*सरकारी बंजर भूमि पर वर्षों से अवैध कब्जा, तहसील के आदेश ठंडे बस्ते में — प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल* कौशांबी। जनपद कौशांबी की सिराथू तहसील एक बार फिर सवालों के घेरे में है। तहसील क्षेत्र के ग्राम कशिया पश्चिम, परगना कड़ा में सरकारी बंजर भूमि पर करीब ढाई दशक से अवैध कब्जा चला आ रहा है, जबकि इस संबंध में तहसील स्तर से पारित आदेशों का आज तक अनुपालन नहीं कराया गया। ग्राम निवासी चंद्रशंकर पुत्र शीतला प्रसाद साहू ने जिलाधिकारी कौशांबी को शिकायती प्रार्थना-पत्र देकर प्रशासनिक लापरवाही की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है। प्रार्थना-पत्र के अनुसार आराजी संख्या 1283M, जो राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट रूप से सरकारी बंजर भूमि के रूप में दर्ज है, उस पर रामप्रसाद पुत्र छोटेलाल द्वारा वर्ष 2001 से अवैध रूप से कब्जा कर पक्का मकान और दीवार का निर्माण कर लिया गया है। हैरानी की बात यह है कि मामला संज्ञान में आने के बाद तहसीलदार सिराथू द्वारा उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 67 के अंतर्गत 10 अक्टूबर 2018 और 15 दिसंबर 2018 को अवैध कब्जा हटाने के स्पष्ट आदेश पारित किए गए थे, लेकिन लगभग सात वर्ष बीत जाने के बावजूद न तो कब्जा हटाया गया और न ही सरकारी भूमि को मुक्त कराया गया। इससे बड़ा सवाल यह है कि जब तहसील स्तर से आदेश पारित हो चुके थे, तो आदेशों के अनुपालन में आखिर कौन बाधा बना? क्या यह प्रशासनिक उदासीनता है या फिर किसी स्तर पर संरक्षण? प्रार्थी का आरोप है कि उसने कई बार तहसील और जिला प्रशासन को प्रार्थना-पत्र देकर अवगत कराया, लेकिन न तो अवैध निर्माण ध्वस्त कराया गया और न ही कब्जेदार से कोई क्षतिपूर्ति वसूली गई। इससे न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि सरकारी आदेशों की खुली अवहेलना भी हो रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी बंजर भूमि पर इस तरह खुलेआम कब्जे होते रहेंगे और आदेशों को वर्षों तक नजरअंदाज किया जाता रहेगा, तो प्रशासन की विश्वसनीयता पर गहरा प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। अब निगाहें जिलाधिकारी कौशांबी पर टिकी हैं कि क्या वे इस गंभीर प्रकरण में संज्ञान लेकर तहसीलदार द्वारा पारित आदेशों का तत्काल अनुपालन कराएंगे, अवैध निर्माण को ध्वस्त कराएंगे, और कब्जेदार से नियमानुसार क्षतिपूर्ति की वसूली सुनिश्चित करेंगे या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
*सरकारी बंजर भूमि पर वर्षों से अवैध कब्जा, तहसील के आदेश ठंडे बस्ते में — प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल* कौशांबी। जनपद कौशांबी की सिराथू तहसील एक बार फिर सवालों के घेरे में है। तहसील क्षेत्र के ग्राम कशिया पश्चिम, परगना कड़ा में सरकारी बंजर भूमि पर करीब ढाई दशक से अवैध कब्जा चला आ रहा है, जबकि इस संबंध में तहसील स्तर से पारित आदेशों का आज तक अनुपालन नहीं कराया गया। ग्राम निवासी चंद्रशंकर पुत्र शीतला प्रसाद साहू ने जिलाधिकारी कौशांबी को शिकायती प्रार्थना-पत्र देकर प्रशासनिक लापरवाही की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है। प्रार्थना-पत्र के अनुसार आराजी संख्या 1283M, जो राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट रूप से सरकारी बंजर भूमि के रूप में दर्ज है, उस पर रामप्रसाद पुत्र छोटेलाल द्वारा वर्ष 2001 से अवैध रूप से कब्जा कर पक्का मकान और दीवार का निर्माण कर लिया गया है। हैरानी की बात यह है कि मामला संज्ञान में आने के बाद तहसीलदार सिराथू द्वारा उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 67 के अंतर्गत 10 अक्टूबर 2018 और 15 दिसंबर 2018 को अवैध कब्जा हटाने के स्पष्ट आदेश पारित किए गए थे, लेकिन लगभग सात वर्ष बीत जाने के बावजूद न तो कब्जा हटाया गया और न ही सरकारी भूमि को मुक्त कराया गया। इससे बड़ा सवाल यह है कि जब तहसील स्तर से आदेश पारित हो चुके थे, तो आदेशों के अनुपालन में आखिर कौन बाधा बना? क्या यह प्रशासनिक उदासीनता है या फिर किसी स्तर पर संरक्षण? प्रार्थी का आरोप है कि उसने कई बार तहसील और जिला प्रशासन को प्रार्थना-पत्र देकर अवगत कराया, लेकिन न तो अवैध निर्माण ध्वस्त कराया गया और न ही कब्जेदार से कोई क्षतिपूर्ति वसूली गई। इससे न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि सरकारी आदेशों की खुली अवहेलना भी हो रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी बंजर भूमि पर इस तरह खुलेआम कब्जे होते रहेंगे और आदेशों को वर्षों तक नजरअंदाज किया जाता रहेगा, तो प्रशासन की विश्वसनीयता पर गहरा प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। अब निगाहें जिलाधिकारी कौशांबी पर टिकी हैं कि क्या वे इस गंभीर प्रकरण में संज्ञान लेकर तहसीलदार द्वारा पारित आदेशों का तत्काल अनुपालन कराएंगे, अवैध निर्माण को ध्वस्त कराएंगे, और कब्जेदार से नियमानुसार क्षतिपूर्ति की वसूली सुनिश्चित करेंगे या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
- कौशाम्बी....बुधवार को पुलिस अधीक्षक कौशाम्बी राजेश कुमार द्वारा पुलिस कार्यालय कौशाम्बी में शासनादेश के क्रम में उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस से निरीक्षक नागरिक पुलिस के पद पर प्रोन्नत हुए उपनिरीक्षक राकेश राय को स्टार लगाकर पदोन्नति प्रदान की गई। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक द्वारा राकेश राय को निरीक्षक नागरिक पुलिस के पद पर पदोन्नति हेतु बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई तथा निष्ठा, ईमानदारी एवं कर्तव्यपरायणता के साथ कार्य करने हेतु प्रेरित किया गया। ब्यूरो रिपोर्ट सुनील साहू वैधयत ख़बर हिन्दी दैनिक PRIME 18 NEWS1
- *मंदिर के पास खुलेआम गांजा बिक्री, साधु के भेष में सक्रिय गांजा माफिया, जिम्मेदार मौन* *कौशांबी संदेश संवाददाता* *जिम्मेदार अधिकारी अभी तक नहीं किया कोई कार्रवाई* कौशांबी। थाना चरवा क्षेत्र अंतर्गत बेरुआ चौराहा पर कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती दी जा रही है। मंदिर के ठीक बगल में गोमती नदी के किनारे साधु के भेष में एक गांजा माफिया खुलेआम गांजा बेच रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस पर मौन साधे हुए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार उक्त व्यक्ति लंबे समय से साधु का चोला पहनकर इलाके में घूम रहा है और धार्मिक आस्था की आड़ में नशीले पदार्थों की खुलेआम बिक्री कर रहा है। मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं की आवाजाही के बावजूद गांजे का यह अवैध कारोबार बेखौफ जारी है।सूत्रों का कहना है कि गांजा बिक्री की जानकारी स्थानीय पुलिस और जिम्मेदार अधिकारियों को पहले से है, फिर भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस खुलेआम नशे के कारोबार से क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा है और युवा वर्ग तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है। मंदिर जैसे पवित्र स्थल के पास नशीले पदार्थों की बिक्री से धार्मिक भावनाएं भी आहत हो रही हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल मामले की जांच कर गांजा माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था कायम रह सके और युवाओं को नशे की लत से बचाया जा सके। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मामले पर कब तक मौन तोड़ते हैं और कार्रवाई होती है या नहीं।1
- बिजली विभाग की लापरवाही से लगातार घटनाएं घट रही है।1
- आगरा में एक विशेष समुदाय के युवक द्वारा मचाए गए आतंक के कारण 40 से अधिक हिंदू परिवारों ने अपने घरों को बेचने के लिए पोस्टर लगा दिए।1
- कौशाम्बी के बेनी रामकटरा क्षेत्र में उपखण्ड अधिकारी (SDO) पर उपभोक्ताओं से दुर्व्यवहार के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब कोई फरियादी अपनी समस्या लेकर कार्यालय पहुँचता है, तो उसकी बात सुनने के बजाय कथित तौर पर अपशब्द कहकर उसे बाहर कर दिया जाता है। अब पीड़ितों ने सामने आकर अपनी आपबीती सुनाई है। #कौशाम्बी #बेनीरामकटरा #SDO #उपभोक्ता_समस्या #दुर्व्यवहार #nonfollowersviewers #facebookree1
- नगर पालिका परिषद भरवारी का विकास बहुत तेजी से दौड़ रहा है यूपी जनपद कौशांबी नगर पालिका परिषद भरवारी किसी भी प्रकार की घटनाएं होने पर या खबर चलवाने के लिए संपर्क करे 7080627747 @pramodsachtak #graund#riporting1
- *सरकारी बंजर भूमि पर वर्षों से अवैध कब्जा, तहसील के आदेश ठंडे बस्ते में — प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल* कौशांबी। जनपद कौशांबी की सिराथू तहसील एक बार फिर सवालों के घेरे में है। तहसील क्षेत्र के ग्राम कशिया पश्चिम, परगना कड़ा में सरकारी बंजर भूमि पर करीब ढाई दशक से अवैध कब्जा चला आ रहा है, जबकि इस संबंध में तहसील स्तर से पारित आदेशों का आज तक अनुपालन नहीं कराया गया। ग्राम निवासी चंद्रशंकर पुत्र शीतला प्रसाद साहू ने जिलाधिकारी कौशांबी को शिकायती प्रार्थना-पत्र देकर प्रशासनिक लापरवाही की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है। प्रार्थना-पत्र के अनुसार आराजी संख्या 1283M, जो राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट रूप से सरकारी बंजर भूमि के रूप में दर्ज है, उस पर रामप्रसाद पुत्र छोटेलाल द्वारा वर्ष 2001 से अवैध रूप से कब्जा कर पक्का मकान और दीवार का निर्माण कर लिया गया है। हैरानी की बात यह है कि मामला संज्ञान में आने के बाद तहसीलदार सिराथू द्वारा उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 67 के अंतर्गत 10 अक्टूबर 2018 और 15 दिसंबर 2018 को अवैध कब्जा हटाने के स्पष्ट आदेश पारित किए गए थे, लेकिन लगभग सात वर्ष बीत जाने के बावजूद न तो कब्जा हटाया गया और न ही सरकारी भूमि को मुक्त कराया गया। इससे बड़ा सवाल यह है कि जब तहसील स्तर से आदेश पारित हो चुके थे, तो आदेशों के अनुपालन में आखिर कौन बाधा बना? क्या यह प्रशासनिक उदासीनता है या फिर किसी स्तर पर संरक्षण? प्रार्थी का आरोप है कि उसने कई बार तहसील और जिला प्रशासन को प्रार्थना-पत्र देकर अवगत कराया, लेकिन न तो अवैध निर्माण ध्वस्त कराया गया और न ही कब्जेदार से कोई क्षतिपूर्ति वसूली गई। इससे न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि सरकारी आदेशों की खुली अवहेलना भी हो रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी बंजर भूमि पर इस तरह खुलेआम कब्जे होते रहेंगे और आदेशों को वर्षों तक नजरअंदाज किया जाता रहेगा, तो प्रशासन की विश्वसनीयता पर गहरा प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। अब निगाहें जिलाधिकारी कौशांबी पर टिकी हैं कि क्या वे इस गंभीर प्रकरण में संज्ञान लेकर तहसीलदार द्वारा पारित आदेशों का तत्काल अनुपालन कराएंगे, अवैध निर्माण को ध्वस्त कराएंगे, और कब्जेदार से नियमानुसार क्षतिपूर्ति की वसूली सुनिश्चित करेंगे या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।1
- कौशाम्बी...अपने बड़े भाई सुखलाल मौर्य के सुपुत्र एवं अपने भतीजे रवी मौर्य के वैवाहिक मांगलिक कार्यक्रम में सम्मिलित हुए यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य। रिपोर्ट सुनील साहू PRIME 18 NEWS1
- एक महीने बाद युवक की कब्र से शव को बाहर निकल गया।1