कॉरपोरेट जॉब चाहिए थी? मुबारक हो, 'स्कैम-इंक' में आपका स्वागत है! अजीत मिश्रा (खोजी) बनारस में एक और फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश हुआ है, और यकीन मानिए, यह खबर पढ़कर कॉर्पोरेट जगत के कई रिक्रूटर्स की आँखें फटी की फटी रह गई होंगी। भाई, 21 युवतियाँ और 11 युवक पकड़े गए हैं—यानी पूरा का पूरा 'डेस्कटॉप स्टार्टअप' ही धर दबोचा गया है। सोचिए, बंदे कितने टैलेंटेड थे! रेज़्यूमे में स्किल्स भले ही 'कम्युनिकेशन' और 'सेल्स' लिखी हों, लेकिन असल में वे "पैसे गायब करने की कला" (Disappearing Wealth Management) में पीएचडी कर चुके थे। इनकी कार्यप्रणाली के मुख्य आकर्षण: मल्टीनेशनल का चोला: खुद को किसी प्रतिष्ठित विदेशी कंपनी का ऐसा एजेंट बताते थे कि सामने वाला अपना बैंक अकाउंट खुद ही इनके हवाले कर, चाय पीने चला जाए। मल्टी-टास्किंग ठगी: ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश (Investment), और डिजिटल मार्केटिंग—यानी हर उम्र और हर लालच के कस्टमर के लिए कस्टमाइज्ड सर्विस उपलब्ध थी। नौकरी का नया आयाम: जहाँ देश के युवा 15-20 हजार की नौकरी के लिए धक्के खा रहे हैं, वहीं ये लोग "घर बैठे लाखों कमाने" का झांसा खुद दूसरों को देकर, खुद हवालात की हवा खाने का शानदार पैकेज पा चुके हैं। अब पुलिस ने कंप्यूटर डेटा और दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। उम्मीद है अगली बार जब ये लोग कोई 'इंटरव्यू' देंगे, तो वह किसी थाने में इंस्पेक्टर साहब के सामने होगा और सवाल कुछ यूं होंगे—"बताइए, ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर अगला चूना किसे लगाने का प्लान था?" बनारस की पावन धरती पर ज्ञान की गंगा बहती है, पर इन महानुभावों ने सोचा कि क्यूँ न ज्ञान के साथ-साथ थोड़ा 'बैंक बैलेंस' भी साफ कर लिया जाए! #Varanasi #CyberCrime #CallCenterRaid #DigitalFraud #CorporateLife #OnlineScam #UttarPradeshPolice #NewsSatire #Vyang
कॉरपोरेट जॉब चाहिए थी? मुबारक हो, 'स्कैम-इंक' में आपका स्वागत है! अजीत मिश्रा (खोजी) बनारस में एक और फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश हुआ है, और यकीन मानिए, यह खबर पढ़कर कॉर्पोरेट जगत के कई रिक्रूटर्स की आँखें फटी की फटी रह गई होंगी। भाई, 21 युवतियाँ और 11 युवक पकड़े गए हैं—यानी पूरा का पूरा 'डेस्कटॉप स्टार्टअप' ही धर दबोचा गया है। सोचिए, बंदे कितने टैलेंटेड थे! रेज़्यूमे में स्किल्स भले ही 'कम्युनिकेशन' और 'सेल्स' लिखी हों, लेकिन असल में वे "पैसे गायब करने की कला" (Disappearing Wealth Management) में पीएचडी कर चुके थे। इनकी कार्यप्रणाली के मुख्य आकर्षण: मल्टीनेशनल का चोला: खुद को किसी प्रतिष्ठित विदेशी कंपनी का ऐसा एजेंट बताते थे कि सामने वाला अपना बैंक अकाउंट खुद ही इनके हवाले कर, चाय पीने चला जाए। मल्टी-टास्किंग ठगी: ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश (Investment), और डिजिटल मार्केटिंग—यानी हर उम्र और हर लालच के कस्टमर के लिए कस्टमाइज्ड सर्विस उपलब्ध थी। नौकरी का नया आयाम: जहाँ देश के युवा 15-20 हजार की नौकरी के लिए धक्के खा रहे हैं, वहीं ये लोग "घर बैठे लाखों कमाने" का झांसा खुद दूसरों को देकर, खुद हवालात की हवा खाने का शानदार पैकेज पा चुके हैं। अब पुलिस ने कंप्यूटर डेटा और दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। उम्मीद है अगली बार जब ये लोग कोई 'इंटरव्यू' देंगे, तो वह किसी थाने में इंस्पेक्टर साहब के सामने होगा और सवाल कुछ यूं होंगे—"बताइए, ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर अगला चूना किसे लगाने का प्लान था?" बनारस की पावन धरती पर ज्ञान की गंगा बहती है, पर इन महानुभावों ने सोचा कि क्यूँ न ज्ञान के साथ-साथ थोड़ा 'बैंक बैलेंस' भी साफ कर लिया जाए! #Varanasi #CyberCrime #CallCenterRaid #DigitalFraud #CorporateLife #OnlineScam #UttarPradeshPolice #NewsSatire #Vyang
- गुरु पूर्णिमा पर बाबा भदेश्वर नाथ मंदिर पहुंचे भाजपा के असम प्रभारी हरीश द्विवेदी, गुरुओं का लिया आशीर्वाद। गुरु पूर्णिमा पर बाबा भदेश्वर नाथ मंदिर पहुंचे भाजपा के असम प्रभारी हरीश द्विवेदी, गुरुओं का लिया आशीर्वाद। बस्ती- गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार को बस्ती पहुंचे पूर्व सांसद एवं असम प्रदेश भाजपा प्रभारी हरीश द्विवेदी ने बाबा भदेश्वर नाथ शिव मंदिर में दर्शन-पूजन किया। मंदिर परिसर में उन्होंने गुरुओं को सम्मानित कर उनका आशीर्वाद लिया। पूजा के दौरान उन्होंने प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर उनके साथ बस्ती सदर ब्लॉक प्रमुख राकेश श्रीवास्तव, भाजपा नेता प्रमोद पांडेय , वरिष्ठ भाजपा नेता जगदीश शुक्ला, विद्यामणि सिंह, प्रिंस शुक्ला, दिलीप कुमार पांडेय , अश्वनी उपाध्याय, सुरेंद्र चौधरी, अर्जुन उपाध्याय, विशुद्धानंद त्रिपाठी मंडल अध्यक्ष बस्ती सदर, आजाद पुरी, अमित चौधरी और राजन चौहान मौजूद रहे। हरीश द्विवेदी ने कहा कि गुरु का स्थान सबसे ऊंचा है। गुरु के मार्गदर्शन से ही समाज और राष्ट्र आगे बढ़ता है। गुरु पूर्णिमा हमें अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देती है।1
- साइबर ठगी के शिकार पीड़ित को मिली बड़ी राहत, मेहदावल साइबर सेल ने वापस कराए 30 हजार रुपये मोबाइल फोन गुम होने के बाद खाते से निकाले गए थे 51,900 रुपये, त्वरित कार्रवाई से पीड़ित को वापस मिली धनराशि संतकबीरनगर। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में संचालित 'क्रैक साइबर क्राइम' अभियान के तहत साइबर अपराधों की रोकथाम एवं पीड़ितों को त्वरित राहत दिलाने के लिए जनपद पुलिस लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में साइबर सेल थाना मेहदावल की टीम ने साइबर ठगी के एक मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ित को 30,000 रुपये की धनराशि वापस कराकर बड़ी राहत प्रदान की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना मेहदावल क्षेत्र के ग्राम एवं पोस्ट सांडे खुर्द निवासी जयनाथ पुत्र रामायन का मोबाइल फोन गुम हो गया था। मोबाइल फोन गुम होने के बाद अज्ञात साइबर अपराधियों ने उनके मोबाइल नंबर का दुरुपयोग कर बैंक खाते से 51,900 रुपये की धनराशि धोखाधड़ी कर निकाल ली। घटना की जानकारी होने पर पीड़ित ने तत्काल साइबर हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, जिसकी शिकायत संख्या 23103260042828 पंजीकृत की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल थाना मेहदावल की टीम ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। आरक्षी संदीप कुमार गौतम एवं आरक्षी सौरभ कुमार ने संबंधित बैंक से समन्वय स्थापित कर तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से धोखाधड़ी की गई धनराशि को होल्ड कराया। आवश्यक विधिक प्रक्रिया पूर्ण करने के उपरांत पीड़ित के खाते में 30,000 रुपये की धनराशि सफलतापूर्वक वापस करा दी गई। अपनी मेहनत की कमाई वापस मिलने पर पीड़ित ने संतकबीरनगर पुलिस एवं साइबर सेल टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनकी त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की सराहना की। पीड़ित एवं उनके परिजनों ने थाना मेहदावल पुलिस की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। इस सराहनीय कार्यवाही में प्रभारी निरीक्षक थाना मेहदावल राकेश कुमार सिंह, प्रभारी साइबर सेल उपनिरीक्षक संजय कुमार वर्मा, आरक्षी संदीप कुमार गौतम, आरक्षी सौरभ कुमार तथा रिक्रूट आरक्षी अमित कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जनता से अपील : जनपद पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक, कॉल अथवा संदेश पर अपनी बैंक संबंधी जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड या यूपीआई पिन साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति रिश्तेदार या मित्र बनकर धनराशि की मांग करे तो उसकी पहचान की पुष्टि किए बिना पैसे न भेजें। साइबर अपराधी अक्सर आवाज बदलकर अथवा भावनात्मक दबाव बनाकर लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं। किसी भी संदिग्ध साइबर लेनदेन की शिकायत तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 अथवा साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज कराएं।1
- गोसेवा को जनआंदोलन बना रही योगी सरकार, संतकबीरनगर की 12 गोशालाओं में 1369 निराश्रित गोवंश सुरक्षित-महेश शुक्ला सीसीटीवी निगरानी, गोपालकों को आर्थिक सहायता और पारदर्शी व्यवस्था से मजबूत हो रहा गो-संरक्षण अभियान संतकबीरनगर।। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित गो-संरक्षण अभियान जनपद संतकबीरनगर में लगातार प्रभावी ढंग से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में निराश्रित एवं असहाय गोवंश के संरक्षण, संवर्धन और बेहतर देखभाल के लिए जिले में व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। वर्तमान में जनपद की 12 गो-आश्रय स्थलों में 1369 निराश्रित गोवंश का सुरक्षित संरक्षण किया जा रहा है।जिला प्रशासन के अनुसार गो-आश्रय स्थलों पर गोवंश को नियमित चारा, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सकीय सुविधाएं तथा सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार प्रत्येक निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण के लिए 50 रुपये प्रतिदिन प्रति पशु की दर से धनराशि उपलब्ध करा रही है। 22 सीसीटीवी कैमरों से हो रही 24 घंटे निगरानी गोशालाओं के संचालन को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए जिले की 12 गोशालाओं में 22 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों के माध्यम से 24 घंटे निगरानी की जा रही है, जिससे गोवंश की सुरक्षा, देखभाल और व्यवस्थाओं पर लगातार नजर रखी जा रही है। गोपालकों को भी मिल रहा आर्थिक सहयोग मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के अंतर्गत जिले में 229 गोवंश को 139 इच्छुक एवं जिम्मेदार गोपालकों को सुपुर्द किया गया है। सरकार इन गोवंशों के भरण-पोषण के लिए 50 रुपये प्रतिदिन प्रति पशु की सहायता राशि सीधे गोपालकों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेज रही है। इससे गोपालकों की आय बढ़ने के साथ-साथ गो-संरक्षण को भी मजबूती मिल रही है। गोवंश की सुरक्षा को लेकर सरकार सख्त जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गोवंश की सुरक्षा के प्रति सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गो-तस्करी और गोवंश से जुड़े अपराधों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही अफवाह फैलाकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न करने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि गो-संरक्षण से जुड़ी भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें तथा किसी भी प्रकार की सूचना मिलने पर प्रशासन को अवगत कराएं। सरकार गोसेवा को सामाजिक सहभागिता और सुशासन का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए निरंतर कार्य कर रही है।1
- *क्रैक साइबर क्राइम के तहत साइबर ठगी के शिकार हुए पीड़ित को साइबर सेल थाना मेंहदावल पुलिस टीम ने दिलाई राहत, वापस कराई गई 30,000.00 रू की धनराशि पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन में क्रैक साइबर क्राइम के तहत साइबर अपराधों की रोकथाम एवं पीड़ितों को त्वरित राहत दिलाने हेतु *साइबर सेल थाना मेंहदावल टीम* द्वारा सतत प्रभावी कार्यवाई करते हुए अज्ञात व्यक्ति द्वारा आवेदक का मोबाइल फ़ोन गुम हो जाने के उपरान्त आवेदक का मोबाइल नंबर का गलत तरीके से उपयोग कर आवेदक के खाते से 51,900.00 रूपये निकालकर आवेदक के साथ धोखाधड़ी कर साइबर ठगी की गयी, ठगी के शिकार हुए पीड़ित को 30,000.00 रुपये की धनराशि आवेदक के खाते में सफलतापूर्वक वापस करायी गयी। घटना का संक्षिप्त विवरण पीड़ित जयनाथ पुत्र रामायन, निवासी ग्राम एवं पोस्ट सांडे खुर्द, थाना मेंहदावल, जनपद संतकबीरनगर का मोबाइल फोन गुम हो जाने के उपरांत अज्ञात साइबर अपराधियों द्वारा उनके मोबाइल नंबर का दुरुपयोग कर उनके बैंक खाते से ₹51,900/- की धोखाधड़ी कर ली गई। घटना की जानकारी होने पर पीड़ित को अपने साथ साइबर ठगी होने का एहसास हुआ, जिसके बाद उन्होंने तत्काल साइबर हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत संख्या 23103260042828 पंजीकृत की गई। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आरक्षी संदीप कुमार गौतम एवं आरक्षी सौरभ कुमार द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंक से समन्वय स्थापित किया गया तथा तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से धनराशि को होल्ड कराया गया। आवश्यक विधिक प्रक्रिया पूर्ण करने के उपरांत पीड़ित के खाते में ₹30,000/- की धनराशि सफलतापूर्वक वापस करा दी गई। अपनी मेहनत की कमाई वापस प्राप्त होने पर पीड़ित ने संतकबीरनगर पुलिस एवं साइबर टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनकी त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही की सराहना की। *साइबर सेल टीम-* प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार सिंह, उ0नि0 संजय कुमार वर्मा, आरक्षी संदीप कुमार गौतम , आरक्षी सौरभ कुमार व रिक्रूट आरक्षी अमित कुमार । *साइबर सेल टीम-* प्रभारी निरीक्षक थाना मेहदावल राकेश कुमार सिंह, उ0नि0 संजय कुमार वर्मा(प्रभारी साइबर सेल), आरक्षी संदीप कुमार गौतम , आरक्षी सौरभ कुमार व रिक्रूट आरक्षी अमित कुमार ।1
- शिकायत है ! दिनांक :- 3 1 7 2026 ई0, " नमामि गंगे 'ग्रामीण क्षेत्रों में का जल की व्यवस्था ! 👉🏾 संदर्भ संख्या :- 9261 86000 1325 1, यह समस्या ग्राम पंचायत भगवानपुर से जुड़ा हुआ है । ग्राम पंचायत भगवानपुर में हर घर जल हर घर नल " नमामि गंगे " के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था करवाई गई है । ➡️ जैसा की वीडियो में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि जिस पाइपलाइन को जोड़ा गया है ,वह पानी की मुख्य जलवाहिनी लाइन है। यह असुरक्षित है ! यह नंगी पाइप है ! स्पष्ट दिखाई दे रहा है। कभी भी इस जल वाहिनी में किसी भी प्रकार से ड्रिलिंग करके केमिकल प्रवाहित किया जा सकता है अथवा पाइप को को काटकर खेतों में जल प्रवाहित किया जा सकता है । जब तक शासन प्रशासन को इसका पता चलेगा तब तक बहुत विलंब हो जाएगा । यह जल विभाग से जुड़े हुए अधिकारियों की उदासीनता स्पष्ट दिखाई दे रही है। उनके लापरवाही और आलस्था का प्रमाण मिल रहा है। इन पाइप लाइनों को अंडरग्राउंड अथवा कंक्रीट से सीमेंट से ढक देना चाहिए , ताकि पाइप सुरक्षित रहे और यातायात भी प्रभावित न हो । ‼️ आधा अधूरा काम करके दिखा दिया गया ‼️ जब के काम आधा अधूरा है और असुरक्षित है । इसका प्रमाण है ! संदर्भ संख्या 926186 000 13251 के माध्यम से सरकार को दिखा दिया गया कि हमने काम कर दिया है । समस्या का निस्तारण दिखा दिया गया। लेकिन जमीनी हकीकत स्पष्ट दिखाई दे रहा है । 🕓 शीघ्र काम पूरा किया जाएगा ⁉️ शीघ्रता का पैमाना क्या है ⁉️ कितने घंटे , कितने दिन , कितने मिनट , कितने वर्ष का शीघ्र होता है ❓ शासन प्रशासन के अधिकारी जो जल विभाग से जुड़े हुए हैं ,"प्रमाणित करेंगे "❓ ऐसा दिखाकर यह सभी अधिकारी अपना बचाव कर रहे हैं । जंता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं❗ 🔺 यही है अंधेर नगरी चौपट राजा ☑️,1
- हजरतगंज का ‘प्रेस’नामा: जब क्लीनर भाई बने ‘चौथी दुनिया’ के सिपहसालार! लखनऊ के पॉश इलाके हजरतगंज की सड़क पर इन दिनों एक अजीबोगरीब ‘महाभारत’ छिड़ी हुई है। ट्रैफिक पुलिस या प्रशासन नहीं, बल्कि खुद को पत्रकार बताने वाले कुछ संभ्रांत मुंशी टाइप लोग सड़कों पर उतर आए हैं और फर्जी ‘प्रेस’ लिखे वाहनों की ऐसी हवा निकाल रहे हैं कि अच्छे-अच्छों का पसीना छूट जाए। वीडियो का नजारा कुछ ऐसा है कि मानो सड़क पर कोई ‘प्रेस कॉन्फ्रेंस’ कम और यूपीएससी का इंटरव्यू चल रहा हो। एक भाई साहब अपनी हीरो स्पलेंडर बाइक (UP32 DT 4938) पर ऐसे शान से बैठे हैं, जैसे कल ही उन्होंने ‘दैनिक भ्रष्टाचार टाइम्स’ में कोई खूंखार इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट छापी हो। तभी हमारे मुख्य अन्वेषक (जांचकर्ता) साहब प्रकट होते हैं और बड़े ही शालीनता से पूछते हैं— "भैया, काम क्या करते हो?" भाई साहब थोड़ा झिझकते हुए कहते हैं— "जी, क्लीनर का..." बस, फिर क्या था! हमारे जर्नलिज्म के ठेकेदार भड़क उठे— "क्लीनर का काम करते हो और आगे ‘प्रेस’ लिखकर घूमते हो? बर्फ बेचने वाले भी अब प्रेस लिखेंगे क्या?!" अब जरा सोचिए! बेचारी बर्फ और क्लीनर की सफाई का इस महान प्रेस की स्वतंत्रता से क्या लेना-देना? लेकिन जनाब मानने को तैयार कहां। वे तो मौके पर ही चालान काटने और तुरंत बाइक से ‘प्रेस’ का स्टीकर खुरचवाने पर अड़े हैं। बेचारे क्लीनर भाई हाथ जोड़कर, गिड़गिड़ाकर ‘सॉरी-सॉरी’ बोल रहे हैं, मानों उन्होंने लखनऊ की जगह सीधे अमेरिका के व्हाइट हाउस में सेंध लगा दी हो। आलम यह है कि वाहन पर ‘प्रेस’ लिखा होना अब लखनऊ में किसी आर्म्स लाइसेंस से कम खतरनाक नहीं रह गया है। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन हो न हो, लेकिन अगर गाड़ी पर गलती से भी ‘प्रेस’ चिपक गया, तो मुंशी जी आकर आपकी गाड़ी का ऐसा ‘पोस्टमॉर्टम’ करेंगे कि आप जीवनभर भूल जाएंगे कि प्रेस आखिर होता क्या बला है! खैर, अंततः जनता यही सोच रही है कि भाईसाहब असली पत्रकार कौन हैं और नकली कौन—यह तय करने का ठेका आखिर इन जनाब को किसने दिया? तब तक के लिए हजरतगंज की सड़क पर यह ‘प्रेस प्रेम’ यूं ही बपौती बना घूम रहा है!1
- कॉरपोरेट जॉब चाहिए थी? मुबारक हो, 'स्कैम-इंक' में आपका स्वागत है! अजीत मिश्रा (खोजी) बनारस में एक और फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश हुआ है, और यकीन मानिए, यह खबर पढ़कर कॉर्पोरेट जगत के कई रिक्रूटर्स की आँखें फटी की फटी रह गई होंगी। भाई, 21 युवतियाँ और 11 युवक पकड़े गए हैं—यानी पूरा का पूरा 'डेस्कटॉप स्टार्टअप' ही धर दबोचा गया है। सोचिए, बंदे कितने टैलेंटेड थे! रेज़्यूमे में स्किल्स भले ही 'कम्युनिकेशन' और 'सेल्स' लिखी हों, लेकिन असल में वे "पैसे गायब करने की कला" (Disappearing Wealth Management) में पीएचडी कर चुके थे। इनकी कार्यप्रणाली के मुख्य आकर्षण: मल्टीनेशनल का चोला: खुद को किसी प्रतिष्ठित विदेशी कंपनी का ऐसा एजेंट बताते थे कि सामने वाला अपना बैंक अकाउंट खुद ही इनके हवाले कर, चाय पीने चला जाए। मल्टी-टास्किंग ठगी: ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश (Investment), और डिजिटल मार्केटिंग—यानी हर उम्र और हर लालच के कस्टमर के लिए कस्टमाइज्ड सर्विस उपलब्ध थी। नौकरी का नया आयाम: जहाँ देश के युवा 15-20 हजार की नौकरी के लिए धक्के खा रहे हैं, वहीं ये लोग "घर बैठे लाखों कमाने" का झांसा खुद दूसरों को देकर, खुद हवालात की हवा खाने का शानदार पैकेज पा चुके हैं। अब पुलिस ने कंप्यूटर डेटा और दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। उम्मीद है अगली बार जब ये लोग कोई 'इंटरव्यू' देंगे, तो वह किसी थाने में इंस्पेक्टर साहब के सामने होगा और सवाल कुछ यूं होंगे—"बताइए, ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर अगला चूना किसे लगाने का प्लान था?" बनारस की पावन धरती पर ज्ञान की गंगा बहती है, पर इन महानुभावों ने सोचा कि क्यूँ न ज्ञान के साथ-साथ थोड़ा 'बैंक बैलेंस' भी साफ कर लिया जाए! #Varanasi #CyberCrime #CallCenterRaid #DigitalFraud #CorporateLife #OnlineScam #UttarPradeshPolice #NewsSatire #Vyang1