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स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी के दिव्य स्तंभ का लोकार्पण कार्यक्रम श्रद्धा एवं गरिमामय रूप से हुआ सम्पन्न
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स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी के दिव्य स्तंभ का लोकार्पण कार्यक्रम श्रद्धा एवं गरिमामय रूप से हुआ सम्पन्न
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- स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी के दिव्य स्तंभ का लोकार्पण कार्यक्रम श्रद्धा एवं गरिमामय रूप से हुआ सम्पन्न1
- घंसौर थाना क्षेत्र के छीतापार गांव में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां अज्ञात कारणों के चलते 13 वर्षीय नाबालिग बालक ने अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि मृतक बालक कक्षा छठवीं का छात्र था। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई शुरू कर दी है। फिलहाल आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल सका है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।1
- स्वदेश समाचार साईखेड़ा। लगभग 50 से 60 गांवों की स्वास्थ्य जरूरतों का मुख्य केंद्र स्वामी विवेकानंद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र साईखेड़ा इन दिनों डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। प्रतिदिन करीब 150 से 200 मरीज इलाज की उम्मीद लेकर यहां पहुंचते हैं, लेकिन मूलभूत व्यवस्थाओं के अभाव में उन्हें पर्याप्त स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पा रहा है और मजबूरन गाडरवारा, नरसिंहपुर व जबलपुर का रुख करना पड़ता है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि इतने बड़े सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जहां तीन डॉक्टरों की नियुक्ति होना चाहिए थी वहां एक भी एमबीबीएस डॉक्टर पदस्थ नहीं है। आयुष चिकित्सक का पद भी रिक्त है। नियमानुसार यहां आठ स्टाफ नर्स होना चाहिए, जबकि वर्तमान में केवल तीन ही नर्स कार्यरत हैं। दो लैब टेक्नीशियन के स्थान पर एक, दो ड्रेसर के स्थान पर एक और दो फार्मासिस्ट के स्थान पर एक ही कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहा है। चार वार्ड बॉय के स्वीकृत पदों में से केवल दो ही उपलब्ध हैं, जिससे अस्पताल की व्यवस्थाएं पूरी तरह प्रभावित हो रही हैं। आपातकालीन सेवाओं की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है। दुर्घटना के मामलों में मरीजों को तत्काल रेफर कर दिया जाता है। पोस्टमार्टम के लिए आने वाले मामलों में भी मरीजों को गाडरवारा भेजना पड़ता है या वहां से डॉक्टर के आने का इंतजार करना पड़ता है। वहीं विडंबना यह भी है कि पूर्व विधायक सुनीता पटेल द्वारा जनहित में अस्पताल को एक एंबुलेंस प्रदान की गई थी, जो वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में खड़ी है। लेकिन ड्राइवर की नियुक्ति न होने के कारण एंबुलेंस का उपयोग नहीं हो पा रहा है और वह धीरे-धीरे कबाड़ की स्थिति में पहुंचने लगी है। इससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों को तत्काल परिवहन सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। मौसम परिवर्तन के चलते वायरल फीवर, सर्दी-खांसी, बुखार, डेंगू और मलेरिया जैसे रोगों के बढ़ते मामलों के बीच अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बावजूद इसके स्टाफ की कमी जनमानस के लिए गंभीर समस्या बनी हुई है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से शीघ्र पर्याप्त डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों व एंबुलेंस चालक की नियुक्ति कर स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने की मांग की है, ताकि ग्रामीण अंचल की जनता को समय पर बेहतर उपचार मिल सके।3
- युवा संसद के दौरान वक्तव्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया उसके उपरांत प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इससे युवाओं को आगे आने का मौका मिलेगा1
- नरसिंहपुर जिले के समीपवर्ती क्षेत्र करेली के पास हुए एक भीषण सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज, जबलपुर रेफर किया गया, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल तब खुल गई जब घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें एंबुलेंस नसीब नहीं हुई।और घण्टो एम्बुलेंस का जिला अस्पताल के बाहर बरामदे में बैठकर इंतजार करते रहे वही घटना में घायल नारायण और उसकी पत्नी की आर्थिक स्थिति भी ठीक नही हैं की वह प्राइवेट एम्बुलेंस से जा पाए और ऐसी स्थिति में 108 एम्बुलेंस न मिलने पर उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं। वह जबलपुर मेडिकल कॉलेज जाने के लिए 108 एम्बुलेंस की प्रतीक्षा में बैठे है।वही उन्हें कोई दूसरी मदद प्रशासन के द्वारा नही मिल पा रही हैं।1
- यातायात पुलिस ने बुलेट के मॉडिफाइड साइलेंसर और काली फिल्म पर वसूला जुर्माना नरसिंहपुर। जिले में सड़क सुरक्षा और ध्वनि प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा के निर्देशन में यातायात पुलिस ने विशेष चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले चार पहिया और दो पहिया वाहनों के खिलाफ सख्त चालानी कार्रवाई की गई।वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में हुई कार्रवाई यह विशेष अभियान थाना प्रभारी ममता तिवारी और एएसआई सुरेश पटेल के नेतृत्व में चलाया गया। टीम ने शहर के मुख्य चौराहों पर घेराबंदी कर वाहनों की सघन चेकिंग की। बुलेट के साइलेंसर पर भारी जुर्माना चेकिंग के दौरान 4 बुलेट मोटरसाइकिलों को रोका गया, जिनमें कंपनी के साइलेंसर की जगह तेज आवाज करने वाले 'मॉडिफाइड साइलेंसर' लगे थे। इन पर कुल 4,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। वही यातायात पुलिस ने काली फिल्म पर शिकंजा है नियमों के विरुद्ध चार पहिया वाहन के शीशों पर काली फिल्म लगाकर घूमने वाले चालक पर भी कार्रवाई की गई, जिससे 500 रुपये का समन शुल्क वसूला गया। यातायात थाना प्रभारी ममता तिवारी ने वाहन चालकों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि वाहनों में किसी भी प्रकार का अवैध मॉडिफिकेशन न कराएं। तेज आवाज वाले साइलेंसर से न केवल आम जनता को परेशानी होती है, बल्कि यह कानूनन अपराध भी है। पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा के निर्देशों के तहत यह अभियान भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगा।3
- नरसिंहपुर। जिले के ग्राम नक्टुआ में आज सुबह एक हृदयविदारक हादसा हो गया, जहाँ रेलवे ट्रैक पार करते समय एक व्यक्ति ट्रेन की चपेट में आ गया। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इस घटना ने एक बार फिर रेलवे लाइन के किनारे फल-फूल रहे अवैध शराब के कारोबार और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर दिया है। हादसे का विवरण प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान हजरतगंज कसाई मंडी निवासी के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सुबह करीब 10:30 बजे वह व्यक्ति रेलवे लाइन पार कर रहा था, तभी वह ट्रेन की चपेट में आ गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वह गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों की मदद से उसे तुरंत अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन घावों के ताव न सहते हुए रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। नशे की हालत में था मृतक? मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि व्यक्ति अत्यधिक नशे की हालत में था और लड़खड़ाते हुए पटरी पार कर रहा था। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मृतक इसी क्षेत्र से शराब पीकर लौट रहा था, जिसके कारण वह ट्रेन की आहट नहीं सुन सका और हादसे का शिकार हो गया। अवैध शराब का गढ़ बना नक्टुआ रेलवे ट्रैक स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि नक्टुआ में रेलवे लाइन के किनारे अवैध कच्ची शराब बनाने और बेचने का काला धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। लगातार होते हादसे: यह पहली बार नहीं है जब यहाँ ऐसा हादसा हुआ हो; शराब के कारण यहाँ पहले भी कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। विभागों की चुप्पी: ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि रेलवे प्रशासन और आबकारी विभाग सब कुछ जानते हुए भी मूकदर्शक बने हुए हैं। अवैध अड्डों पर कार्रवाई न होना मिलीभगत की ओर इशारा करता है। "यहाँ पटरी के किनारे ही शराब की भट्ठियां सुलगती हैं। लोग नशा करके ट्रैक पर आ जाते हैं, जिससे आए दिन मौतें हो रही हैं। प्रशासन की चुप्पी किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही है।" — ग्रामीण निष्कर्ष: इस घटना ने एक परिवार को तो उजाड़ा ही है, साथ ही सिस्टम की खामियों को भी बेनकाब कर दिया है। अब देखना यह है कि क्या इस मौत के बाद आबकारी विभाग और रेलवे पुलिस नींद से जागते हैं या अवैध शराब का यह खूनी खेल यूँ ही जारी रहेगा।1
- L&T की लापरवाही से 160 गांव 48 घंटे से बूंद-बूंद को तरस रहे ग्रामीण नदी-नालों का गंदा पानी पीने को मजबूर हुए ग्रामीण1