाइक और अन्य वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं, जिससे हादसे अब आम बात हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार की इस घोर लापरवाही के कारण आम जनता को प्रतिदिन परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शर्म की बात यह भी है कि यह सड़क पर्यटन मार्ग भी है, जिससे पर्यटक कर्माझिरी और जमतरा की ओर जाते हैं। सरकारी कर्मचारी और नेता भी इसी मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन किसी ने भी सड़क पर बने गड्ढों और जलभराव की ओर ध्यान नहीं दिया है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि सड़क निर्माण के समय गुणवत्ता मानकों का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया। नालियों के अभाव में पानी की निकासी न होने से सड़क धीरे-धीरे पूरी तरह से खत्म हो रही है। उन्होंने शासन-प्रशासन से तत्काल मांग की है कि इस PMGSY सड़क की मरम्मत कराई जाए, सड़क के दोनों ओर पानी निकासी के लिए नाली बनाई जाए, और ठेकेदार की लापरवाही की विस्तृत जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।1