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भारत में चुनाव 

 

भारत लोकतांत्रिक गणराज्य है। भारत के संविधान के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में चुनाव के जरिए प्रतिनिधि चुने जाते हैं। संसद के अंतर्गत देश के राष्ट्रपति और दो सदन- लोकसभा और राज्यसभा आते हैं। हर राज्य में विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत विधायिकाएं होते हैं। जबकि संसद के अंदर सांसदों का चुनाव (Member of Parliament election) होता है। विधानसभा चुनाव (Legislative assembly election) कर राज्य के मुख्यमंत्री का चुनाव किया जाता है। भारत के 22 राज्यों में राज्यपाल और राज्य विधानसभा की व्यवस्था है जबकि बाकी 7 राज्यों में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में दो सदन- विधान परिषद और विधान सभा की व्यवस्था होती है। साथ ही दिल्ली और पुडुचेरी की अपनी विधान सभाएं होती हैं।

 

भारत में 543 संसदीय निर्वाचन क्षेत्र है और 36 निर्वाचक इकाइयां हैं। 31 विधानसभाओं में 4120 निर्वाचन क्षेत्र हैं। संसद में दो सदन राज्यसभा और लोकसभा होते हैं। राज्यसभा 250 सदस्यों से ज्यादा नहीं हो सकते हैं, वर्तमान में 243 सदस्य है। राष्ट्रपति द्वारा 12 सदस्य नामित किए जाते हैं। लोकसभा में 543 सदस्य सांसद के तौर पर जुड़ते हैं। चुनाव प्रक्रिया (Election Process)

 

चुनाव की प्रक्रिया में प्रवेश करने के लिए उम्मीदवारों को चुनाव आयोग के साथ नामांकन दाखिल करना पड़ता है। इस दौरान राजनीतिक पार्टियों को चुनावों में प्रचार के लिए सरकारी धन का उपयोग करने से रोक दिया गया है। इस दौरान सरकार को नए प्रोजेक्ट शुरू करने से भी मना किया जाता है। सभी नामांकन भरने के बाद उम्मीदवारों की सूची प्रकाशित की जाती है। चुनाव प्रक्रिया सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक चलती है। मतदान प्रभारी उस क्षेत्र का कलेक्टर होता है। अब मतदान प्रक्रिया के लिए ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) का उपयोग किया जाता है।

 

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भारत में चुनाव का महत्व 

 

चुनाव लोकतंत्र का आधार होता है। आजादी के बाद पहला चुनाव साल 1951-52 में आयोजित किया गया था। ब्रिटिश शासन के समय भी चुनाव होते थे लेकिन आजादी के पहले वोट देने का अधिकार बहुत कम लोगों के पास था, आजादी के बाद भारत सरकार ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को अपनाया, जिससे हर वयस्क भारतीय को वोट देने का अधिकार मिला।

चुनाव के जरिए जनता अपनी आवाज रखने वाले प्रतिनिधि को चुनती है, जो उस क्षेत्र के विकास पर कार्य करता है, जिसकी प्राथमिकताएं और विचार उनसे मिलते हैं। चुनाव के जरिए जनता अपना नेता चुनती है। जनता चुनाव के जरिए तत्कालीन सरकार के काम और विकास को देखते हुए अपने वोट के जरिए उसे सत्ता से बाहर कर सकती है। 

चुनाव के जरिए जनता को अपने क्षेत्र और देश से जुड़े समस्याओं और मुद्दों को उठाने का मौका मिलता है। राजनीतिक दल इन मुद्दों और समस्याओं को अपने एजेंडे में अपनाते हैं। इतना ही नहीं, अगर भारत का कोई नागरिक ऐसे कोई सुधार करना चाहता है, जो किसी दल का एजेंडा नहीं है तब वह स्वतंत्र रूप से या फिर नया राजनीतिक दल बनाकर चुनाव लड़ सकता है। भारत में हर पांच साल में चुनाव होते हैं। यह एक तरह से सुधारात्मक प्रणाली होता है, जिससे हर नियत अवधि के बाद जनता और राजनीतिक दल दोनों सत्ताधारी पार्टी के काम की समीक्षा करते हैं। 

 

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भारत में सरकार में सर्वोच्च शक्ति किसके पास होती है?

 

भारत के संविधान के अनुच्छेद 53 (1) के मुताबिक, भारत के राष्ट्रपति (President supreme power) के पास सर्वोच्च शक्ति होती है। राष्ट्रपति को सभी संवैधानिक शक्तियाँ प्राप्त होती हैं और वह उन्हें सीधे या अपने अधीन काम कर रहे अधिकारियों के जरिए उपयोग करते हैं। राष्ट्रपति को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 74 के मुताबिक, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) द्वारा दी गई सहायता और सलाह के अनुसार कार्य करना होता है।

 

 

आम चुनाव यानी लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में क्या अंतर है?

 

आम चुनाव से तात्पर्य लोकसभा चुनाव (Lok sabha chunav) से है। लोकसभा चुनाव यानी आम चुनाव के जरिए संसद के सदस्यों का चयन किया जाता है। संसद के सदस्य सांसद (Member of Parliament) कहलाते हैं, सांसद वयस्क मताधिकार के आधार पर सीधे लोगों द्वारा चुने जाते हैं। पूरे देश में अलग-अलग चरणों में आम चुनाव होते हैं। सभी राज्यों में आम चुनाव हो जाने के बाद परिणाम घोषित किए जाते हैं। जो भी राजनीतिक बहुमत जीतते हैं, उनके नेता को देश के प्रधानमंत्री के रूप में चुना जाता है। 

जबकि विधानसभा चुनाव (Vidhansbha chunav) राज्य की बागडोर के लिए होता है। इसके जरिए राज्य का मुख्यमंत्री चुना जाता है। विधानसभा चुनाव हर 5 साल में आयोजित किए जाते हैं और इसमें भारतीय मतदाता विधान सभा (या विधान सभा) के सदस्यों को चुनते हैं। निर्वाचित सदस्य विधायक (MLA) कहलाते हैं। विधानसभा चुनाव (Vidhansbha chunav) कभी भी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक ही वर्ष में नहीं कराए जाते हैं। बहुमत से जीतने वाली पार्टी राज्य में सरकार बना सकती है। बहुमत वाली पार्टी तब एक उम्मीदवार का चुनाव करती है जिसने राज्य से चुनाव लड़ा हो।

 

 

 

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