ताला–पनपथा मार्ग पर थमा पहिया, घंटों बाद खुला जाम; हाइवा खराब होने से 100 से ज्यादा वाहन फंसे ताला–पनपथा मार्ग पर थमा पहिया, घंटों बाद खुला जाम; हाइवा खराब होने से 100 से ज्यादा वाहन फंसे उमरिया तपस गुप्ता (7999276090) जिले के ताला–पनपथा सड़क मार्ग (SH-10) पर रविवार सुबह उस वक्त हालात बिगड़ गए, जब पतौर गांव के आगे एक हाइवा बीच सड़क पर अचानक खराब हो गया। यह मार्ग पहले से ही सिंगल लेन है और किनारों की पटरी भी अधूरी पड़ी है, ऐसे में भारी वाहन के खराब होते ही दोनों ओर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। घटना के बाद देखते ही देखते सड़क के दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई। करीब 100 से अधिक छोटे-बड़े वाहन जाम में फंस गए। मौके पर तत्काल कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण स्थिति और गंभीर होती चली गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि समय रहते ट्रैफिक डायवर्ट किया जाता तो हालात इतने खराब नहीं होते। जाम में फंसे लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी भीषण गर्मी ने दी। तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार था, जिससे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं खासतौर पर परेशान दिखे। कई लोग पानी के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए, जबकि कुछ लोग गर्मी से बचने के लिए सड़क किनारे जंगल की ओर जाकर पेड़ों की छांव में बैठने को मजबूर हो गए। यह इलाका वन क्षेत्र से सटा हुआ है, ऐसे में लोगों का जंगल की ओर जाना जोखिम भरा भी साबित हो सकता था। जंगली जानवरों की आशंका के बावजूद लोग राहत के लिए वहां जाने को मजबूर दिखे। हैरानी की बात यह रही कि फॉरेस्ट चौकी नजदीक होने के बावजूद मौके पर न तो वन विभाग का अमला सक्रिय नजर आया और न ही पुलिस की कोई त्वरित व्यवस्था दिखी। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें लंबा जाम और लोगों की परेशानी साफ देखी जा सकती है। वीडियो में वाहन चालकों और यात्रियों की बेबसी भी सामने आई। हालांकि, बाद में खराब हाइवा को हटाने के बाद धीरे-धीरे यातायात बहाल किया गया। इस संबंध में मानपुर थाना प्रभारी मुकेश मस्कुले ने बताया कि वाहन के ब्रेकडाउन के कारण जाम की स्थिति बनी थी, जिसे अब पूरी तरह साफ कर दिया गया है और मार्ग पर आवागमन सामान्य हो चुका है। इस घटना ने एक बार फिर सड़क की बदहाल व्यवस्था और आपात स्थिति में प्रशासनिक तैयारी की कमी को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस मार्ग को जल्द चौड़ा किया जाए और ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए, ताकि भविष्य में लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
ताला–पनपथा मार्ग पर थमा पहिया, घंटों बाद खुला जाम; हाइवा खराब होने से 100 से ज्यादा वाहन फंसे ताला–पनपथा मार्ग पर थमा पहिया, घंटों बाद खुला जाम; हाइवा खराब होने से 100 से ज्यादा वाहन फंसे उमरिया तपस गुप्ता (7999276090) जिले के ताला–पनपथा सड़क मार्ग (SH-10) पर रविवार सुबह उस वक्त हालात बिगड़ गए, जब पतौर गांव के आगे एक हाइवा बीच सड़क पर अचानक खराब हो गया। यह मार्ग पहले से ही सिंगल लेन है और किनारों की पटरी भी अधूरी पड़ी है, ऐसे में भारी वाहन के खराब होते ही दोनों ओर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। घटना के बाद देखते ही देखते सड़क के दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई। करीब 100 से अधिक छोटे-बड़े वाहन जाम में फंस गए। मौके पर तत्काल कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण स्थिति और गंभीर होती चली गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि समय रहते ट्रैफिक डायवर्ट किया जाता तो हालात इतने खराब नहीं होते। जाम में फंसे लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी भीषण गर्मी ने दी। तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार था, जिससे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं खासतौर पर परेशान दिखे। कई लोग पानी के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए, जबकि कुछ लोग गर्मी से बचने के लिए सड़क किनारे जंगल की ओर जाकर पेड़ों की छांव में बैठने को मजबूर हो गए। यह इलाका वन क्षेत्र से सटा हुआ है, ऐसे में लोगों का जंगल की ओर जाना जोखिम भरा भी साबित हो सकता था। जंगली जानवरों की आशंका के बावजूद लोग राहत के लिए वहां जाने को मजबूर दिखे। हैरानी की बात यह रही कि फॉरेस्ट चौकी नजदीक होने के बावजूद मौके पर न तो वन विभाग का अमला सक्रिय नजर आया और न ही पुलिस की कोई त्वरित व्यवस्था दिखी। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें लंबा जाम और लोगों की परेशानी साफ देखी जा सकती है। वीडियो में वाहन चालकों और यात्रियों की बेबसी भी सामने आई। हालांकि, बाद में खराब हाइवा को हटाने के बाद धीरे-धीरे यातायात बहाल किया गया। इस संबंध में मानपुर थाना प्रभारी मुकेश मस्कुले ने बताया कि वाहन के ब्रेकडाउन के कारण जाम की स्थिति बनी थी, जिसे अब पूरी तरह साफ कर दिया गया है और मार्ग पर आवागमन सामान्य हो चुका है। इस घटना ने एक बार फिर सड़क की बदहाल व्यवस्था और आपात स्थिति में प्रशासनिक तैयारी की कमी को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस मार्ग को जल्द चौड़ा किया जाए और ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए, ताकि भविष्य में लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
- ताला–पनपथा मार्ग पर थमा पहिया, घंटों बाद खुला जाम; हाइवा खराब होने से 100 से ज्यादा वाहन फंसे उमरिया तपस गुप्ता (7999276090) जिले के ताला–पनपथा सड़क मार्ग (SH-10) पर रविवार सुबह उस वक्त हालात बिगड़ गए, जब पतौर गांव के आगे एक हाइवा बीच सड़क पर अचानक खराब हो गया। यह मार्ग पहले से ही सिंगल लेन है और किनारों की पटरी भी अधूरी पड़ी है, ऐसे में भारी वाहन के खराब होते ही दोनों ओर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। घटना के बाद देखते ही देखते सड़क के दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई। करीब 100 से अधिक छोटे-बड़े वाहन जाम में फंस गए। मौके पर तत्काल कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण स्थिति और गंभीर होती चली गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि समय रहते ट्रैफिक डायवर्ट किया जाता तो हालात इतने खराब नहीं होते। जाम में फंसे लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी भीषण गर्मी ने दी। तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार था, जिससे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं खासतौर पर परेशान दिखे। कई लोग पानी के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए, जबकि कुछ लोग गर्मी से बचने के लिए सड़क किनारे जंगल की ओर जाकर पेड़ों की छांव में बैठने को मजबूर हो गए। यह इलाका वन क्षेत्र से सटा हुआ है, ऐसे में लोगों का जंगल की ओर जाना जोखिम भरा भी साबित हो सकता था। जंगली जानवरों की आशंका के बावजूद लोग राहत के लिए वहां जाने को मजबूर दिखे। हैरानी की बात यह रही कि फॉरेस्ट चौकी नजदीक होने के बावजूद मौके पर न तो वन विभाग का अमला सक्रिय नजर आया और न ही पुलिस की कोई त्वरित व्यवस्था दिखी। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें लंबा जाम और लोगों की परेशानी साफ देखी जा सकती है। वीडियो में वाहन चालकों और यात्रियों की बेबसी भी सामने आई। हालांकि, बाद में खराब हाइवा को हटाने के बाद धीरे-धीरे यातायात बहाल किया गया। इस संबंध में मानपुर थाना प्रभारी मुकेश मस्कुले ने बताया कि वाहन के ब्रेकडाउन के कारण जाम की स्थिति बनी थी, जिसे अब पूरी तरह साफ कर दिया गया है और मार्ग पर आवागमन सामान्य हो चुका है। इस घटना ने एक बार फिर सड़क की बदहाल व्यवस्था और आपात स्थिति में प्रशासनिक तैयारी की कमी को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस मार्ग को जल्द चौड़ा किया जाए और ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए, ताकि भविष्य में लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।1
- ब्रेकिंग न्यूज़ : उमरिया बांधवगढ़ रोड पर लगा जाम, कई घंटे तक लगा जाम,1
- *स्टेशन चौराहे पर पुलिस के CCTV कंट्रोल सिस्टम को गुमटी ने ढका, सुरक्षा पर उठे सवाल* उमरिया //नगर मुख्यालय के व्यस्त स्टेशन चौराहे पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहां पुलिस विभाग द्वारा शहर की निगरानी के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरों का मुख्य कंट्रोल सिस्टम स्थापित है, लेकिन एक गुमटी संचालक ने अपनी दुकान के जरिए इस सिस्टम को ढक दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे न केवल निगरानी व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि सिस्टम को नुकसान पहुंचने की भी आशंका बनी हुई है। मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की जा चुकी है, बावजूद इसके अब तक गुमटी हटाने या कार्रवाई को लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब सुरक्षा के अहम उपकरण ही सुरक्षित नहीं हैं, तो शहर की निगरानी कैसे प्रभावी होगी। अब देखना होगा कि प्रशासन इस लापरवाही पर कब तक कार्रवाई करता है।1
- शॉर्ट न्यूज़ (वायरल वीडियो): ताला–पनपथा मार्ग पर एक हाइवा के अचानक ब्रेकडाउन होने से सिंगल रोड पर करीब 4 घंटे लंबा जाम लग गया। भीषण 42°C की गर्मी में फंसे हजारों लोग पानी के लिए जंगल की ओर भटकते नजर आए। अधूरी सड़क पटरी और संकरे रास्ते ने हालात और बिगाड़ दिए। मौके पर जिम्मेदारों की गैरमौजूदगी ने लोगों का गुस्सा बढ़ा दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें लोग प्रशासन से जवाब मांगते दिख रहे हैं।1
- *ताला–पनपथा मार्ग पर 4 घंटे से ठप रफ्तार: हाइवा ब्रेकडाउन बना वजह, लापरवाही ने बढ़ाया संकट* *(आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी-उमरिया)* ताला–पनपथा मार्ग पर रविवार सुबह 8 बजे से लगा जाम दोपहर 12:30 बजे तक भी नहीं खुल पाया। एक हाइवा के बीच सड़क खराब होने से शुरू हुई समस्या, सिंगल रोड और अधूरी पटरी के कारण विकराल रूप लेती गई। लेकिन सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक उदासीनता पर खड़ा हो रहा है। मौके पर न तो पुलिस की सक्रिय मौजूदगी दिखी, न ही वन विभाग का कोई अमला। नतीजा—हजारों की संख्या में फंसे लोग 42 डिग्री की झुलसाती गर्मी में बेहाल रहे। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं पानी के लिए तरसते नजर आए, कई लोग मजबूरी में जंगल की ओर भटकते दिखे और पेड़ों की छांव में बैठकर राहत तलाशते रहे। स्थिति और चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि यह पूरा इलाका वन क्षेत्र से सटा हुआ है। ऐसे में जाम में फंसे लोगों का जंगल की ओर जाना, जंगली जानवरों के खतरे को भी बढ़ा रहा है। इसके बावजूद वन विभाग की निष्क्रियता गंभीर सवाल खड़े करती है। सबसे तीखा सवाल यहीं से उठता है—चार घंटे से ज्यादा समय तक जाम लगा रहा, लेकिन जिम्मेदार महकमा मौके से गायब क्यों रहा? क्या आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई पूर्व योजना नहीं? एक सामान्य ब्रेकडाउन ने पूरे सिस्टम की तैयारी की पोल खोल दी। यह सिर्फ चूक नहीं, बल्कि संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। जब हालात इतने बिगड़ जाएं कि लोग पानी के लिए जंगल की ओर भटकने लगें, और फिर भी प्रशासन हरकत में न आए—तो यह सीधे-सीधे जवाबदेही का मुद्दा बनता है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इस लापरवाही पर कोई ठोस कार्रवाई करते हैं या फिर हर बार की तरह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।1
- *डिंडौरी ब्यूरो नीरज रजक* *🔸 जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री, सहायक यंत्री, अनुविभागीय अधिकारी, उपयंत्री ने जैविक खेती के लिए प्रसिद्ध नर्मदांचल गौ सेवा समिति का किया भ्रमण* *➡️ जैव आदान संसाधन केन्द्र बीआरसी के माध्यम से गौवंश आधारित प्राकृतिक खेती से भूमि पर्यावरण व स्वास्थ्य मे होगा सुधार : जैविक कृषि विशेषज्ञ बिहारी लाल साहू* खेती किसानी डिण्डौरी जिले में जैविक खेती का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करना हो तो नर्मदांचल गौ सेवा समिति व बी आर सी केन्द्र ढोंढ़ा पहुँचना अनिवार्य हो जाता है। यह समिति जिले के प्रसिद्ध जैविक कृषि विशेषज्ञ श्री बिहारी लाल साहू द्वारा संचालित है, जो विगत 10 वर्षों से जैविक खेती के क्षेत्र में सक्रिय कार्य कर रहे हैं। श्री साहू न केवल स्वयं जैविक खेती कर रहे हैं, बल्कि जिले एवं आसपास के क्षेत्रों के किसान भाइयों को जैविक खेती अपनाने के लिए निरंतर प्रशिक्षण भी प्रदान कर रहे हैं। वे किसानों के साथ-साथ महाविद्यालयों, विद्यालयों, शासकीय संस्थानों एवं एनजीओ के माध्यम से डिंडौरी सहित अन्य जिलों में जैविक खेती के प्रति जन जागरूकता फैलाने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, उनके फार्म हाउस में जैविक खेती का लाइव डेमो भी प्रदर्शित किया जाता है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने किया जैविक फार्म हाउस,प्रयोगशाला का निरीक्षण हाल ही में WRD जल संसाधन विभाग के EE कार्यपालन यंत्री श्री एस के शर्मा जी, AE सहायक यंत्री श्री अमित उइके जी, SDO अनुविभागीय अधिकारी श्री सी बी ठावरे जी, SE उपयंत्री श्री हर्षित भोज जी ने नर्मदांचल गौ सेवा केन्द्र, ढोंढ़ा में संचालित जैविक फार्म हाउस का भ्रमण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने केंचुआ खाद, वर्मीवाश, जीवामृत यूनिट, बायोडाइजेस्टर यूनिट अग्नि अस्त्र, बीज उपचार, प्रयोगशाला सहित जैविक कृषि से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी ली। साथ ही जैविक फार्म में उगाई जा रही सब्जियाँ, फसलों का अवलोकन कर सराहना की। जैविक खेती से सुरक्षित स्वास्थ्य और उपजाऊ भूमि जंगल के पेड़ को यूरिया कौन देता है कीटनाशक का छिड़काव कौन करता है उन्हें पानी कौन देता है लेकिन जब समय आता है तब पेड़ फल से लद जाते है जंगल के पेड़ के किसी भी पत्ते को तोड़ लीजिए और लैव में टेस्ट करा लीजिए एक भी तत्व की कमी नहीं मिलती जंगल में जो नियम काम करता है, वही हमारे खेत में करना चाहिए और यही है प्राकृतिक कृषि और प्राकृतिक कृषि का सिध्दांत। इस अवसर पर जैविक कृषि विशेषज्ञ बिहारी लाल साहू ने बताया कि जैविक उत्पाद मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं तथा रासायनिक मुक्त खेती मिट्टी की उर्वरता एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए भी आवश्यक है। जैविक खेती से किसानों की लागत कम होती है और उपज की गुणवत्ता बेहतर होती है। कार्यक्रम में श्री बिहारी लाल साहू, आयुष साहू सहित अन्य जन उपस्थित रहे।1
- *शहडोल_ भाई ने भाई की लोहे की रॉड से मार कर की हत्या खाना खाने को लेकर दोनों भाइयों के बीच हुआ था विवाद.. खैरहा थाना क्षेत्र अंतर्गत पूरी घटना....*1
- उमरिया। जिला मुख्यालय में बाल श्रम का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन और श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में छोटे बच्चों को भारी सामान ट्रक में लोड करते हुए देखा जा सकता है। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो पाली रोड स्थित मंसूरी ट्रेडर्स, अब्दुल कबाड़ी का है। वीडियो के सामने आने के बाद शहर में चर्चा तेज हो गई है। लोग इसे न सिर्फ अमानवीय बता रहे हैं, बल्कि कानून का खुला उल्लंघन भी मान रहे हैं। भारत में बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से इस तरह का काम करवाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद खुलेआम बच्चों से मजदूरी करवाई जा रही है, जो जिम्मेदार विभागों की लापरवाही को उजागर करता है। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात लेबर इंस्पेक्टर यश दत्त त्रिपाठी का बयान है। जब उनसे इस वायरल वीडियो को लेकर बात की गई, तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उनका यह जवाब अब सवालों के घेरे में है। जब मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, तो जिम्मेदार अधिकारी अनजान कैसे रह सकते हैं? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब शहर में बाल श्रम के मामले सामने आए हों। पहले भी ऐसे आरोप लगते रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर ठोस कदम कम ही देखने को मिले हैं। अब यह वीडियो एक बार फिर पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है। चाइल्डलाइन, पुलिस और श्रम विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कानून होने के बावजूद यदि बच्चों से इस तरह काम लिया जा रहा है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि निगरानी और कार्रवाई में कहीं न कहीं बड़ी चूक हो रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस वायरल वीडियो के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा। फिलहाल, इस घटना ने बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है।1